1. सुप्रीम कोर्ट का फैसला : नाबालिग पत्नी के साथ सहवास रेप: यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है
• उच्चतम न्यायालय ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में आज कहा कि 18 वर्ष से कम आयु की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाना बलात्कार है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने एक गैर सरकारी संगठन‘‘ इंडिपेंडेंट थॉट’ की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया।
• इस संगठन ने उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा था कि 18 वर्ष से कम उम्र की नाबालिग पत्नी के साथ सहवास को अपराध माना जाए।
• न्यायालय ने 15 से 18 वर्ष की नाबालिग पत्नी से संबंध को दुष्कर्म की श्रेणी से छूट देने वाली भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के अपवाद (2) को खारिज करते हुए कहा कि 18 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाने को दुष्कर्म समझा जाएगा।
• न्यायालय ने कहा, आईपीसी के तहत बलात्कार से संबंधित अपवाद अन्य अधिनियमों का उल्लंघन है। यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है। हालांकि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध बनाने पर पति पर दुष्कर्म का मुकदमा चल सकता है, बशर्ते पीड़िता एक साल के भीतर शिकायत दर्ज कराये। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका यह फैसला आगे से लागू होगा। पुराने मुकदमे इससे प्रभावित नहीं होंगे।
• न्यायालय ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को देश में बाल विवाह की प्रथा पर रोकने के लिए सकारात्मक कदम उठाने को भी कहा।
2. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की पहली बैठक में सदस्यों की आम राय : बेरोजगारी-मंदी से निपटने को 10 क्षेत्रों में सुधार की दरकार
• प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने बुधवार को अपनी पहली बैठक में देश में आर्थिक मंदी और बेरोजगारी की बात स्वीकार की और कहा कि इन्हें दूर करने के लिए त्वरित निर्णय लेने होंगे। परिषद ने 10 क्षेत्र चुने हैं, जिनमें त्वरित सुधार की जरूरत है।
• उसका मानना है कि इन क्षेत्रों में सुधार से न केवल आर्थिक वृद्धि होगी, बल्कि रोजगार भी बढ़ेंगे। परिषद इस बाबत अब रिजर्व बैंक, मंत्रालयों और उद्योगों से सलाह मशविरा करेगी। परिषद ने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में सरकार के पास रोजगार को लेकर विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
• 2018 में एनएसएसओ की रिपोर्ट आने के बाद ही रोजगार की असल संख्या का पता चल सकेगा। नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबराय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मौजूदा आर्थिक, राजकोषीय और मौद्रिक नीति की स्थिति का जायजा लिया गया और उन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई, जिन पर परिषद का विशेष जोर रहेगा। बैठक के बाद देबराय ने कहा, परिषद ने 10 मुद्दों पर र्चचा की है और आने वाले महीनों में परिषद के सदस्य संबंधित मंत्रालयों, राज्यों, विशेषज्ञों, संस्थानों, निजी क्षेत्र और अन्य संबंधित पक्षों के साथ विचार विमर्श कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
• सुधार के लिए जिन क्षेत्रों की पहचान की गई है, उनमें आर्थिक वृद्धि, रोजगार और रोजगार सृजन, असंगठित क्षेत्र तथा उसका समन्वय, राजकोषीय स्थिति, मौद्रिक नीति, सार्वजनिक व्यय, आर्थिक क्षेत्र में काम करने वाले संस्थान, कृषि एवं पशुपालन, उपभोग की प्रवृत्ति, उत्पादन और सामाजिक क्षेत्र शामिल हैं।
3. मुद्राकोष और विश्व बैंक ने वृद्धि दर का अनुमान घटाया
• भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर बनी चिंताओं के बीच विश्व बैंक ने उसकी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर कम रहने का अनुमान जताया है। नोटबंदी और माल एवं सेवाकर (जीएसटी) को प्रमुख कारण बताते हुए उसने 2017 में भारत की वृद्धि दर 7फीसद रहने की बात कही है जो 2015 में यह 8.6फीसद थी।
• विश्व बैंक ने यह चेतावनी भी दी है कि अंदरूनी व्यवधानों से निजी निवेश के कम होने की संभावना है जो देश की वृद्धि क्षमताओं को प्रभावित कर नीचे की ओर ले जाएगा।
• अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी 2017 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.7 फीसद कर दिया था। यह उसके पूर्व के दो अनुमानों से 0.5 फीसद कम है। जबकि चीन के लिए उसने 6.8 फीसद की वृद्धि दर का अनुमान जताया है।
• अपनी द्विवार्षिक दक्षिण एशिया आर्थिक फोकस रपट में विश्वबैंक ने कहा है कि नोटबंदी से पैदा हुए व्यवधान और जीएसटी को लेकर बनी अनिश्चिताओं के चलते भारत की आर्थिक वृद्धि की गति प्रभावित हुई है। परिणामस्वरूप भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2017 में 7 फीसद रहने का अनुमान है जो 2015 में 8.6 फीसद थी।
• सार्वजनिक व्यय और निजी निवेश के बीच संतुलन स्थापित करने वाली स्पष्ट नीतियों से 2018 तक यह वृद्धि दर बढ़कर 7.3 फीसद हो सकती है।
4. चीन, भारत और अमेरिका में असमानता बढ़ी : आईएमएफ
• अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बुधवार को कहा कि विश्वभर में असमानता में तेज गिरावट के बावजूद अमेरिका, चीन और भारत में उसके स्तर में बढ़ोतरी की प्रवृत्ति देखी गई है।
• आईएमएफ ने कहा, हाल के वर्षो में शिक्षा, स्वास्य और प्रगति पर जोर दिया गया है लेकिन इसके बावजूद कई देशों में जनसंख्या के अलग अलग आय समूहों के बीच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में अंतराल बना हुआ है। इनमें विकसित अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं।
• आईएमएफ के वित्तीय मामलों के विभाग के निदेशक विटोर गैस्पर ने वार्षिक वित्तीय निगरानी रिपोर्ट जारी करने के मौके पर संवाददाताओं से कहा, यदि कोई पूरे विश्व में नागरिकों पर ध्यान दे तो पाएगा कि वैश्विक असमानता में गिरावट हुई है। यह 19वीं सदी की शुरुआत के बाद से होने वाली वृद्धि की तुलना में एक परिवर्तन वाला रुख है।
5. जापान में तीन लाख भारतीयों को मिलेगा काम करने का मौका
• भारत और जापान के द्विपक्षीय रिश्तों में आई गर्माहट का असर कई क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। बुधवार को कैबिनेट ने ऐसे कुछ फैसलों पर मुहर लगाई है जो दोनो देशों के लिए आने वाले दिनों में काफी फायदे का सौदा साबित होंगे। इसमें एक फैसला तीन लाख प्रशिक्षित भारतीय युवा कामगारों को जापान में काम करने का मौका देगा।
• पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में जापान के साथ टेक्नीकल इनटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम (टीटीटीपी) समझौता करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके बारे में कौशल विकास, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने बताया कि इसके तहत तीन लाख भारतीय युवाओं को तीन से पांच वर्षो के लिए जापान भेजा जाएगा।
• ये युवा भारत में भी स्किल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किये जाएंगे और जापान में भी इन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये जापान में काम करने के साथ ही प्रशिक्षण भी हासिल करेंगे। अगले तीन साल में जापान की वित्तीय सहायता पर इन युवाओं को जापान भेजा जाएगा।
• जापान देगा खर्च : प्रधान ने बताया कि तीन से पांच साल के लिए जापान जाने वाले प्रत्येक प्रशिक्षित युवा को जापान में प्रशिक्षण के साथ ही काम करने का भी मौका मिलेगा। तीन लाख युवकों को परखने में वहां रोजगार के भी अवसर प्रदान किए जाएंगे। वहां पर उनके रहने की व्यवस्था भी जापान ही करेगा।
• भारत लौटने पर भी नौकरी का मौका : जब ये भारत आएंगे तो अपने साथ एक बेहद कुशल अंतरराष्ट्रीय कार्य व्यवहार और औद्योगिक प्रशिक्षण लेकर आएंगे जिसका भारत में इस्तेमाल हो सकेगा।
• जापान प्रशिक्षित युवा पेशेवरों की कमी से जूझ रहा है जबकि भारत में युवाओं की बड़ी फौज है। इस तरह से यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा।
• विश्व बैंक की दो स्कीमें मंजूर :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने विश्व बैंक से सहायता प्राप्त 6,655 करोड़ की दो स्किल डेवलेपमेंट स्कीमों को भी मंजूरी दी है। इसमें संकल्प 4455 करोड़ की केंद्र की एक योजना है जिसमें विश्व बैंक ने 3300 करोड़ के कर्ज की सहायता दी है।
• 2200 करोड़ रुपये की स्ट्राइव योजना में विश्व बैंक की ओर से कर्ज लेने में सहायता दी जाती है। यह दोनों योजनाएं व्यावसायिकशिक्षा और प्रशिक्षण देने के संबंध में है।
6. कैटेलोनिया सियासी संकट : आजादी की घोषणा टली
• कैटेलोनिया की स्वतंत्रता के मुद्दे को लेकर जारी खींचतान के बीच एक आपातकालीन मंत्रिमंडलीय बैठक में स्पेन की सरकार ने बुधवार को कहा कि सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। कैटेलोनियाई नेताओं ने स्वतंत्रता घोषित करने के लिए बहुमत होने की बात कही थी और कहा था कि उन्होंने इसकी घोषणा फिलहाल रोक रखी है।
• इस घोषणा के कुछ घंटों बाद मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी।प्रधानमंत्री मारियानो राजोय ने कहा, इस क्षेत्र की स्वतंत्रता को रोकने के लिए उनके अधिकार में जो भी होगा वह सबकुछ करेंगे। इस विवाद ने स्पेन को कई दशकों के सबसे बड़े सियासी संकट में डाल दिया है।
• उन्होंने इस अर्धस्वायत्त क्षेत्र में सीधे शासन को लागू करने की आशंकाओं को खारिज किया। बहुत से लोगों का मानना था कि इससे अशांति फैल सकती थी।कैटेलोनिया के राष्ट्रपति कार्ल्स प्यूगडेमोंट ने मंगलवार को घोषणा की थी कि इस महीने हुए प्रतिबंधित जनमत संग्रह के बाद उन्होंने कैटेलोनिया को स्वतंत्र राष्ट्र बनाए जाने के फैसले को स्वीकार कर लिया है।
• इस ऐलान के बाद राजोय ने बुधवार को आपातकालीन बैठक बुलाई थी। संसद में दिए गए भाषण ने बहुत से लोगों को असमंजस में डाल दिया जिसमें प्यूगडेमोंट ने तत्काल कहा, कैटेलोनिया की स्वतंत्रता को फिलहाल स्थगित रखा जाएगा जिससे केंद्रीय सरकार के साथ बातचीत हो सके।
• संकट को लेकर वार्ता चल रही है ऐसे में सभी विकल्प मौजूद हैं। स्पेन के आर्थिक ऊर्जा केंद्र के तौर पर देखे जाने वाला यह इलाका स्वतंत्रता को लेकर विभाजित है जहां 75 लाख लोगों का भविष्य दांव पर है। स्पेन से अलग होने की उसकी मुहिम ने यूरोपीय संघ के स्थायित्व के लिए भी चिंता खड़ी कर दी है।
7. पूंजीगत व्यय वृद्धि में बड़े राज्य पिछड़े, हरियाणा सबसे आगे
• राज्य सरकारें लोकलुभावन घोषणाओं पर भले ही जोर दें, लेकिन वे विकास दर को उठाने के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाने में कंजूसी बरतती हैं। वित्त वर्ष 2015-16 में कम से कम सात राज्यों के पूंजीगत खर्च में भारी भरकम गिरावट दर्ज हुई है। जबकि इसमें खास तौर पर गुजरात, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में अपेक्षानुरूप वृद्धि नहीं हुई है।
• देश में सिर्फ हरियाणा ही एकमात्र राज्य है, जहां इस व्यय में 85.9 फीसद का भारी भरकम इजाफा हुआ है।
• केंद्र व राज्य सरकारों के संयुक्त वित्तीय और राजस्व खातों पर कैग की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015-16 में असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, पंजाब, सिक्किम तथा उत्तराखंड में पूंजीगत व्यय में गिरावट आई। जबकि छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में इस दौरान पूंजीगत खर्च में वृद्धि की दर धीमी रही।
• हालांकि अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, नगालैंड और राजस्थान में वित्त वर्ष 2015-16 में पूंजीगत व्यय में वृद्धि दोगुनी हुई है, जबकि सबसे ज्यादा 85.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हरियाणा में हुई है।
• नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2013-14 और 2014-15 में लगातार दो साल तक हरियाणा में पूंजीगत खर्च घटा था। लेकिन राज्य में नई सरकार के गठन के बाद इसमें तेज बढ़ोतरी हुई।
• राज्य ने यह धनराशि आर्थिक क्षेत्र के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र पर भी खर्च की है। रिपोर्ट से पता चलता है कि अधिकतर राज्यों में पूंजीगत व्यय का अधिकांश भाग आर्थिक क्षेत्र पर खर्च किया जा रहा है। हालांकि हाल के वर्षो में कुछ राज्यों में सामाजिक क्षेत्र में भी पूंजीगत खर्च बढ़ा है।
8. अनुपम खेर बने FTTI के अध्यक्ष : गजेंद्र चौहान का स्थान लेंगे
• हिन्दी फिल्मों के सुप्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर को पुणो स्थित भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
• सूत्रों के अनुसार श्री खेर को संस्थान का नया अध्यक्ष बनाया गया है। वह गजेन्द्र चौहान का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल मार्च में पूरा हो चुका है।उल्लेखनीय है कि श्री चौहान को अध्यक्ष बनाये जाने पर खासा विवाद हुआ था और छात्रों ने उनकी नियुक्ति के विरोध में कई दिनों तक कक्षाओं का बहिष्कार किया था।
• बासठ वर्षीय खेर सिनेमा और नाट्य जगत की मशहूर हस्ती हैं। उन्होंने अब तक पांच सौ से अधिक फिल्मों और 100 से अधिक नाटकों में काम किया है। कला जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए श्री खेर को पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।
• उनकी कुछ प्रमुख फिल्में हैं, सारांश, कर्मा, खोसला का घोंसला, संसार, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, मैंने गांधी को नहीं मारा, ए वेंस्डे आदि।

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