Saturday, October 28, 2017

दैनिक समसामयिकी 13 Oct 2017(Friday)

1.ग्लोबल हंगर इंडेक्स में विकासशील देशों में भारत सौवें स्थान पर

• ग्लोबल हंगर इंडेक्स यानी वैश्विक भूख सूचकांक की सालाना सूची गुरुवार को जारी की गई। इस सूची में 119 विकासशील देशों को शामिल किया गया है। पिछले वर्ष इस सूची में 97वें स्थान पर रहा भारत इस वर्ष 100वें स्थान पर फिसल गया। चिंता की बात यह है कि हमारी स्थिति उत्तर कोरिया, बांग्लादेश और इराक से भी बदतर है।
• एशियाई देशों की बात करें तो हमारी स्थिति सिर्फ पाकिस्तान और अफगानिस्तान से बेहतर है, जो क्रमश: 106 और 107 पायदान पर हैं।
• क्या है वैश्विक भूख सूचकांक अलग-अलग देशों में लोगों को खाने की चीजें कैसी और कितनी मिलती हैं, यह उसे दिखाने का साधन है। यह सूचकांक हर साल ताजा आंकड़ों के साथ जारी किया जाता है।
• इस सूचकांक के जरिये विश्वभर में भूख के खिलाफ चल रहे अभियान की उपलब्धियों और नाकामियों को दर्शाया जाता है। इस सर्वेक्षण की शुरुआत इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान) ने की और वेल्ट हंगरलाइफ नामक एक जर्मन स्वयंसेवी संस्थान ने इसे सबसे पहले वर्ष 2006 में जारी किया था।
• वर्ष 2007 से इस अभियान में आयरलैंड का भी एक स्वयंसेवी संगठन शामिल हो गया।
• ऐसे समङों इस सूचकांक को : सूचकांक में स्कोर और रैंक अधिक होने का मतलब है कि उस देश में भूख की समस्या अधिक है। इसी तरह किसी देश की रैंक अगर कम होती है तो उसका मतलब है कि वहां स्थिति बेहतर है।
• इसे नापने के चार मुख्य पैमाने हैं। कुपोषण, शिशुओं में भयंकर कुपोषण, बच्चों के विकास में रुकावट और बाल मृत्यु दर। 9.9 या उससे कम का स्कोर कम भूख को दर्शाता है, जबकि 35.0 और 49.9 के बीच के अंक खतरनाक भूख को निरूपित करते हैं। वहीं, 20-34.9 स्कोर का मतलब है भूख की गंभीर समस्या।
• भारत के लिए चिंता की स्थिति : भारत में बच्चों की स्थिति बहुत चिंताजनक है। पांच वर्ष से कम उम्र के हर पांचवें बच्चे का वजन उसकी ऊंचाई की तुलना में बहुत कम है।
• भारत का स्कोर इस वर्ष 31.4 है।1शीर्ष देश : बेलारूस, बोस्निया एंड हर्जेगोविना, चिली, क्रोएशिया, क्यूबा, एस्तोनिया, कुवैत, लातविया, लिथुआनिया, मोंटेनेग्रो, स्लोवाक गणराज्य, तुर्की, यूक्रेन, उरुग्वे।
• इन सभी देशों का स्कोर पांच से कम है, इसलिए इन्हें शीर्ष देशों में प्रथम रैंक के स्थान पर रखा गया है।

2. ओबोर पर भारत के पक्ष में खुल कर आया अमेरिका

• 27 जून, 2017 को वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद जारी संयुक्त घोषणा पत्र में पहली बार चीन की वन बेल्ट वन रोड (ओबोर- नया नाम बेल्ट एंड रोड इनिसिएटिव-बीआरआइ) को लेकर भारत की चिंताओं का किया गया था।
• अब अमेरिका ने यह साबित कर दिया है कि वह सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी की राजकीय यात्र को देखते हुए नहीं था, बल्कि यह ट्रंप प्रशासन की सोची समझी कूटनीति का हिस्सा था।
• यही वजह है कि अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने सेना से जुड़ी सीनेट की रक्षा समिति के सामने यह बयान दिया है कि चीन की ओबोर परियोजना एक विवादित भौगोलिक स्थान से गुजर रही है जिसको लेकर अमेरिका चिंतित है।
• वैसे इस बयान का चीन ने कड़ा विरोध किया है और पाकिस्तान में भी इस पर जबरदस्त हंगामा मचा हुआ है। पाकिस्तान में तो इस बात पर बहस छिड़ गई है कि इस बयान से अमेरिका ने यह साफ कर दिया है कि उसकी कश्मीर नीति भारत के पक्ष में बदल रही है।
• अमेरिका ने परोक्ष तौर पर गिलगिट बाल्टिस्तान के विवादित होने के भारत के दावे का किया है। दूसरी तरफ भारत का मानना है कि यह पूरी तरह से वैश्विक कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भारत के रुख का है। विदेश मंत्रालय  के सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री ने सीनेट की जिस समिति के सामने यह बयान दिया है वह बेहद महत्वपूर्ण है। यह बयान बताता है कि भारत के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं में अमेरिका ने इस पूरे मुद्दे पर जो रुख अपनाया था उसे वह आंतरिक तौर पर भी स्वीकार करता है।
• वैसे चीन को अमेरिकी रक्षा मंत्री का यह बयान नागवार गुजरा है, लेकिन सूत्रों की मानें तो ओबोर या बीआरआइ को लेकर उसे और कड़े संकेत मिलेंगे। इस महीने के अंत तक अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन भारत दौरे पर आने वाले हैं।
• इस दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के अलावा अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात होगी। यह दो महीने के भीतर स्वराज व टिलरसन की दूसरी मुलाकात होगी। माना जा रहा है कि इन दोनों के बीच होने वाली बैठक में ओबोर भी एक मुद्दा रहेगा।
• इसकी एक वजह यह बताई जा रही है कि अमेरिका ओबोर के माध्यम से मध्य पूर्व या केंद्रीय एशियाई देशों में चीन की बढ़ती पहुंच को बहुत पसंद नहीं करता है। सीनेट के सामने अमेरिकी रक्षा मंत्री ने यह कहा है कि अमेरिका विभिन्न देशों के बीच बढ़ते संपर्क का हिमायती है लेकिन वह किसी एक देश के वर्चस्व के खिलाफ है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस योजना के पाकिस्तान के गिलगिट-बाल्टिस्तान से गुजरने को लेकर भारत की चिंताएं जायज है।
• सनद रहे कि मोदी और ट्रंप की जून, 2017 में हुई बैठक के बाद जारी बयान में पहली बार अमेरिका ने चीन की ओबोर परियोजना पर भारत के रुख का किया था। इसमें कहा गया था कि दोनों देश आर्थिक तौर पर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की योजनाओं का करते हैं। लेकिन यह योजना पारदर्शी तरीके से और दूसरे देशों की सार्वभौमिकता व क्षेत्रीय अखंडता का आदर करते हुए होनी चाहिए।
• सनद रहे कि भारत ओबोर का यह कहते हुए विरोध करता है कि वह जम्मू एवं कश्मीर के उस हिस्से से गुजरेगा जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है।

3. कूटनीति की धार तेज करेगा सोलर एलायंस

• अंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस () भारत की भावी कूटनीति का एक अहम हिस्सा होगा। वर्ष 2015 में इस एलायंस की घोषणा भारत और फ्रांस के सहयोग से पेरिस में हुई थी और 08 दिसंबर, 2017 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इसकी स्थापना बैठक होगी जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैकरॉन के अलावा कुछ अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के भी शामिल होने के आसार हैं।
• कई दूसरे देशों के प्रतिनिधि भी इसमें हिस्सा लेंगे। अपनी तरह का पहला ऐसा अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसका मुख्यालय भारत में स्थापित किया गया है। सरकार का मानना है कि यह सिर्फ भारत में सौर ऊर्जा के विकास में न सिर्फ अहम साबित होगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीकी को नई पहचान देने में भी काफी मदद करेगा।
• बिजली मंत्री आरके सिंह ने यहां बताया कि रिनीवल ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए के तहत दूसरी बैठक 07 से 09 दिसंबर, 2017 के बीच होगी। में शामिल होने के लिए अभी तक 41 देशों की सरकारों ने समझौता कर लिया है। वैसे इसमें शामिल होने के लिए कुल 125 देशों ने सहमति दिखाई है। सिंह के मुताबिक सभी 125 देशों के प्रतिनिधियों की तरफ से आगामी बैठक में हिस्सा लेंगे।
• यह न सिर्फ भारत को एक प्रमुख सौर ऊर्जा बाजार के तौर पर विकसित करने में मदद करेगा बल्कि भारत इसके जरिए सौर ऊर्जा के लिए जरुरी उपकरणों के मैन्यूफैक्चरिंग हब के तौर पर भी स्थापित होगा। पिछले वर्ष इस बारे में हुई बैठक में विभिन्न कंपनियों ने चार लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव किया था।
• भारत ने दिसंबर, 2015 में पेरिस में होने वाले जलवायु सम्मेलन के दौरान सोलर एलायंस बनाने का प्रस्ताव किया था और आनन फानन में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रास्वां ओलांद और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का समर्थन मिलने से यह संभव हो पाया था।
• इसके पहले तक किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन का कोई हेड क्वार्टर भारत में नहीं था। इस लिहाज से का महत्व बढ़ जाता है। सरकार की योजना यह है कि आने वाले दिनों में इसकी सालाना बैठक एनसीआर में आयोजित की जाए जिसमें दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया जाए। यह वैश्विक स्तर पर भारत की इमेज को बेहतर करने में मददगार साबित होगा साथ ही भारत को एक आकर्षक निवेश स्थल के तौर पर भी स्थापित करेगा।
• बिजली मंत्री सिंह ने बताया कि सरकार देश की ऊर्जा जरूरत को पूरा करने के लिए तमाम उपायों को आजमा रही है। योजना यह है कि वर्ष 2030 तक देश की कुल ऊर्जा जरुरत का 40 फीसद रिनीवल इनर्जी से पूरी की जाए। इसका एक बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा होगा।
• अंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस की दूसरी निवेश बैठक दिसंबर में
• पीएम मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति मैकरॉन करेंगे शिरकत

4. अमेरिका ने यूनेस्को से अलग होने का किया एलान

• अमेरिका ने गुरुवार को एलान किया कि वह संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक व सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) से अलग हो जाएगा। अमेरिका ने यूनेस्को पर इजरायल विरोधी रुख रखने का आरोप लगाया है। अमेरिका का संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी से अलग होने का फैसला 31 दिसंबर 2018 से प्रभावी होगा। तब तक वह यूनेस्को का पूर्णकालिक सदस्य बना रहेगा।
• इससे फंड की कमी से जूझ रहे यूनेस्को की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। इस संगठन को दिए जाने वाले अमेरिकी फंड पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराजगी जताते रहेहैं। यूनेस्को को अमेरिका से हर साल आठ करोड़ डॉलर (करीब 520 करोड़ रुपये) की मदद मिलती है।
• यूनेस्को का मुख्यालय पेरिस में है। संयुक्त राष्ट्र का यह संगठन 1946 से काम कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रलय की प्रवक्ता हीथर नौअर्ट ने कहा, ‘यह फैसला हल्के में नहीं लिया गया है। यह अमेरिकी चिंताओं को जाहिर करता है कि इस संगठन में बुनियादी सुधार की जरूरत है।’
• उन्होंने बताया कि इस बारे में यूनेस्को महासचिव को सूचित कर दिया गया है।1उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने साल 2011 में फलस्तीन को यूनेस्को का पूर्णकालिक सदस्य बनाने के फैसले के विरोध में इसके बजट में अपना योगदान नहीं दिया था।
• इससे पहले फॉरेन पॉलिसी पत्रिका ने भी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि 58 सदस्यीय यूनेस्को के नए महानिदेशक का चुनाव कर लिए जाने के बाद अमेरिका इससे अलग होने का एलान कर सकता है।
• यूनेस्को ने जताया अफसोस : यूनेस्को ने अमेरिका के अलग होने के फैसले पर खेद जताया है। यूनेस्को महासचिव एरिना बोकोवा ने बयान में कहा, ‘अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन से आधिकारिक सूचना मिली है। अमेरिका का यूनेस्को से अलग होने का फैसला अफसोसजनक है।’

5. चीन में भारत के अगले राजदूत होंगे गौतम बंबावले

• पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त गौतम बंबावले को चीन में देश का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। विदेश मंत्रलय ने गुरुवार रात इस आशय की घोषणा की। 1984 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी बंबावले शीघ्र ही अपना नया प्रभार ग्रहण करेंगे।
• चीन में वह विजय गोखले की जगह लेंगे।1भारत-चीन संबंध के गहरे जानकार बंबावले ने विदेशी भाषा के रूप में चीन की भाषा मंदारिन का अध्ययन किया। 1985 से 1991 के बीच वह हांग कांग और बीजिंग में रहे। विदेश मंत्रलय में वह चीन के लिए पहले डेस्क अधिकारी रह चुके हैं और अमेरिका एवं कनाडा के साथ संबंधों के लिए जवाबदेह अमेरिकाज डिवीजन में निदेशक भी रहे हैं।
• बंबावले बीजिंग में भारतीय दतूावास के उप प्रमुख के रूप में काम कर चुके हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब भारत और चीन डोकलाम विवाद पर शांति बनाने के प्रयास में जुटे हैं।

6. कोर्ट में साक्ष्य नहीं बन सकती संसदीय समिति की रिपोर्ट

• सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस सवाल पर सुनवाई आरंभ की कि क्या न्यायिक प्रक्रिया के दौरान संसदीय समिति की रिपोर्ट पर भरोसा किया जा सकता है अथवा उसका हवाला दिया जा सकता है? वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट से कहा कि वह संसदीय समिति की रिपोर्ट पर गौर कर सकता है, लेकिन उसे साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल नहीं कर सकता या उस पर कार्रवाई के लिए संसद को निर्देश नहीं दे सकता।
• मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति एके सीकरी, एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की संवैधानिक पीठ वैक्सीन के एक मामले में सुनवाई कर रही है। 1पीठ द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में साल्वे ने कहा कि संसदीय समिति की रिपोर्ट में उपलब्ध आम सूचना का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
• साल्वे ने कोर्ट से कहा कि हर संवैधानिक संस्था अन्य समान संवैधानिक संस्थाओं से अलग काम करती है। उन्होंने कहा कि संस्था ही खुद को नियंत्रित और नियमित करती है। किसी संस्था का हर कार्य संस्था द्वारा ही नियमित होना चाहिए, चाहे वह कैग हो या चुनाव आयोग। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्र कार्यप्रणाली को देश की लोकतांत्रिक प्रणाली का आदर्श बताया।
• उन्होंने कहा कि अगर कोई संसद से झूठ बोलता है तो संसद ही उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई पर फैसला करेगी। साल्वे सर्वाइकल कैंसर की एचपीवी वैक्सीन बनाने वाली कंपनी एमएसडी फार्मास्यूटिकल्स की तरफ से कोर्ट के समक्ष पेश हुए। वैक्सीन को मंजूरी के संबंध में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा कार्रवाई से जुड़े मामले को शीर्ष अदालत ने पांच अप्रैल 2017 को संवैधानिक पीठ के पास भेजने का आदेश दिया था।
• यह है मामला : वैक्सीन का मामला 2012 में सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत के समक्ष आया था। ये ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से जुड़ा है। मामला तब सामने आया जब मरीजों की मौत और उन्हें मुआवजा देने की बात उठी। सुनवाई के दौरान अदालत का ध्यान संसदीय समिति की 2014 की रिपोर्ट की तरफ आकृष्ट किया गया। तब अदालत ने राज्य सरकारों से इस पर पक्ष रखने को कहा था।
•  केंद्र व राज्यों ने अपने जवाब में कहा था कि दवा जरूरी है। इसके नकारात्मक प्रभाव के मद्देनजर कदम उठाए जा रहे हैं।

7. दुष्कर्म पीड़िताओं के लिए बने मुआवजा नीति

• सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल लीगल सर्विस अथारिटी (नालसा) को दुष्कर्म पीड़िताओं और एसिड (तेजाब) हमला पीड़िताओं को मुआवजा दिए जाने के बारे में नीति तैयार करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा कोर्ट महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट और एप आधारित टैक्सी सर्विस को नियमित किए जाने पर भी विचार करेगा। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस बारे में सुझाव मांगे हैं।
• ये निर्देश न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने महिलाओं की सुरक्षा और दुष्कर्म पीड़िताओं को मुआवजे के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए दिए। कोर्ट ने नालसा को निर्देश दिया है कि वह चार-पांच सदस्यों की एक कमेटी गठित करे।
• यह कमेटी दुष्कर्म पीड़िताओं और एसिड हमला पीड़िताओं को मुआवजे के बारे में मॉडल रूल तैयार करे। कोर्ट ने कहा कि इस कमेटी में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष या उनके द्वारा नामित सदस्य भी शामिल होगा। कमेटी मुआवजा नीति पर अपनी रिपोर्ट 31 दिसंबर तक कोर्ट में दाखिल कर देगी। कोर्ट ने कहा कि नियम सभी राज्यों के लिए एक समान होने चाहिए।
• इससे पहले मामले में न्यायालय की मददगार वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि पुलिस और राज्य सरकारों को पीड़िताओं को सुरक्षा और संरक्षण देने का आदेश दिया जाए, क्योंकि कई बार पीड़िताएं अभियुक्तों के दबाव में आकर अपने आरोपों से मुकर जाती हैं। उन्होंने कहा कि पीड़िताओं को मुआवजे की मौजूदा नीति स्पष्ट नहीं हैं।

8. औद्योगिक उत्पादन ऊंचाई पर जबकि खुदरा महंगाई स्थिर

• अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के विकास दर के घटते अनुमानों के बीच सरकार के लिए राहत की खबर है। अर्थव्यवस्था के ताजा आंकड़ों में कारखानों में रफ्तार बढ़ी है तो महंगाई की दर भी स्थिर बनी हुई है।
• अगस्त में कारखानों में उत्पादन यानी आइआइपी की वृद्धि दर 4.3 फीसद पर पहुंच गई है जो बीते नौ महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर में खुदरा महंगाई की दर भी 3.28 फीसद पर यथावत रही है।
• बीते कुछ दिनों से एडीबी, आइएमएफ और विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से देश की आर्थिक विकास दर के अनुमान को घटाने की खबरें आ रही हैं। इनके चलते सरकार पर अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज करने के उपाय करने का दबाव भी बना हुआ है।
• बुधवार को ही प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने विकास की रफ्तार बढ़ाने वाले दस मुद्दों की पहचान की है। हालांकि कल-कारखानों की रफ्तार बढ़ने के संकेत अगस्त में आठों बुनियादी क्षेत्रों के प्रदर्शन से ही मिल गए थे। इस महीने बुनियादी क्षेत्र की विकास दर भी 4.9 फीसद पर रही थी।
• आठों बुनियादी उद्योगों की हिस्सेदारी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 40.2 फीसद की है। 1अगस्त में कारखानों के कुल उत्पादन (आइआइपी) में वृद्धि के बावजूद मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार नहीं बढ़ पायी है।
• इसका उत्पादन पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले कम रहा है। इस महीने मैन्यूफैक्चरिंग की विकास दर 3.1 फीसद रही। मैन्यूफैक्चरिंग का आइआइपी में योगदान 77.63 फीसद है। लेकिन खनन और इलेक्टिसिटी सेक्टर के उत्पादन में तेज वृद्धि दर्ज की गई है।
• खनन का उत्पादन अगस्त में 9.4 फीसद और बिजली का उत्पादन 8.3 फीसद बढ़ा। लेकिन कंज्यूमर ड्यूरेबल की वृद्धि दर 1.6 फीसद और नॉन ड्यूरेबल सेक्टर की वृद्धि दर 6.9 फीसद रही।
• घरेलू अर्थव्यवस्था में निजी निवेश और विस्तार का प्रतीक माने जाने वाले कैपिटल गुड्स क्षेत्र की विकास दर अगस्त में 5.4 फीसद रही।
• महंगाई के मोर्चे पर सितंबर का आंकड़ा राहत लेकर आया है। सब्जियों और अनाज के दामों में मामूली कमी के चलते खुदरा महंगाई की दर इस महीने 3.28 फीसद के स्तर पर बनी रही। सितंबर 2016 में खुदरा महंगाई की दर 4.39 फीसद रही थी।
• अगस्त की खुदरा महंगाई दर को भी केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने संशोधित कर 3.36 फीसद से 3.28 फीसद कर दिया है। सीएसओ के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में सब्जियों के दामों में मात्र 3.92 फीसद की वृद्धि हुई। जबकि अगस्त में इनकी कीमतों में 9.97 फीसद की दर से वृद्धि हुई थी।
• दालों की कीमतों में भी लगातार गिरावट हो रही है। इस महीने इसकी कीमतों में वृद्धि की रफ्तार शून्य से 22.51 फीसद नीचे रही।

9. एम्फीबियन विमानों के शिड्यूल परिचालन की तैयारी
• सरकार पानी और जमीन दोनों जगहों पर उतरने और उड़ान भरने की खूबी वाले एम्फीबियन विमानों के शिड्यूल परिचालन को मंजूरी देने पर विचार कर रही है। हालाँकि, सस्ती हवाई यात्रा वाली सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना‘‘उड़ान’ के दूसरे चरण के लिए इन विमानों के परिचालन की अनुमति मिलने की संभावना नहीं है।
• नागरिक उड्डयन मांलय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ विमान सेवा प्रदाता कंपनियों ने एम्फीबियन विमानों के परिचालन में रुचि दिखाई है। इसे देखते हुये मंत्रालय में पिछले सप्ताह एक बैठक हुई जिसमें इनका परिचालन शुरू करने के उद्देश्य से फ्रेमवर्क की समीक्षा की गई।
• किफायती विमान सेवा कंपनी स्पाइसजेट ने पिछले सप्ताह ही बताया था कि वह ‘‘उड़ान’ के तहत सुदूर इलाकों में 10 से 14 सीटों वाले एम्फीबियन विमानों के परिचालन के अवसर तलाश रही है।
• उसने नागपुर और गुवाहाटी में इनकी कोडियेक क्वेस्ट विमानों की डेमो फ्लाइट भी की है जिसे वह जापानी कंपनी सेटॉची होल्डिंग्स से खरीदेगी।

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