Sunday, October 8, 2017

दैनिक समसामयिकी 08 Oct 2017(Sunday)

October 08, 2017 0
दैनिक समसामयिकी 08 Oct 2017(Sunday)

1.पीएम मोदी ने दिया डिजिटल साक्षरता पर जोर, बोले डिजिटल इंडिया से : हमने बदली विकास की परिभाषा

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आह्वान किया कि देश में किसी भी कीमत पर डिजिटल साक्षरता के मामले में विभाजन नहीं पैदा होना चाहिए। उन्होंने इस पर रोक लगाने और केवल ज्ञान आधारित नवाचार की जगह आवश्यकता आधारित नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया।
• मोदी ने यहां आईआईटी गांधीनगर के 1700 करोड़ की लागत से निर्मित तथा 400 एकड़ में फैले नए परिसर तथा ग्रामीण डिजिटल साक्षरता मिशन के लोकार्पण के मौके पर बोल रहे थे। कार्ल मार्क्स  की र्चचा करते हुए मोदी ने कहा कि एक समय में उनका वर्ग संघर्ष और विभाजन का दर्शन चलता था जो अब सिमट कर नाम मात्र का रह गया है पर डिजिटल साक्षरता के मामले में विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए।
• इस मामले में सतर्क रहना होगा कि कहीं ऐसा न हो कि कुछ लोग इसमें माहिर हों और बहुत लोगों को कुछ भी पता न हो। यह सामाजिक समरसता के लिए संकट पैदा कर सकता है। डिजिटल साक्षरता और डिजिटल इंडिया जैसे अभियान भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी प्रशासन और सुशासन की गारंटी बन सकते हैं।
• व्यापारी को लालफीताशाही से बचाना है : द्वारका में उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि देश का व्यापारी लालफीताशाही और फाइलों तथा बाबुओं और साहबों के चक्कर लगाने के चक्कर में फंस जाए। इसलिए वित्त मंत्री ने कल जीएसटी काउंसिल में सबको राजी कर महत्वपूर्ण फैसले लिये जिनका एक स्वर में पूरे देश में स्वागत हुआ है।
• हर राज्य में होंगे 15-20 हवाई अड्डे : चोटिला में मोदी ने कहा कि उड्डयन क्षेत्र के निरंतर प्रसार और उनकी सरकार की ओर से तैयार संबंधित नीति के चलते एक समय ऐसा आएगा जब हर राज्य में 15 से 20 हवाई अड्डे होंगे और छोटे-छोटे शहर भी हवाई सेवा से जुड़े होंगे।

2. सरकार ने नई हज नीति पेश की

• सरकार ने शनिवार को नई हज नीति पेश कर दी, जिसमें 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को बिना मेहरम (जिसके साथ खून का रिश्ता हो) के हज पर जाने की इजाजत देने सहित कई कदम सुझाए गए हैं। हज नीति 2018-22 में हज यात्रियों को समुद्री मार्ग से भेजने के विकल्प पर काम करने की बात की गई है।
• इसमें यह प्रावधान किया गया है कि हजयात्रियों के प्रस्थान के स्थानों की संख्या को 21 से घटाकर नौ किया जाएगा।
• हज नीति तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार, नई हज नीति को 2012 के उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक तैयार किया गया है।
• शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि 10 साल की अवधि में सब्सिडी खत्म की जाए। नकवी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश में स्पष्ट रूप से सब्सिडी के बारे में बात की गई है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि हज सब्सिडी खत्म हो और गरीब हजयात्रियों पर बोझ कम पड़े।
• अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से गठित समिति के संयोजक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अफजल अमानुल्लाह थे। पूर्व न्यायाधीश एसएस पार्कर, भारतीय हज समिति के पूर्व अध्यक्ष कैसर शमीम और इस्लामी जानकार कमाल फारूकी सदस्य थे तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में हज प्रभारी संयुक्त सचिव जे. आलम समिति के सदस्य सचिव थे।
• नकवी ने कहा, 2018 में हज नई हज नीति के तहत होगा। प्रस्तावित सुविधाओं को देखते हुए यह एक बेहतर नीति है। यह पारदर्शी और जनता के अनुकूल नीति होगी। यह हज यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
• अब कुल कोटे के 70 फीसद हजयात्री हज समिति के जरिए जाएंगे तो 30 फीसद निजी टूर ऑपरेटरों के जरिए हज पर जाएंगे।
• अब 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं बिना मेहरम के हज पर जा सकेंगी, हालांकि वे चार महिलाओं के समूह में जा सकेंगी।
• मेहरम के लिए कोटा 200 से बढ़ाकर 500 करने का भी प्रस्ताव है। मेहरम उसे कहते हैं, जिससे महिला का निकाह नहीं हो सकता। मसलन, पिता, सगा भाई, बेटा और पौत्र-नवासा मेहरम हो सकते हैं।
•  हज के लिए प्रस्थान स्थलों की संख्या को 21 से हटाकर नौ किया जाएगा।द दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू और कोच्चि से लोग हज के लिए प्रस्थान कर सकेंगे।
• समुद्री रास्ते से हज के सफर के विकल्प पर सऊदी अरब सरकार से विचार-विमर्श करने और पोत कंपनियों की रुचि एवं सेवा की थाह लेने के लिए विज्ञापन देने का भी प्रस्ताव है।
• राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए हज कोटे का प्रावधान उनकी यहां की मुस्लिम आबादी के अनुपात में किया जाएगा।

3. उप्र को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए शबरी संकल्प अभियान

• उत्तर प्रदेश सरकार ‘‘ शबरी संकल्प अभियान’ के तहत अगले तीन सालों में सूबे को कुपोषण से आजादी दिलाएगी। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनुपमा जायसवाल ने आज यहां कहा कि प्रदेश की उन्नति एवं विकास तभी संभव है, जब वहां के निवासी स्वस्थ, सबल हों।
• स्वस्थ और क्षमतावान जनशक्ति की उपलब्धता तभी संभव है, जब मातृ एवं शिशु दोनों स्वस्थ होंगे।उन्होंने कहा कि शबरी संकल्प पोषण योजना आगामी 23 अक्टूबर को‘‘ वजन दिवस’ के साथ प्रारंभ होगी। कुपोषण से सर्वाधिक ग्रसित प्रदेश के 29 जिलों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जन्म के समय किसी भी बच्चे का वजन ढाई किलो से कम न हो।
• इसके लिए बच्चों और महिलाओं को बड़े पैमाने पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य मंत्री ने बताया कि नीति आयोग ने भी प्रदेश के 29 जिलों को सर्वाधिक कुपोषण से ग्रसित बताया है। इन जिलों में प्रभावित गांवों को चिह्नित करने के बाद कुपोषण से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री ने बताया कि बाल विकास एवं पुष्टाहार योजना के तहत लाभार्थियों का शत-प्रतिशत सत्यापन कर उनकी सूची तैयार की जा रही है।
• लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं के तहत उपलब्ध कराये जा रहे लाभ का रिकॉर्ड रखा जाएगा ताकि उनकी निगरानी की जा सके। उन्होंने बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे राज्य से कुपोषण जैसी व्याधि से निपटने के लिए कार्य करें।
• मातृ, शिशु तथा किशोरियों के स्वास्य को सुधारने के साथ-साथ कुपोषण को समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करें।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कुपोषण से निपटने के लिए गंभीर है। इसके कारणों का पता लगाना होगा, ताकि इसे जड़ से दूर किया जा सके।
• इसकी रोकथाम सही समय पर की जाए तो इससे निपटा जा सकता है। ग्राम स्वास्य पोषण दिवस को और प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गये हैं। इसके तहत ज्यादा से ज्यादा बच्चों का वजन लेने के साथ-साथ उनका टीकाकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
• माताओं के रक्तचाप और खून तथा वजन की भी जांच की जाएगी। इसमें ग्राम प्रधान की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा कुपोषण मुक्त गांव को‘‘ मॉडल विलेज’ के रूप में विकसित किये जाने की है।

4. विदेश व्यापार नीति की मध्यावधि समीक्षा होने की संभावना नहीं

• सरकार पंचवर्षीय योजना की तर्ज पर एकमुश्त पंचवर्षीय विदेश व्यापार नीति के एलान के स्थान पर सरकार वक्त की जरूरत के मुताबिक आयातकों और निर्यातकों के लिए नीतिगत फैसले लेने को प्राथमिकता दे रही है। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग को बढ़ाने के लिए निरंतर नीतिगत प्रयास करने होंगे जिसके लिए निश्चित अवधि वाली नीति तैयार करने का इंतजार नहीं किया जा सकता है।
• सरकार ने मौजूदा पांच वर्षीय विदेश व्यापार नीति 2015 में जारी की थी। इस वर्ष इसकी मध्यावधि समीक्षा होनी थी। लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई एलान नहीं हुआ है। वाणिज्य व उद्योग मंत्रलय से संकेत मिल रहे हैं कि संभवत: इस वर्ष मध्यावधि समीक्षा के लिए कोई औपचारिक बयान जारी न हो।
• निर्यातकों की समस्याओं पर विचार के लिए वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु की तरफ से बुलाई गई एक बैठक के बाद वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया ने एक सवाल के जवाब में कहा भी कि इस संबंध में कोई औपचारिक नीतिगत एलान होगा या नहीं, इसका निर्णय खुद मंत्री लेंगे।
• अभी तक की परंपरा के मुताबिक प्रत्येक पांच वर्षीय विदेश व्यापार नीति की तीसरे वर्ष में मध्यावधि समीक्षा की जाती थी। यह कार्य सितंबर के अंत तक पूरा कर लिया जाता था। उसके बाद निर्यातकों व आयातकों के लिए आवश्यक नीतिगत बदलावों की घोषणा की जाती थी जो नीति की शेष अवधि में जारी रहते थे।
• वाणिज्य मंत्रलय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बदलते वैश्विक परिदृश्य और प्रतिस्पर्धा में अब नीतिगत बदलावों के लिए दो-तीन वर्ष की इंतजार करना संभव नहीं है। बाजार की जरूरतें तेजी से बदल रही हैं। अर्थव्यवस्था में भी लगातार बदलाव हो रहे हैं।
• इस दृष्टि से प्रत्येक उद्योग क्षेत्र की रफ्तार बनाये रखने के लिए यह आवश्यक है कि समय-समय पर जरूरत के मुताबिक निर्णय होते रहें। यही नियम आयात निर्यात क्षेत्र पर भी लागू होता है। अधिकारी का मानना है कि यदि किसी क्षेत्र विशेष के निर्यातक या आयातक किसी दिक्कत में फंसते हैं तो उसका निदान उसी वक्त करना होगा अन्यथा वे अंतरराष्ट्रीय बाजार की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे।
• सरकार इस तरह के दस्तावेजों को आज के माहौल में अप्रासंगिक मान रही है। सरकार ने पंचवर्षीय योजना बनाने का काम भी अब बंद कर दिया है। देश की आखिरी पंचवर्षीय योजना दस्तावेज 2012 से 2017 के लिए बना था। 1इस साल मार्च में इसकी अवधि समाप्त हो चुकी है।
• उसके बाद सरकार ने नयी योजना का एलान नहीं किया है। इससे पहले इस योजना की मध्यावधि समीक्षा भी नहीं हुई थी। इसी तर्ज पर अब माना जा रहा है कि पांच वर्ष के लिए आयात निर्यात नीति बनाने की परंपरा भी बंद की जा सकती है।

5. परमाणु हथियार प्रतिबंध करार का हिस्सा नहीं बनेगा अमेरिका

• इंटरनेशनल कैंपेन टू एबोलिश न्यूक्लियर वेपंस (आइसीएएन) को वर्ष 2017 का शांति का नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद भी परमाणु हथियार संपन्न देश अमेरिका के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह परमाणु हथियार को कानूनी तौर पर प्रतिबंधित करने वाले करार का हिस्सा नहीं बनेगा। हालांकि आइसीएएन की लगातार कोशिशों से संयुक्त राष्ट्र के 122 सदस्य देशों ने परमाणु हथियार को प्रतिबंधित करने वाले समझौते को स्वीकार कर लिया है।
• इसपर और 50 देशों के हस्ताक्षर के बाद यह अमल में आएगा, लेकिन अमेरिकी रुख से करार के प्रभावी होने की संभावना बेहद कम है। रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इजरायल व उत्तर कोरिया ने भी करार से दूरी बना रखी है।1अमेरिकी विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता ने कहा, ‘इस घोषणा (नोबेल का शांति पुरस्कार) से संधि के प्रति अमेरिका के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है।
• अमेरिका न तो इसका समर्थन करता है और न ही ‘परमाणु हथियार निषेध संधि’ पर हस्ताक्षर करेगा। करार से दुनिया ज्यादा शांतिपूर्ण नहीं हो पाएगी। इसकी मदद से एक भी परमाणु हथियार को खत्म नहीं किया जा सकेगा। साथ ही किसी भी देश की सुरक्षा भी नहीं दुरुस्त होगी।’
• विदेश विभाग के प्रवक्ता ने मौजूदा परमाणु अप्रसार संधि के तहत ही काम करने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका मौजूदा व्यवस्था के तहत ही परमाणु हथियार निरस्त्रीकरण के लिए अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में काम करता रहेगा।

Imp. question in paper

October 08, 2017 0
Imp. question in paper

● जो बीत चुका हो – अतीत (IAS)
● जो दिखायी न पड़े – अदृश्य, अप्रत्यक्ष (UPPCS, IAS) 
● जो सदा से चला आ रहा है – अनवरत (IAS) 
● जो कभी नहीं मरता – अमर्त्य, अमर (APO, RAS, IAS) 
● जो आगे (दूर) की न सोचता हो – अदूरदर्शी (Upper Sub.) 
● जो आगे (दूर) की सोंचता हो – अग्रसोची, दूरदर्शी (UPPCS) 
● धरती (पृथ्वी) और आकाश के बीच का स्थान – अंतरिक्ष (UPPCS) 
● जिसका कोई अर्थ न हो – अर्थहीन (UPPCS) 
● जिस पर आक्रमण न किया गया हो – अनाक्रांत (UPPCS) 
● जिसे जीता न जा सके – अजेय (UPPCS, Upper Sub., RO)
● बिना वेतन काम करने वाला – अवैतनिक (UPPCS, B.Ed., Low Sub.) 
● जिसका जन्म पहले हुआ हो (बड़ा भाई) – अग्रज (RAS) 
● दोपहर के बाद का समय – अपराह्न (IAS,  Upper Sub., UPPCS)
● जो पराजित न किया जा सके – अपराजेय (UKPCS)
● अधिक बढ़ा-चढ़ा कर कहना – अतिशयोक्ति, अतियुक्ति (B.Ed.) 
● जिसका परिहार (त्याग) न हो सके/जिसको छोड़ा न जा सके – अपरिहार्य (UPPCS, B.Ed., Low Sub.)
● जो कानून के प्रतिकूल हो/जो विधि के विरुद्ध हो – अवैध, अविधिक (UPPCS, IAS) 
● जो समय पर न हो – असामयिक (UPPCS) 
● जो अवश्य होने वाला हो – अवश्यम्भावी (APO, UPPCS)
● जिसका विवाह न हुआ हो – अविवाहित (IAS) 
● जो सबके अन्तःकारण की बात जानने वाला हो – अन्तर्यामी (MPPCS) 
● जिसका इलाज न हो सके – असाध्य (RO) 
● किसी कार्य के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता – अनुदान (UKPCS)
● व्यर्थ/अनुचित खर्च करने वाला – अपव्ययी (RAS, UPPCS)
● जिसकी पहले से कोई आशा न हो – अप्रत्याशित (UPPCS, APO) 
● पुरुष जो अभिनय करता हो – अभिनेता (MPPSC) 
● जो भेदा या तोड़ा न जा सके – अभेद्य (Low Sub.) 
● जिसका जन्म छोटी जाति (निचले वर्ण) में हुआ हो – अंत्यज (RO) 
● जो अभी-अभी उत्पन्न हुआ हो – अद्यःप्रसूत (UPPCS) 
● जिसको क्षमा न किया जा सके – अक्षम्य (Low Sub.) 
● जो न जाना जा सके – अज्ञेय (Upper Sub., UPPCS)
● जो कुछ न जानता हो – अज्ञ, अज्ञानी (UPPCS, B.Ed.) 
● कम बोलने वाला – अल्पभाषी, मितभाषी (Low Sub., APO, UPPCS, RAS,) 
● थोड़ा जानने वाला – अल्पज्ञ (RAS, MPPCS) 
● जिसका कभी अन्त न हो – अनन्त (UPPCS, B.Ed.) 
● जिसका माँ-बाप न हो – अनाथ (IAS,  UPPCS)
● जिसके समान कोई दूसरा न हो – अद्वितीय (RAS, IAS,  UPPCS)
● जिस पर मुकद्दमा चल रहा हो/ जिस पर अभियोग लगाया गया हो – अभियुक्त, अभियोगी (UPPCS, APO, IAS) 
● जिसकी कोई सीमा न हो – असीम (IAS,  UPPCS)
● जिसके आने की कोई तिथि न हो – अतिथि (IAS,  UPPCS)
● जिसे भुलाया न जा सके – अविस्मृति (IAS) 
● जिसकी उपमा न हो – अनुपम, अनुपमा (UPPCS, IAS) 
● जिसे बुलाया न गया हो/जो बिना बुलाये आया हो – अनाहूत (IAS,  UPPCS)
● जिसका वचन या वाणी द्वारा वर्णन न किया जा सके/जिसे वाणी व्यक्त न कर सके – अनिर्वचनीय, अवर्णनीय (IAS,  UPPCS)
● जिसे शब्दों में नहीं कहा जा सके – अकथनीय (UPPCS) 
● जिसका निवारण न हो सकता हो – असाध्य (UPPCS, B.Ed.) 
● जो अनुकरण करने योग्य हो – अनुकरणीय (APO) 
● किसी के पीछे-पीछे चलने वाला/जो पीछे चलता हो – अनुचर, अनुगामी, अनुयायी (IAS,  B.Ed.) 
● जिस पर अनुग्रह किया गया हो – अनुगृहीत (UPPCS, B.Ed.) 
● जो हिसाब किताब की जाँच करता हो – अंकेक्षक (MPPCS) 
● रूप के अनुसार – अनुरूप (UPPCS) 
● सोच-समझकर कार्य न करने वाला – अविवेकी (UPPCS, RAS) 
● जो पहले कभी घटित न हुआ हो – अघटित (IAS) 
● जिसकी परिभाषा देना संभव न हो – अपरिभाषित (IAS,  B.Ed.) 
● विकृत शब्द/बिगड़ा हुआ शब्द – अपभ्रंश (UPPCS) 
● जो विश्वास करने योग्य (लायक) न हो – अविश्वासनीय (Low Sub.) 
● जिसका किसी भी प्रकार उल्लंघन नहीं किया जा सके – अनुलंघनीय (Low Sub.) 
● जो अभी तक न आया हो – अनागत (IAS,  B.Ed.) 
● मूल्य घटाने की क्रिया – अवमूल्यन (IAS,  B.Ed.) 
● अधिकार या कब्जे में आया हुआ – अधिकृत (UKPCS)
● जो पहले कभी नहीं सुना गया – अनुश्रुत (Low Sub.) 
● जिसका जन्म अण्डे से हो – अण्डज (APO, B.Ed.) 
● गुरु के समीप या साथ रहने वाला विद्यार्थी – अन्तेवासी (UPPCS, B.Ed.) 
● जो व्यय न किया जा सके – अव्यय (Low Sub.) 
● जिसका उत्तर न दिया गया हो – अनुत्तरित (Low Sub., UPPCS)
● जो बदला न जा सके – अपरिवर्तनीय (Low Sub.) 
● जो इधर-उधर से घूमता-फिरता आ जाए – आगन्तुक (UPPCS, IAS) 
● जो आदर करने योग्य हो – आदरणीय (IAS) 
● आशा से अधिक/जिसकी आशा न की गई हो – आशातीत (Upper Sub., Low Sub.) 
● आलोचना करने वाला – आलोचक (Upper Sub.)
● आदि से अन्त तक – आद्योपान्त, आद्यन्त (UPPCS, IAS) 
● जो अपने पैरों पर खड़ा हो – आत्म-निर्भर (UPPCS) 
● आभार मानने वाला – आभारी (RAS, UPPCS)
● जो किसी वस्तु या व्यक्ति के गुण-दोष की आलोचना करता हो – आलोचक (Upper Sub.) 
● वह कवि जो तत्काल/तत्क्षण कविता कर डालता हो – आशुकवि (UKPCS, UPPCS)
● जो स्वयं का मत मानने वाला हो – आत्मभिमत (UPPCS) 
● जो ईश्वर को मानता हो – आस्तिक (MPPCS, Low Sub., UPPCS, BPSC, UKPCS)
● अतिथि की सेवा करने वाला – आतिथेयी (UKPCS)
● भगवान के सहारे अनिश्चित आय – आकाशवृत्ति (UKPCS)
● जो परम्परा से सुना हुआ हो – आनुश्राविक (UKPCS)
● जो इन्द्रियों को वश में कर ले – इन्द्रिय-निग्रहवान (Upper Sub.) 
● इतिहास जानने वाला – इतिहास-विंद, इतिहासविज्ञ, इतिहासकार (Upper Sub.) 
● इंद्रियों को वश में रखने वाला/जो इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर चुका हो – इंद्रियजित, जितेन्द्रिय (TET)
● इन्द्रियों से परे/इन्द्रियों के पहुँच के बाहर – इन्द्रियाती (UPPCS) 
● जो ऊपर कहा गया है – उपर्युक्त (IAS) 
● उपकार करने वाला – उपकारी (UPPCS) 
● किसी के बाद उसकी संपत्ति या पद को ग्रहण करने वाला व्यक्ति – उत्तराधिकारी (RAS) 
● जो सब कुछ उदारता से देना जानता है – उदारमना (UPPCS) 
● जिसने ऋण चुका दिया हो – उऋण (BPSC)
● पर्वत के नीचे तलहटी की भूमि – उपत्यका (RAS) 
● ऊँचे स्वर से उच्चारण किया हुआ – उर्ध्वोच्चारित (UPPCS) 
● जो धरती फोड़कर जन्मता है – उद्भिज (Low Sub.) 
● जो छाती/पेट के बल चलता है – उरग, सर्प (Low Sub.) 
● एक ही आदमी का अधिकार – एकाधिकार (UPPCS, RAS) 
● अन्य से सम्बन्ध न रखने वाला – एकान्तिक (UPPCS) 
● अपनी विवाहिता पत्नी से उत्पन्न (पुत्र) – औरस (APO) 
● जो सब कुछ उदारता से देना जानता है – औदार्यदाता (UPPCS) 
● जो कल्पना से परे हो – कल्पनातीत (IAS,  BPSC)
● जो काल से परे हो – कालातीत (IAS) 
● जिस पुरुष का ब्याह न हुआ हो/जिसने अभी विवाह न किया हो – कुमार, कुँवारा, कुआँरा (IAS) 
● भय-शोकादि के कारण कर्तव्य-ज्ञान से रहित/जिसे कर्तव्य न सूझ रहा हो – किंकर्तव्य-विमूढ़ (UPPCS, B.Ed., Low Sub.) 
● लेखन अति उत्तम होना – कलम तोड़ना (UPSI)
● जो अच्छे या ऊँचे कुल में उत्पन्न हुआ हो – कुलीन (Low Sub., UPPCS)
● व्यक्ति जिसका ज्ञान अपने ही स्थान तक सीमित हो/जिसे बाहरी जगत का ज्ञान न हो – कूपमंडूक (UKPCS)
● जो मोल लिया हुआ हो – क्रीत (RAS, APO) 
● किये हुए उपकार को भूल जाने वाला – कृतघ्न, एहसान, फरामोश (Low Sub., RAS, UPPCS, APO, Asst. Grad Exam.) 
● स्त्री जो कविता रचती है – कवयित्री (Low Sub.) 
● जो कर्त्तव्य से च्युत हो गया हो – कर्त्तव्यच्युत (Upper Sub.) 
● जो अपने काम से जी चुराता हो – कामचोर (MPPCS) 
● जिसके पास करोड़ों रुपये हों – करोड़पति (B.Ed., IAS) 
● जो कम खर्च करने वाला हो – कंजूस, मितव्ययी (UPPCS, APO) 
● राजनीतिज्ञों एवं राजदूतों की कला – कूटनीति (MPPCS)
● जो भवन/घर गिर गया हो – खंडहर (Low Sub.) 
● ऐसा ग्रहण जिसमें सूर्य परा ढक जाये – खग्रास, सूर्यग्रहण (UPPCS) 
● जो खाया जा सके (जो खाने योग्य हो) – खाद्य (UPPCS) 
● आकाश चूमने वाला – गगनचुम्बी, गगनस्पर्शी (Low Sub., APO, UPPCS, RAS) 
● संध्या काल जब गायें चरकर लौटती हैं/सन्ध्या और रात के बीच का समय – गोधूलि (Upper Sub.) 
● जो बात छिपाई जाए – गोपनीय (UPPCS) 
● जिसके सिर पर बाल न हो – गंजा (Low Sub.) 
● जो पहाड़ को धारण करता हो – गिरिधारी, श्रीकृष्ण (IAS) 
● जो सदा से चला आ रहा हो – चिरन्तन, शाश्वत (IAS) 
● जिस पर चिन्ह लगाया गया हो – चिन्हित (UPPCS) 
● जिनके चार-चार पैर होते हैं – चतुष्पद, चौपाया (APO) 
● जिसके सिर पर चन्द्रमा (चन्द्र) है – चंद्रशेखर (UPPCS, RO)
● जहाँ से अनेक मार्ग चारों ओर जाते हैं – चौराहा (IAS) 
● छोटे से छोटे दोष को खोजने वाला – छिद्रान्वेषी (MPPCS, RAS) 
● जीने की प्रबल इच्छा – जिजीविषा (MPPCS, RAS) 
● कुछ जानने या ज्ञान प्राप्त करने की चाह – जिज्ञासा (UPPCS) 
● जानने की इच्छा रखने वाला – जिज्ञासु (UPSI, UPPCS, IAS, RAS, Low Sub.) 
● जिसने इन्द्रियों पर विजय पा ली हो – जितेन्द्रिय (Upper Sub.) 
● जो अवैध सन्तान हो – जारज (UKPCS)
● तीनों कालों (भूत, वर्तमान और भविष्य) को जानने वाला – त्रिकालज्ञ, त्रिकालदर्शी (UKPCS)
● ऐसी जीविका जो आकस्मिक हो – तदर्थजीविका (UPPCS) 
● धरती और आकाश के बीच का स्थान – त्रिशंकु (UPPCS) 
● जो आगे की सोचता हो – दूरदर्शी (RAS) 
● गोद लिया हुआ पुत्र – दत्तक (UPPCS, UKPCS)
● जो दुबारा जन्म लेता हो – द्विज, द्विजन्मा (UPPCS, APO) 
● जहाँ जाना कठिन हो – दुर्गम (MPPCS, RAS) 
● जिसका दमन करना कठिन हो – दुर्दम, दुर्दम्य (UPPCS) 
● स्त्री-पुरुष का जोड़ा/पति एवं पत्नी – दंपति, दंपती (UPPCS

2⃣0⃣1⃣7⃣ नोबेल पुरस्कार

October 08, 2017 0
2⃣0⃣1⃣7⃣ नोबेल पुरस्कार

2⃣0⃣1⃣7⃣ नोबेल पुरस्कार

1⃣भौतिकी के क्षेत्र में➡
1-रेनर वीस, ( आमेरिका )
2-बैरी सी बैरिश ( आमेरिका )
3-किप एस थॉर्न ( आमेरिका )
विषय - इन तीनों वैज्ञानिकों को LIGO डिटेक्‍टर और गुरुत्‍वाकर्षण तरंगों के अध्‍ययन के लिए ये सम्‍मान दिया जाएगा.

2⃣रसायन के क्षेत्र में➡
1-जैक्स ड्यूबचित,( स्विजरलैंड )
2- जोएचिम फ्रैंक ( आमेरिका )
3-रिचर्ड हेंडरसन ( ब्रिटेन  )
विषय- तीनों वैज्ञानिकों को बॉयोमालीक्यूल्स के सॉल्यूशन के उच्च संकल्प संरचना के निर्धारण के लिए क्रायो इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोपी विकसित करने को लेकर सम्मानित किया गया।

3⃣चिकित्सा के क्षेत्र में➡
1-जैफ्री सी हाल (अमेरिका)
2-माइकल रोसबाश (अमेरिका)
3-माइकल डब्ल्यू यंग (अमेरिका)
विषय- चिकित्सा के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है।

4⃣साहित्य के क्षेत्र में➡
1-काजुओ इशीगुरो (जापानी मूल के ब्रिटिश)
विषय-  'द रीमेंश ऑफ द डे' उपन्यास के लिए साहित्य का नोबेल दिया जाएगा

5⃣शांति के क्षेत्र में➡
1.आईकेन (ICAN)" यानी"
इंटरनेशनल कैम्पेन टू अबोलिश न्यूक्लियर वेपन्स'(आईसीएएन)
विषय- दुनिया में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के बाद भयावह परिस्थितियों से अवगत कराने के लिए उसके प्रयासों की वजह से दिया गया है।
इसकी शुरुआत ऑस्ट्रेलिया में हुई थी

6⃣अर्थशास्त्र के क्षेत्र में➡
आभी घोषणा होनी है

🙏नोबेल पुरस्कार की स्थापना:🙏

नोबेल पुरस्कार की स्थापना स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड बर्नाड (बर्नहार्ड) नोबेल ने 1901 ई. में की थी। अल्फ्रेड बर्नाड (बर्नहार्ड) नोबेल का जन्म 1833 ई. में स्वीडन के शहर स्टॉकहोम में हुआ था। 9 वर्ष की आयु में वे अपने परिवार के साथ रूस चले गये। अल्फ्रेड नोबेल एक अविवाहित स्वीडिश वैज्ञानिक और केमिकल इंजीनियर थे जिसने 1866 ई. में डाइनामाइट की खोज की।

स्वीडिश लोगों को 1896 में उनकी मृत्यु के बाद ही पुरस्कारों के बारे में पता चला, जब उन्होंने उनकी वसीयत पढ़ी, जिसमें उन्होंने अपने धन से मिलने वाली सारी वार्षिक आय पुरस्कारों की मदद करने में दान कर दी थी। अपनी वसीयत में उन्होंने आदेश दिया था कि "सबसे योग्य व्यक्ति चाहे वह स्केडीनेवियन हो या ना हो पुरस्कार प्राप्त करेगा।"

उनके द्वारा छोड़े गये धन पर मिलने वाला ब्याज उन व्यक्तियों के बीच वार्षिक रूप से बाँटा जाता है, जिन्होंने विज्ञान, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है। विश्व के सबसे अधिक गौरवशाली पुरस्कार को 'नोबेल फाउंडेशन' द्वारा मदद प्रदान की जाती है।

प्रमुख तथ्य:

पहले नोबेल पुरस्कार पाँच विषयों में कार्य करने के लिए दिए जाते थे। अर्थशास्त्र के लिए पुरस्कार स्वेरिजेश रिक्स बैंक, स्वीडिश बैंक द्वारा अपनी 300वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में 1967 में आरम्भ किया गया और इसे 1969 में पहली बार प्रदान किया गया। इसे अर्थशास्त्र में नोबेल स्मृति पुरस्कार भी कहा जाता है।

पुरस्कार के लिए बनी समिति और चयनकर्ता प्रत्येक वर्ष अक्टूबर में नोबेल पुरस्कार विजेताओं की घोषणा करते हैं लेकिन पुरस्कारों का वितरण अल्फ्रेड नोबेल की पुण्य तिथि 10 दिसम्बर को किया जाता है।

प्रत्येक पुरस्कार में एक वर्ष में अधिकतम तीन लोगों को पुरस्कार दिया जा सकता है। इनमें से प्रत्येक विजेता को एक स्वर्ण पदक, डिप्लोमा, स्वीडिश नागरिकता में एक्सटेंशन और धन दिया जाता है।

अगर एक पुरस्कार में दो विजेता हैं, तो धनराशि दोनों में समान रूप से बांट दी जाती है। पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की संख्या अगर तीन है तो चयन समिति के पास यह अधिकार होता है कि वह धनराशि तीन में बराबर बाँट दे या एक को आधा दे दे और बाकी दो को बचा धन बराबर बाँट दे।

अब तक केवल दो बार मृत व्यकियों को यह पुरस्कार दिया गया है। पहली बार एरिएक्सेल कार्लफल्डट को 1931 में और दूसरी बार संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव डैग डैमरसोल्ड को 1961 ई. में दिया गया था।

भारत के नोबेल पुरस्कार विजेता:

👍भारतीय नागरिकता के साथ:
1-रवीन्द्रनाथुर टैगोर (साहित्य) 1913
2-चन्द्रशेखर वेङ्कट रामन्(विज्ञान) 1930
3-मदर टेरेसा (शांति) 1979
4-अमर्त्य सेन (अर्थशास्त्र) 1998
5-कैलाश सत्यार्थी( शांति के लिए) 2014

💐भारतीय मूल के:

1-हरगोविन्द खुराना(चीकित्सा,कृत्रिम जीन के संश्लेषण)1968
2-सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर(भौतिकी ,चन्द्रशेखर सीमा) 1983
3-वेंकटरामन रामकृष्णन ( रसायन विज्ञान,प्रोटीन के निर्माण करने वाले राईवोसोम कि संरचना)2009