Saturday, October 28, 2017

दैनिक समसामयिकी 09 Oct 2017(Monday)

1.अगले साल से त्रिभाषा फोर्मुले से बाहर हो जाएंगी विदेशी भाषाएं

• अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में जर्मन और फ्रेंच जैसी विदेशी भाषाएं त्रिभाषा फॉमरूले का हिस्सा नहीं होंगी। माना जा रहा है कि मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कहा है कि जो विद्यार्थी विदेशी भाषाएं सीखने के इच्छुक हैं उन्हें वैकल्पिक विषय के रूप में चौथी भाषा का चयन करना चाहिए।
• सूत्रों के मुताबिक, ‘संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध भाषाएं ही त्रिभाषा फ़ॉर्मूले के तहत सिखाई जानी चाहिए। इस संबंध में सीबीएसई के साथ विचार-विमर्श जारी है और अगले शैक्षणिक सत्र से बदलावों को लागू किए जाने की संभावना है।’
• राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, त्रिभाषा फ़ॉर्मूले का आशय है कि हिंदी भाषी राज्यों में विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा एक आधुनिक भारतीय भाषा सीखनी चाहिए। जबकि गैर- हिंदी भाषी राज्यों में उन्हें स्थानीय भाषा और अंग्रेजी के अलावा हिंदी भी सीखनी चाहिए।
• हालांकि, 18 हजार से संबद्ध संस्थानों में से ज्यादातर आठवीं तक मातृभाषा या हिंदी, अंग्रेजी और एक विदेशी भाषा सिखाते हैं।
• पिछले साल दिसंबर में सीबीएसई ने माध्यमिक शिक्षा के लिए प्रस्तावित त्रिभाषा फॉमरूला मानव संसाधन विकास मंत्रलय को भेजा था। इस प्रस्ताव और सीबीएसई के वर्तमान त्रिभाषा फ़ॉर्मूले में दो बड़े अंतर हैं। पहला, नई योजना आठवीं की बजाय दसवीं तक लागू होगी। दूसरा, इसमें विदेशी भाषा सम्मिलित नहीं होगी।
• इस फ़ॉर्मूले में आठवीं अनुसूची में दर्ज भारतीय भाषाएं ही पढ़ाई जाएंगी
• इच्छुक विद्यार्थियों को विदेशी भाषा वैकल्पिक विषय के रूप में लेनी होगी

2. सीबीआइ को आरटीआइ के दायरे में लाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर

• केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआइ को सूचना के अधिकार (आरटीआइ) से अलग रखने के सरकार के वर्ष 2011 के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौैती दी गई है। एक याचिका दायर करके इस मामले की जल्द सुनवाई की अपील की गई है।
• सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी ताजा अपील में याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में बोफोर्स मामले में मुख्य आरोपी ओत्तावियो क्वात्रोचि को केवल बचाने के लिए सीबीआइ को आरटीआइ के दायरे से बाहर रखा गया है।
• उल्लेखनीय है कि पहले यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में दायर किया गया था। लेकिन जब केंद्र सरकार ने कहा कि इस मुद्दे पर कई याचिकाएं देश भर में विभिन्न हाईकोर्ट में दायर की गई हैं, फिर इसे सुप्रीम कोर्ट में हस्तांतरित कर दिया गया। एक जनहित याचिका वकील अजय अग्रवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में वर्ष 2011 में दायर की गई थी।
• जब वकील अजय अग्रवाल ने यह आरोप लगाया कि सीबीआइ को आरटीआइ से विमुख इसलिए रखा गया है क्योंकि उन्होंने बोफोर्स घोटाले के संबंध में रिश्वत को लेकर कुछ जानकारियां मांगी हैं। इस पर हाईकोर्ट ने जुलाई 2011 में सरकार और सीबीआइ को नोटिस जारी किया था।
• इस पर सरकार ने जवाब दिया था कि कोई बात छिपाने के लिए नहीं किया गया है और इसमें न्यायपालिका को भी दखल देने की जरूरत नहीं है। जबकि याचिका में कहा गया कि आरटीआइ से खुफिया विभाग और सुरक्षा एजेंसियों को सुरक्षा कारणों से छूट दी गई है।
• इसमें आइबी, रॉ, डीआरआइ और ईडी शामिल हैं। लेकिन जब जांच एजेंसी ने सभी मामले सुप्रीम कोर्ट में एक जगह स्थानांतरित करने की अपील की तो दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाही पर रोक लग गई।

3. अफगानिस्तान में आइएस की मदद कर रहे अमेरिकी बल: करजई

• पूर्व अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई ने अमेरिका पर बड़ा आरोप लगाया है। उनका दावा है कि अफगानिस्तान में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) का उभार अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों की निगरानी के बीच पिछले तीन-चार साल के दौरान हुआ। करजई के अनुसार उन्हें इस बात का बहुत संदेह है कि अफगानिस्तान में अमेरिका के अड्डों का उपयोग आइएस की सहायता के लिए किया जाता है।
• लंदन में रूस टूडे को दिए इंटरव्यू में करजई ने कहा, 'अफगान लोगों से मुझे रोजाना खबर मिलती है कि ऐसे सैन्य हेलीकॉप्टर अफगानिस्तान में आइएस को आपूर्ति कर रहे हैं जिन पर कोई प्रतीक चिह्न नहीं है।'
• उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में अरबों डॉलर खर्च किए जाने के बावजूद आतंकवाद ज्यादा बढ़ा है। इस पर अफगान लोग यह पूछ रहे हैं कि अगर अमेरिका आतंकवाद को परास्त करने के लिए यहां आया है तो यह समस्या पहले से भी बड़ी क्यों हो गई है?
• पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, 'हम यह नहीं चाहते हैं कि हमारे देश में विनाशकारी बड़े बम गिराए जाएं। हम शांति चाहते हैं।' उन्होंने कहा कि अमेरिकी बलों द्वारा 'मदर ऑफ ऑल बम' गिराया जाना उत्तर कोरिया को ताकत दिखाने का संकेत था, लेकिन यह अफगान लोगों पर अत्याचार था।
• अमेरिका ने इस साल 13 अप्रैल को इस सबसे बड़े गैर परमाणु बम को पूर्वी अफगानिस्तान में आइएस के ठिकाने पर गिराया था।

4. देशभर में लागू हो सकती है मप्र की भावांतर योजना

• मध्य प्रदेश में किसानों को फसल का उचित दाम दिलाने के लिए लागू ‘मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना’ देशभर में लागू हो सकती है। इसके जरिए बाजार में उपज के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम होने पर अंतर की राशि सरकार की ओर से किसान को अदा की जाएगी।
• कई राज्य इस योजना का मसौदा पहले ले चुके हैं। सोमवार को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रलय में योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने को लेकर बैठक बुलाई गई है।
• उपज के वाजिब दाम को लेकर देशभर में किसान आंदोलन हो रहे हैं। इससे निपटने के लिए भावांतर देने के फामरूले को सबसे बेहतर माना जा रहा है। इसमें न तो सरकार को फसल की खरीद करनी पड़ेगी और न ही उसके भंडारण और विपणन की कोई चिंता होगी।
• सरकार जिन फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है, उन्हें और अन्य फसलों को इसमें शामिल किया जा सकता है। मध्य प्रदेश में दोनों तरह की फसलों को योजना के दायरे में रखा गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को इस योजना से काफी राहत मिलेगी।
• ये राज्य ले चुके हैं योजना का मसौदा : महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़।

5. कैटलोनिया का स्वायत्त दर्जा खत्म करने की चेतावनी

• स्पेन ने अलग देश की मांग कर रहे लोगों को स्पष्ट चेतावनी दी है। सरकार का कहना है कि कैटलोनिया की आजादी की मुहिम नहीं रुकी तो संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए वहां का स्वायत्त दर्जा खत्म कर दिया जाएगा।
• स्पेन के प्रधानमंत्री मारियानो राजोय ने आजादी घोषित करने के लिए पृथकतावादियों के दिए समय के नजदीक आने पर यह चेतावनी दी है। इस बीच मैडिड और बार्सिलोना की सड़कों पर हजारों लोग जमे हुए हैं। मैडिड के लोग जहां एकजुटता की मांग कर रहे हैं, वहीं बार्सिलोना के लोग आजादी मांग रहे हैं।
• स्पेन के संपन्न उत्तर-पूर्वी कैटलोनिया इलाके के लोगों ने एक अक्टूबर जनमत संग्रह के जरिये अपनी आजादी की इच्छा जताई थी। जबकि स्पेन ने इस जनमत संग्रह के अवैध ठहराते हुए उसे रोकने की भरसक कोशिश की थी। इसके चलते पुलिस कार्रवाई में करीब 900 लोग घायल हो गए थे।
• जनमत संग्रह में 90 फीसद लोगों के आजादी की इच्छा जताए जाने के बाद पृथकतावादी नेता काल्र्स प्यूजीमॉन्ट ने सोमवार (नौ अक्टूबर) को पृथक राष्ट्र की घोषणा करने की बात कही थी। लेकिन अब प्रधानमंत्री संविधान के अनुच्छेद 155 का इस्तेमाल करते हुए कैटलोनिया के स्वायत्त दर्जे को खत्म करने की चेतावनी दी है। यह कदम उठाने के बाद देश में चुनाव भी करवाने होंगे।
• जनमत संग्रह और पृथकतावादी नेताओं के रुख से स्पेन असमंजस में फंस गया है। तमाम बड़ी कंपनियां और बैंक अपने मुख्यालय कैटलोनिया इलाके से समेटने की तैयारी करने लगे हैं। जाहिर है इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

No comments:

Post a Comment