=>चीन की 'सलामी स्लाइसिंग' की रणनीति, और काउंटर करने का भारतीय प्लान
- भारत अब बॉर्डर के इलाकों में विकास पर पूरा जोर देगा, क्योंकि उन इलाकों में विकास न होने के चलते ही चीन को यहां दखल देने का मौका मिलता है। भारत का प्लान 4,057 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल (LAC) के नजदीक बुनियादी ढांचे का विकास करने को लेकर है।
सलामी स्लाइसिंग का मतलब है- पड़ोसी देशों के खिलाफ छोटे-छोटे सैन्य ऑपरेशन चलाकर धीरे-धीरे किसी बड़े इलाके पर कब्जा कर लेना। ऐसे ऑपरेशन इतने छोटे स्तर पर किए जाते हैं कि इनसे युद्ध की आशंका नहीं होती, लेकिन पड़ोसी देश के लिए यह समझना मुश्किल होता है कि इसका जवाब कैसे और कितना दिया जाए। चीन ऐसे कई छोटे-छोटे ऑपरेशन चलाकर कई इलाकों पर कब्जा कर चुका है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमैसी का ध्यान खींचना बार-बार नहीं खींचा जा सकता।
बॉर्डर के इलाकों में चीन अपनी विकास योजनाओं के जरिए भारत के क्षेत्र में घुसपैठ कर लेता है। यहां खराब बुनियादी ढांचे के चलते भारतीय सेना कुछ कर पाने में लाचार महसूस करती है। यहां तक कि बॉर्डर के इन इलाकों में बुनियादी सड़कें भी मौजूद नहीं हैं और यही वजह है कि चीन की सलामी स्लाइसिंग की रणनीति यहां और कारगर हो जाती है। चीन ने अपनी सेना के लिए तिब्बत में रेलवे का नेटवर्क, हाइवे, सड़कें, एयरबेस, रेडार और अन्य बुनियादी ढांचा तैयार कर रखा है। इसके अलावा यहां चीन ने सेना के 30 डिविजन (सभी में 15,000 से ज्यादा सैनिक) तैनात कर रखे हैं। इनमें 5-6 रैपिड रिऐक्शन फोर्सेज भी शामिल हैं।
भारत इस मामले में चीन से काफी पीछे है। 15 साल पहले एलएसी पर कुल 73 सड़कें (4,643 किलोमीटर) बनाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इनमें से केवल 27 सड़कें ही तैयार हो पाई हैं। इतना ही नहीं, लंबे वक्त से प्रस्तावित 14 'रणनीतिक रेलवे लाइन्स' बिछाने का काम भी अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
बॉर्डर के इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास से न केवल चीन की भारत में बढ़ती घुसपैठ को रोका जा सकेगा बल्कि विवादित इलाकों पर उसका दावा भी कमजोर होगा।

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