Monday, September 4, 2017

मंदिरों का शहर हम्पी, कला, सभ्यता और इतिहास का अद्भुत संगम

September 04, 2017 0
मंदिरों का शहर हम्पी, कला, सभ्यता और इतिहास का अद्भुत संगम

मंदिरों का शहर हम्पी, कला, सभ्यता और इतिहास का अद्भुत संगम

        हम्पी मंदिरों का शहर है, जिसे यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साईट का दर्जा दिया है।
       यह भारत के उत्तरी कर्नाटक में स्थित है। अपने समय में यह दुनिया के
        सबसे विशाल और समृद्ध राज्यों में से एक था।
यह विजयनगर शहर के खंडहरों में ही स्थित है, और यह जगह अपने ज़माने में विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी।
       हम्पी धर्म के लोग भी विजयनगर में ही रहते थे। और, उन्होंने अपने साम्राज्य में विरूपाक्ष मंदिर और बहुत से इतिहासिक स्मारकों का निर्माण भी किया था।

      1343 से लेकर 1565 तक हम्पी, विजयनगर साम्राज्य की सबसे प्रसिद्ध और बेहतरीन राजधानियों में से एक थी।
        हम्पी का चुनाव इसकी सामरिक जगह की वजह से किया गया था।जहाँ तुंगभद्र नदी भी थी और जो तीनो तरफ से रक्षात्मक पहाडियों से घिरी हुई थी।

    यह साम्राज्य 3 री शताब्दी के दौरान अशोक साम्राज्य का ही भाग था।हम्पी के खंडहरों की खोज सन 1800 में कर्नल कोलिन की थी।इस जगह का महत्त्व इतिहासिक और वास्तुकला दोनों रूप में है। यह जमीन पूरी तरह से विशाल पत्थरो से लाजमी है।जिसका उपयोग जैन देवताओ को बनाने के लिये किया गया था।

       आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया ने भी इस जगहपर उत्खनन का काम कर कयी बहुमूल्यरत्न और पत्थर को खोज निकाला है।जिनमे कुछ मंदिर और इतिहासिक धरोहर भी शामिल है।हम्पी में बहुत से प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है जिनमे हमें वेदांत धर्मशास्त्र का प्रभाव भी दिखाई देता है।

        हम्पी के कुछ मंदिरों में आज भी भगवान की पूजा की जाती है।

       बडवीलिंग – यह हम्पी के सबसे बड़े लिंग का छायाछित्र है। इस लिंग को गौर से देखे तो इसमें तीन आँखे भी दिखायी देती है।

       यंत्रोधारक आंजनेय मंदिर, चंद्रमौलेश्वर मंदिर
मल्यावंता रघुनाथास्वमी मंदिर – प्राचीन भारतीय शैली की वास्तुकला में बनाया गया है।

     इसकी अंदरूनी दीवारों पर मछली और समुद्री जीवो की कलाकृतियाँ भी बनायी गयी है।

    हजारा राम मंदिर कॉम्प्लेक्स –  यह मंदिर शिलालेख और रामायण की प्राचीन कथा के लिये जाना जाता है।

दूध उत्पादन को बढ़ाकर 2023-24 तक दोगुना करने का लक्ष्‍य

September 04, 2017 0
दूध उत्पादन को बढ़ाकर 2023-24 तक दोगुना करने का लक्ष्‍य

दूध उत्पादन को बढ़ाकर 2023-24 तक दोगुना करने का लक्ष्‍य
  
      भारत दूध उत्‍पादन में पहले स्‍थान पर है। इसके बावजूद सरकार दुग्ध उत्पादन की मात्रा को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और इस बार सरकार ने कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्य को बढ़ाने के साथ-साथ दूध उत्पादन के लक्ष्य को भी बढा कर 2023-24 तक 300 मिलियन टन पहुंचाने का लक्ष्य लखा है।

       सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में 2015-16 के दौरान 155.48 मिलियन टन वार्षिक दूध का उत्‍पदन हुआ, जो विश्‍व के उत्‍पादन का 19 प्रतिशत है।
       पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने 2023-24 तक 300 मिलियन टन दूध उत्‍पादन का राष्‍ट्रीय लक्ष्‍य रखा है। गायों की दूध उत्‍पादकता को 2.15 किग्रा प्रतिदिन से बढ़ाकर 5.00 किग्रा प्रतिदिन करने का भी लक्ष्‍य रखा गया है।

19वीं पशुधन संगणना
         2012 के अनुसार भारत में 300 मिलियन बोवाईन (गोजातीय) आबादी है। 190 मिलियन गोपशु आबादी में से 20 प्रतिशत विदेशी तथा वर्ण संकरित (39 मिलियन) हैं तथा लगभग 80 प्रतिशत देसी तथा नॉन-डिस्क्रिप्‍ट नस्‍लों के हैं।
      हालांकि भारत में विश्‍व आबादी के 18 प्रतिशत से भी अधिक गाय हैं, लेकिन गरीब किसान की सामान्‍य भारतीय गाय प्रतिदिन मुश्किल से 1 से 2 लीटर दूध देती है। 80 प्रतिशत गाय के केवल 20 प्रतिशत दूध का योगदान देती हैं।

      सरकार का मानना है कि भारत ने दूध उत्‍पादन में अपने उच्‍च स्‍तर को बनाए रखा है फिर भी दूसरी ओर देसी तथा नॉन-डिस्क्रिप्‍ट (जो किसी वर्ग मे न आए) नस्‍ल के लगभग 80 प्रतिशत गोपशु कम उत्‍पादकता वाले हैं, जिनकी उत्‍पादकता में उपयुक्‍त प्रजनन तकनीकों को अपनाकर सुधार किए जाने की आवश्‍यकता है।

      उत्‍पादकता में वृद्धि करने की महत्‍वपूर्ण कार्यनीति कृत्रिम गर्भाधान (एआई) सुनिश्चित करना है। कृत्रिम गर्भाधान देश में बोवाईनों (गोजातीय) की आनुवंशिक क्षमता का बढ़ाते हुए उनके दूध उत्‍पादन और उत्‍पादकता को बढ़ाकर बोवाइन (गोजातीय) आबादी की उत्‍पादकता में सुधार करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
       इस मूल गतिविधि को राष्‍ट्रीय गौकुल मिशन की एकछत्र योजना के अंतर्गत चल रही अग्रणी योजनाओं, राष्‍ट्रीय बोवाईन प्रजनन (एनपीबीबी) तथा देसी नस्‍लों संबंधी कार्यक्रम (आईबी) के माध्‍यम से पोषित किया जाता है।

      इन योजनाओं में दोहरे लाभ का विचार किया गया है, जैसे (i) उत्‍पादकता में सुधार करना और दूध उत्‍पादन को बढ़ाना तथा (ii) किसानों की आय को बढ़ाना जिससे 2020 तक उनकी आय को दोगुना करने के सरकार के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने में सहायता मिलेगी।
       हालांकि योजना के अंतर्गत किसानों के घर तक सीएमएन पहुचाने की व्यवस्था में काफी सुधार किया गया है उसके बावजूद कृत्रिम गर्भाधान कवरेज अभी तक प्रजनन योग्‍य आबादी का 26 प्रतिशत ही है।

       2020 तक किसानों की आय को दोगुना करने के सरकार के लक्ष्‍य में सहायता करने के लिए 2017-18 के लिए 100 मिलियन कृत्रिम गर्भाधान के राज्‍य-वार लक्ष्‍य को साझा किया गया है। इस संबंध में पशुपालन, डेयरी और मत्‍स्‍यपालन विभाग द्वारा राज्‍यों को निर्देश दिए गए है।

Narendra Modi Cabinet Reshuffled | 9 New Faces as Ministers

September 04, 2017 0
Narendra Modi Cabinet Reshuffled | 9 New Faces as Ministers

Narendra Modi Cabinet Reshuffled | 9 New Faces as Ministers
Four Ministers of state were elevated to the cabinet rank. They are

1. Minister of State for Commerce and Industries Nirmala Sitharaman,
2. Minister of State for Petroleum and Natural Gas Dharmendra Pradhan,
3. Minister of State For Power, Coal, New and Renewable Energy and Mines, Piyush Goyal and
4. Minister of State for Minority Affairs Mukhtar Abbas Naqvi.

President Ram Nath Kovindadministered the oath of office and secrecy to them at Rashtrapati Bhavan.

The portfolios of the Ministers will be announced later.
Here is the 9 New Ministers, who take oath-

1. Former IFS officer Hardeep Puri
2. Former Mumbai Police chief Satyapal Singh
3. Former IAS officer Alphons Kannanthanam
4. Lok Sabha MP's from Madhya Pradesh Virendra Kumar
5. From Karnataka Anant Kumar Hegde
6. From Rajasthan Gajendra Singh Shekhawat
7. From Bihar Ashwini Kumar Choubey
8. From Bihar Raj Kumar Singh and
9. Rajya Sabha MP from Uttar Pradesh Shiv Pratap Shukla

Books & Authors List for IBPS 2017

September 04, 2017 0
Books & Authors List for IBPS 2017

Books & Authors List for IBPS 2017
♻1991: How P.V. Narasimha Rao Made History - Sanjaya Baru
♻A Horse Walks into a Bar - David Grossman
♻A Life in Diplomacy - Maharajakrishna Rasgotra
♻A Life in Science - CNR Rao
♻Ace against Odds - Imran Mirza, Sania Mirza, and Shivani Gupta
♻Advice and Dissent: My Life in Public Service - Y. V. Reddy
♻Akhada: The Authorized Biography of Mahavir Singh Phogat - Saurabh Duggal
♻An Era of Darkness: The British Empire in India - Shashi Tharoor
♻An Unsuitable Boy - Karan Johar
♻Choices: Inside the Making of India S Foreign Policy - Shivshankar Menon
♻Choked - Pallavi Aiyar
♻Collective Choice and Social Welfare- Amartya Sen
♻Conflicts of Interest: My Journey through India's Green Movement - Sunita Narain
♻Courage & Commitment: An Autobiography - Margaret Alva
♻Defeat Is an Orphan: How Pakistan Lost the Great South Asian War - Myra Macdonald
♻Democrats and Dissenters - Ramachandra Guha
♻Demonetisation And Black Money - C. Ram Manohar Reddy
♻Driven: The Virat Kohli Story - Vijay Lokapally
♻Family Life - Akhil Sharma
♻Feroze Gandhi: The Forgotten Gandhi - Bertil Falk
♻Half - Lion: How P.V Narasimha Rao Transformed India - Vinay Sitapati
♻Himalaya: Adventures, Meditations, Life - Ruskin Bond
♻I Do What I DO - Raghuram Rajan
♻India's Broken Tryst - Tavleen SinghIndira
♻Gandhi: A Life in Nature - Jairam Ramesh
♻Kohinoor: The Story of the World's Most Infamous Diamond - Anita Anand and William Dalrymple
♻Matoshree - Sumitra Mahajan
♻Michael Clarke: My Story - Michael Clarke
♻Mr and Mrs Jinnah: The Marriage that Shook India - Sheela Reddy
♻Old History, New Geography: Bifurcating Andhra Pradesh - Jairam Ramesh
♻On My Terms: From the Grassroots to the Corridors of Power - Sharad PawarSelection Day - Aravind Adiga
♻Speaking: The Modi Way - Virender Kapoor
♻Standing on an Apple Box: The Story of a Girl Among the Stars - Aishwarya R. Dhanush
♻The Great Derangement: Climate Change and the Unthinkable - Amitav Ghosh
♻The Legend of Lakshmi Prasad - Twinkle Khanna
♻The Ministry of Utmost Happiness - Arundhati Roy
♻The People's President: Dr A P J Abdul Kalam - S M Khan
♻The Sellout - Paul Beatty
♻The Serpent's Revenge - Sudha Murty
♻Things to Leave Behind - Namita Gokhale
♻What You Can Learn From Military Principles - Virender Kapoor
♻Who Moved My Interest Rate ? - Duvvuri Subbarao

कालेधन पर भारत का स्विट्जरलैंड से समझौता

September 04, 2017 0
कालेधन पर भारत का स्विट्जरलैंड से समझौता

कालेधन पर भारत का स्विट्जरलैंड से समझौता

        कालेधन पर स्विट्जरलैंड भारत की मदद करने के लिए तैयार हो गया है. स्विट्जरलैंड की राष्ट्रपति डोरिस लिउथर्ड और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं.
      स्विट्जरलैंड और हमारे देश के बीच सूचनाओं के ऑटोमेटिक एक्सचेंज पर समझौता हुआ है. इस समझौते के तहत 2019 से पहले कालेधन, विदेश में जमा पैसा और स्विट्जरलैंड में प्रॉपर्टी की खरीददारी से जुड़ी सूचनाओें की अदला बदली शुरू हो जाएगी.
      रेल हादसों से उबरने के लिए भी भारत स्विट्जरलैंड से मदद लेने जा रहा है.

      स्विट्जरलैंड की राष्ट्रपति डोरिस लिउथर्ड तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं. डोरिस की इस यात्रा के दौरान भारत और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापार और निवेश संबंधों में मजबूती लाने सहित द्विपक्षीय संबंधों को लेकर चर्चा हो रही है.

कालेधन पर लगाम
       मोदी और डोरिस के बीच बातचीत के दौरान भारतीयों द्वारा स्विस बैंक में जमा किए गए कालेधन का मुद्दा उठा.  स्विट्जरलैंड की राष्ट्रपति डोरिस ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच सूचनाओं के ऑटोमेटिक एक्सचेंज से जुड़ा बिल उनके संसद में इस साल के अंत तक पास हो जाएगा. ऐसे में 2019 से सूचनाओं का आदान प्रदान‍ हो सकेगा.

       वहीं भारत और स्विट्जरलैंड के बीच दो समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, इनमें से एक रेलवे में तकनीकी सहयोग से भी जुड़ा है. वर्तमान में हुए रेल हादसों की वजह से यह समझौता काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. स्विट्जरलैंड की रेल तकनीक को दुनिया में बेहतरीन माना जाता है.

       स्विस राष्ट्रपति डोरिस ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड 70 सालों से दोस्त हैं. इस दौरे से दोनों देशों के संबंधों को काफी मजबूती मिलेगी. दोनों देशों के संबंधों के बारे में विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'भारत और स्विट्जरलैंड के बीच मजबूत आर्थिक संबंध हैं. स्विट्जरलैंड भारत का 7वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारत के लिए 11वां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है.'

       वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल जून में स्विट्जरलैंड की यात्रा की थी. इस दौरान स्विट्जरलैंड ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की सदस्यता का समर्थन किया था. इसके अलावा काले धन के खिलाफ लड़ाई में सहयोग पर भी दोनों देश सहमत हुए थे.
      स्विट्जरलैंड के किसी राष्ट्रपति की यह चौथी भारत यात्रा है. स्विस राष्ट्रपतियों ने डोरिस की यात्रा से पहले 1998, 2003 और 2007 में भारत की यात्रा की है.

निचली अदालतों के लिए न्यायिक प्रदर्शन सूचकांक

September 04, 2017 0
निचली अदालतों के लिए न्यायिक प्रदर्शन सूचकांक

निचली अदालतों के लिए न्यायिक प्रदर्शन सूचकांक

     अपने तीन साल के एक्शन एजेंडे में राष्ट्रीय आयोग ने न्याय वितरण प्रणाली में तेजी लाने के लिए दूरगामी सुधारों का सुझाव दिया है, विशेष रूप से निचली अदालतों में जहां साल में करीब तीन करोड़ मामले लंबित हैं।
    कई उपायों के बीच, सरकार के विषेशज्ञ समूह ने न्यायिक प्रदर्शन सूचकांक स्थापित करने की सलाह दी है ताकि उच्च अदालतों और उसके मुख्य न्यायाधीशों को जिला अदालतों और प्रक्रिया में सुधार और देरी को कम करने के लिए अधीनस्थ स्तर पर नज़र रखने में मदद मिल सके।
    आयोग के अनुसार, प्रक्रिया में विभिन्न प्रकार के मामलों के लिए गैर-अनिवार्य समय सीमा तय करने की आवश्यकता होगी।

स्रोत- डेक्कन हेराल्ड

04 September 2017(Monday)

September 04, 2017 0
04 September 2017(Monday)

दैनिक समसामयिकी

1.ब्रिक्स समिट : आतंकवाद के खिलाफ समग्र दृष्टिकोण अपनाएं: चिनफिंग

• चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने रविवार को ब्रिक्स देशों से सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में समग्र दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए उसके ‘लक्षण और मूल कारणों’ से निपटा जाना चाहिए ताकि आतंकियों के छिपने की कोई जगह न हो।
• ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और द. अफ्रीका) बिजनेस फोरम के उद्घाटन भाषण में चिनफिंग ने कहा,ब्रिक्स देशों को भू-राजनीतिक मुद्दों को सुलझाने की प्रक्रिया में रचनात्मक हिस्सा लेकर उचित योगदान करना चाहिए।
• ‘मैं इस बात से आश्वस्त हूं कि जब हम सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में समग्र दृष्टिकोण अपनाएंगे और इसके लक्षण तथा मूल कारणों से निपटेंगे तब आतंकियों के छिपने की जगह नहीं होगी।’
• ज्ञात हो, चिनफिंग की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में पाकिस्तान को ‘अराजक एजेंटों’ का पनाहगाह बताए जाने के बाद आई है। ट्रंप ने इन तत्वों पर अफगानिस्तान में अमेरिकियों की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इस्लामाबाद को आतंकियों को पनाह देने पर ‘बहुत कुछ गंवाना’ होगा।
• चीन की मेजबानी में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में भारत भी आतंकवाद का मुद्दा जोर-शोर से उठाने वाला है। हालांकि चीन ने कहा है कि भारत द्वारा पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी रिकॉर्ड की चर्चा इस फोरम के लिए ‘उचित विषय’ नहीं है। ब्रिक्स के तीन दिवसीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ब्राजील के राष्ट्रपति माइकल टेमर, दक्षिण अफ्रीका के जैकब जुमा और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शिरकत करेंगे।
• इस सम्मेलन की शुरुआत ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के सम्मेलन से हुई है।1चिनफिंग ने ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि बड़ी इमारत के निर्माण की शुरुआत नींव (फाउंडेशन) से होती है। हमने नींव रखी है और ब्रिक्स सहयोग का फ्रेमवर्क खड़ा करना है।
• पिछले दस वर्षों में ब्रिक्स सहयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए एक-दूसरे से बराबरी का व्यवहार तथा मतभेदों को ठंडे बस्ते में डालना महत्वपूर्ण है।
•  उन्होंने ब्रिक्स देशों की उपलब्धि बताते हुए कहा कि पिछले दशक में इस ब्लॉक के संयुक्त जीडीपी में 179 फीसद की वृद्धि हुई जबकि व्यापार 94 फीसद बढ़ा है।

2. आर्थिक क्षमता के बल पर विश्व में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है चीन

• इसी वर्ष जनवरी में दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में चीनी राष्ट्रपति ने अपने देश को मुक्त व्यापार एवं वैश्वीकरण का चैंपियन बताया था। उसके बाद मई में उन्होंने वैश्विक एकीकरण के लिए अपने देश का दृष्टिकोण दुनिया के सामने प्रस्तुत किया था, जिसमें एशिया को यूरोप और उसके आगे तक रेल, रोड एवं समुद्र मार्ग से जोड़ने की बात शामिल थी। कुछ विश्लेषकों को चीन के इस दृष्टिकोण पर संदेह है लेकिन, उसकी आलोचना में महत्वपूर्ण बातें नजरअंदाज हो रही हैं।
• चीन बहुपक्षवाद को बढ़ावा दे रहा है और उसके नियम उसने खुद तैयार किए हैं। उसकी रणनीति में उसका आर्थिक एवं राजनीतिक प्रभाव दिखता है। हालांकि, खुद चीन के लिए इसके मिले-जुले परिणाम होंगे। यह ऐसे दौर की बात है जब अमेरिका बहुपक्षवाद से पीछे हट रहा है, चीन पूरी ताकत से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
• चीनी बहुपक्षवाद के व्यावहारिक सिद्धांत अमेरिका, अन्य पश्चिमी देशों एवं वैश्विक स्तर से बिल्कुल अलग हैं। इसमें आपसी विश्वास एवं सहयोग बढ़ाने की बातें भी शामिल होती हैं, जो चीन की रूपरेखा में नहीं दिखती हैं। शायद इसलिए क्योंकि वह लोकतंत्र, मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मूल्यों को नहीं मानता है।
• चीन की रणनीति में कुछ बातें चिंताजनक हैं: वह खुद खिलाड़ी है और खेल के नियम भी वह अपने अनुसार बदलना चाहता है। वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठानों-संस्थाओं में अपने प्रभाव का विस्तार कर रहा है। चीन ने वर्ष 2001 में विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता इस वादे के साथ ली थी कि वह अपने व्यापार क्षेत्र को विदेशी सामान एवं निवेश के लिए खोलेगा।
• उसने यह भी कहा था कि विदेशी निर्यातकों को वह अपने मार्केट तक आसान पहुंच मुहैया कराएगा। लेकिन, विदेशियों के लिए अपने मार्केट की पहुंच का वादा उसने पूरा नहीं किया। विदेशी निर्यातकों एवं निवेशकों को आज भी चीन में कई बैरियरों से गुजरना पड़ता है। विदेशी कंपनियों को वहां माल बेचने के लए स्थानीय पार्टनर बनाकर डील करना जरूरी है। जो विदेशी कंपनी वहां काम करना चाहती है, उसे स्थानीय कंपनी को पार्टनर बनाना जरूरी है।
• चीन खुद को अंतरराष्ट्रीय संस्थान दिखाना चाहता है। वह अपनी परियोजनाओं में अन्य पक्षों को तो साथ रखता है, लेकिन अपनी चमक भी दिखाता है। 'वन बेल्ट-वन रोड' उसी का एक उदाहरण है। चीन से यूरोप तक जाने वाली इस परियोजना पर वह एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक राशि खर्च कर रहा है।
• वह भारत और चीन को भी इस रूपरेखा में साथ लेना चाहता है, जो वर्षों से उसके भू-राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। यह परियोजना वह एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर बैंक के सहयोग से पूरा करेगा, जिसमें एशिया अन्य महाद्वीपों के 61 देश (अमेरिका नहीं) सदस्य हैं।
• चीन में स्थित मुख्यालय वाला यह बैंक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की तर्ज पर उभर रहा है। इन संस्थाओं का उद्‌देश्य राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सुधार लाना और सहयोग बढ़ाना है कि किसी एक देश पर अपना प्रभाव जमाना।

3. उत्तर कोरिया ने किया हाइड्रोजन बम के परीक्षण का दावा

• दुनिया को चौंकाने वाले कारनामों के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए उत्तर कोरिया ने रविवार को छठा परमाणु परीक्षण किया। यह उसके पांचवें परमाणु परीक्षण से कम से कम दस गुना ज्यादा शक्तिशाली था। परीक्षण में प्रयुक्त बम 1945 में जापान के नागासाकी शहर पर डाले गए अमेरिकी परमाणु बम से ज्यादा शक्तिशाली था।
• परीक्षण के वक्त रिक्टर पैमाने पर 6.3 के भूकंप की तरह धरती डोली। चीन, रूस और जापान में भूकंप का झटका महसूस किया गया। उत्तर कोरिया का दावा है कि उसने हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया है। हाइड्रोजन बम परमाणु बम से 100 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है।
• अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास के चंद रोज बाद किए गए परीक्षण से उत्तर कोरिया ने जता दिया है कि वह किसी की परवाह नहीं करता। पैदा हुए हालात पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की है। एबी का सुझाव है कि अब उत्तर कोरिया को तेल की आपूर्ति रोकी जाए। उत्तर कोरिया के इस कदम की दुनिया के ज्यादातर देशों ने निंदा की है।
• भारत का कहना है कि उत्तर कोरिया का यह कदम शांति के लिए बड़ा खतरा है। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने परमाणु परीक्षण की निंदा करते हुए उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंध लगाने की जरूरत बताई है। चीन ने भी उत्तर कोरिया के परीक्षण की कड़ी निंदा की है।
• रूस ने भी संबद्ध पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उधर, अमेरिका उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए नया मसौदा तैयार कर रहा है।
• अधिकारियों ने उत्तर कोरिया के दावे को खारिज करते हुए इसे हाइड्रोजन बम का परीक्षण मानने से इन्कार किया है।

4. बैंक खुद विलय का प्रस्ताव बना कर मंत्री समूह को भेजेंगे

• वित्त मंत्रालय ने सभी पीएसयू बैंकों के प्रमुखों को विलय के संबंध में पत्र लिखा है। इसमें सरकारी बैंकों में विलय की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए मंत्री समूह बनाए जाने के बारे में अवगत कराया गया है। वित्तीय सेवाओं के विभाग की ओर से बैंकों के सीईओ को औपचारिक रूप से यह सूचना दिए जाने के साथ सरकारी बैंकों में विलय की प्रक्रिया की गति और तेज हो गई है।
• वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया, मंत्रालय चाहता है कि बैंक अपने स्तर पर तय करें कि वे किसके साथ बेहतर विलय कर सकते हैं। इसके बाद विलय का प्रस्ताव मंत्री समूह के सामने लेकर आएं। लेकिन इससे पहले वह क्षेत्रीय संतुलन, भौगोलिक पहुंच, आईटी कम्पैटिबिलिटी, वित्तीय बोझ और मानव संसाधन के ट्रांजिशन का विश्लेषण कर लें।
• पिछले महीने कैबिनेट ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के विलय में गति लाने के लिए मंत्री समूह के रूप में वैकल्पिक तंत्र बनाने का निर्णय लिया था। बैंकों से विलय के प्रस्ताव सैद्धांतिक मंजूरी के लिए इस मंत्री समूह के सामने रखे जाएंगे।
• विलय तेजी से हो इसके लिए सरकार ने राष्ट्रीयकृत बैंकों के मर्जर को उचित व्यापार व्यवहार नियामक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की मंजूरी लेने से छूट दी है। यह छूट 10 साल के लिए प्रभावी रहेगी। यह विलय कितनी जल्द हो सकता है, इस पर एक अधिकारी ने कहा कि इसमें कुछ महीने लग सकते हैं।
• एसबीआई में सहयोगी बैंकों का विलय आसान था क्योंकि वे देश के सबसे बड़े बैंक के सहयोगी बैंक थे। इस साल की शुरुआत में सरकार ने एसबीआई में पांच सहयोगी बैंकों के विलय को मंजूरी दी थी।

5. जम्मू-कश्मीर में सेवानिवृत्त जजों को सुरक्षा का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

• जम्मू-कश्मीर में हाई कोर्ट और जिला अदालतों के सेवानिवृत्त जजों और पूर्व एडवोकेट जनरलों को सुरक्षा देने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने सेवानिवृत्त जजों और पूर्व एडवोकेट जनरलों को सुरक्षा देने के हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
• सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार की इस याचिका पर सोमवार को विचार करेगा।
• गत शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने राज्य सरकार की याचिका को चार सितंबर को सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया था।
• इससे पहले जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन और शोएब आलम ने कहा कि सेवानिवृत्त जजों और पूर्व एडवोकेट जनरलों को सुरक्षा देने का हाई कोर्ट का आदेश ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में वीआइपी और अन्य किसी को भी सुरक्षा गृह मंत्रलय द्वारा तय दिशानिर्देशों में उस व्यक्ति की जान को होने वाले खतरे को देखते हुए दी जाती है। इस बारे में विस्तृत दिशानिर्देश और व्यापक तंत्र बना हुआ है।
• पूरे देश में उसी का पालन होता है। इसमें इस तरह हाई कोर्ट आदेश नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी अपने आदेशों में कह चुका है कि किसे सुरक्षा देनी चाहिए और किसे नहीं, ये विशेषज्ञता का मसला है और कोर्ट इस बारे में आदेश नहीं दे सकता।
• पीठ ने दलीलें सुनने के बाद याचिका की प्रति कोर्ट में मौजूद एएसजी पिंकी आनंद को देने का आदेश दिया। कोर्ट ने एएसजी से कहा कि वे इस केस के बारे में अटार्नी जनरल को सूचित करें।

6. कॉरपोरेट गवर्नेस पर और सख्त होगा सेबी

• कंपनियों के कामकाज में सूचना और निर्णयों की जानकारी को साझा करने के मामले में कॉरपोरेट गवर्नेस के नियम और सख्त हो सकते हैं। बाजार नियामक सेबी अब इस बात पर विचार करेगा कि कंपनियों का प्रबंधन या निदेशक बोर्ड अपने गैर कार्यकारी प्रमोटरों और स्वतंत्र निदेशकों के साथ कितनी सूचनाएं साझा करते हैं। आगे सेबी इस मामले को कारपोरेट गवर्नेस के नियमों में भी शामिल कर सकता है।
• हाल के दिनों में इन्फोसिस और कुछ अन्य कंपनियों में बोर्ड व कंपनी प्रबंधन के बीच सूचनाओं को साझा करने संबंधी विवाद उठे थे। सूत्र बताते हैं कि उसके बाद से ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इस पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया है।
•  माना जा रहा है कि इस महीने के अंत में होने वाली सेबी बोर्ड की बैठक में इस पर विचार होगा। सेबी के भीतर एक वर्ग मानता है कि गैर कार्यकारी प्रमोटरों और स्वतंत्र निदेशकों के साथ सूचनाएं साझा करने से न केवल कंपनी के कामकाज में पारदर्शिता आएगी, बल्कि ये लोग भी कंपनी के संचालन में सक्रिय भागीदारी कर पाएंगे।
• उच्चस्तरीय समिति कर रही विचार : हालांकि, कॉरपोरेट गवर्नेस के कई विषयों पर शीर्ष बैंकर उदय कोटक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति विचार कर रही है। लेकिन टाटा समूह व इन्फोसिस के शीर्ष पदों पर आसीन अधिकारियों के पद छोड़ने के बाद सेबी को विदेशी और घरेलू निवेशकों की तरफ से कई प्रतिनिधिमंडल मिले हैं। सेबी ने कोटक की अध्यक्षता वाली इस समिति का गठन इसी साल जून में किया था।
•  हालांकि इन मुद्दों पर कोई भी नियम बनाने से पहले मसौदा तैयार होगा, जिसे सार्वजनिक चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जा सकेगा। इस मसौदे में कॉरपोरेट गवर्नेस से जुड़े तमाम मसलों को शामिल किया जाएगा।
• अक्टूबर से लागू होने हैं नए नियम : अक्टूबर से शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए कॉरपोरेट गवर्नेस के कई नए नियम लागू होने हैं। इनमें निवेशकों के अधिकारों की रक्षा से लेकर डिस्क्लोजर के कड़े नियम शामिल हैं। माइनॉरिटी शेयरधारकों और विदेशी शेयरधारकों को समान दर्जा देने का मामला भी शामिल है।
• सेबी के पास निवेशकों की लंबित शिकायतों की संख्या में 18 फीसद की कमी आई है। यह इस साल मार्च के अंत का आंकड़ा है। सेबी शिकायतों के तेजी से निपटान के लिए काम कर रहा है।
• ताजा आंकड़ों के अनुसार 2008-09 में सेबी के पास लंबित शिकायतों की संख्या 49,113 थी। इसके मुकाबले अब यह संख्या घटकर 10 प्रतिशत ही रह गई है। सेबी की 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट में स्कोर्स के आंकड़ों के अनुसार कार्रवाई लायक लंबित शिकायतों की संख्या 31 मार्च, 2016 को 5,452 थी।
• 31 मार्च, 2017 तक यह 17.90 फीसद घटकर 4,476 रह गई है। सेबी की शिकायत निपटान प्रणाली (स्कोर्स) केंद्रीकृत वेब आधारित शिकायत निपटान प्लेटफॉर्म है। रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च तक लंबित कुल शिकायतों से से 3,492 छह महीने से कम समय से लंबित हैं।

7. श्रमिकों के वेतन में भारी वृद्धि की तैयारी
• केंद्र सरकार देश में न्यूनतम मजदूरी तय करने के मौजूदा फोर्मुले  में बदलाव करने पर विचार कर रही है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर श्रमिकों का दोगुना वेतन होने की संभावना है।सूत्रों के अनुसार केंद्रीय श्रम मंत्रालय न्यूनतम मजदूरी के निर्धारण में बदलाव करते हुए श्रमिक की पत्नी के अलावा उसके माता- पिता और दो बच्चों को अलग-अलग इकाई के रूप में शामिल करने पर विचार कर सकता है।
• फिलहाल न्यूनतम मजदूरी के फामरूला तीन इकाई श्रमिक, पत्नी और दो बच्चों पर आधारित है। दो बच्चों को एक इकाई माना जाता है। यानी श्रमिक को कम से कम इतनी मजदूरी मिलनी चाहिए जिसमें तीन व्यक्तियों का भरण पोषण हो सके।
• प्रस्तावित फोर्मुले में माता-पिता को दो इकाई और दो बच्चों को दो अलग-अलग इकाइयों के तौर पर शामिल किया जा सकता है।सूत्रों ने बताया कि इस तरह से न्यून

तम मजदूरी का निर्धारण छह इकाइयों के आधार पर किया जाएगा।
• न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के अनुसार न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण श्रमिक और उसकी पत्नी को दो अलग-अलग इकाई और उसके दो बच्चों को एक इकाई मानते हुए किया जाता है। यह निर्धारण कृषि और गैर कृषि श्रमिकों के लिए होता है।

8. विश्व का पहला हीरा वायदा बाजार शुरू

• भारत में दुनिया का पहला हीरा वायदा कारोबार इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज लिमिटेड (आईसीईएक्स) पर शुरू हो गया। इसके साथ ही भारतीय कमोडिटी बाजारों के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
• आईसीईएक्स ने कहा है कि इससे हीरा उद्योग को उचित मूल्य की खोज और प्राइस हेजिंग प्लेटफार्म मिलेगा। मांग और आपूर्ति  के बुनियादी मुद्दों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापारिक साझेदारी से उचित मूल्य का पता लगाया जाएगा। यह वायदा कारोबार लंदन स्टाक एक्सचेंज ग्रुप के मिलेनिअम आईटी (एमआईटी) की तकनीक द्वारा संचालित हो रहा है।
• डी बीअर्स ग्रुप की संस्था इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायमंड ग्रेडिंग एंड रिसर्च बाजार से डिलिवरी के लिए हीरे को प्रमाणित करेगी।आईसीईएक्स के अध्यक्ष अशोक सिन्हा ने इस मौके पर कहा कि आईसीईएक्स हीरा कारोबार को एक ऐसा विश्वस्तरीय मंच प्रदान करना चाहता है जो कीमतों के उतार चढ़ाव से जुड़े जोखिम को कम करेगा।
• आईसीईएक्स उचित बाजार प्रदान करेगा जो हीरे के व्यापार में बड़े पैमाने पर सबकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करेगा। हीरे के व्यापार से जुड़े सभी साझेदारों के लिए उसके उचित मूल्यों की खोज और प्रभावी हेजिंग प्लेटफार्म की जरूरत थी जिसको आईसीईएक्स पूरा कर रहा है।