Saturday, October 28, 2017

दैनिक समसामयिकी 22 Oct 2017(Sunday)

1.जापानी पीएम शिंजो एबी फिर लहरा सकते जीत का परचम

• जापान में रविवार को आम चुनाव होंगे। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों की मानें तो प्रधानमंत्री शिंजो एबी दोबारा जीत का परचम लहरा सकते हैं। उनकी शानदार वापसी होगी। वह संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में दो तिहाई बहुमत पा सकते हैं।
• एबी की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी नीत गठबंधन 465 में से 300 से ऊपर सीटें पा सकता है। जापानी मतदाता भले एबी को बहुत पसंद नहीं करते हों लेकिन वह उनकी प्रशासनिक व कूटनीतिक क्षमता के कायल हैं।
• एबी के विरोध में चुनावी मैदान में उतरे विपक्षी नेता राष्ट्रीय राजनीति में लगभग अनुभवहीन हैं। ऐसे में जब उत्तर कोरिया का संकट सामने हो तो मतदाता किसी प्रकार का खतरा लेने के मूड में नहीं हैं।
• 51 वर्षीय महिला ने कहा, ‘जापान फिलहाल उत्तर कोरिया से गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। इस स्थिति से शिंजो एबी ने पूर्व प्रधानमंत्रियों के मुकाबले शानदार तरीके से निपटा है।’
• जापान में मुकाबला पीएम शिंजो एबी की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी व कोमीटो पार्टी के गठबंधन और टोक्यो की गवर्नर यूरिको कोइके के दल ‘पार्टी ऑफ होप’ के बीच है। ताजा सर्वे में एबी को 70 फीसदी सीटें तक मिलने के आसार जताए गए हैं। वहीं, कोइके की पार्टी 55 सीटों पर सिमट सकती है।
• यह सर्वे न्यूज एजेंसी क्योडो ने 15 से 17 अक्टूबर के बीच कराया। ज्ञात हो कि 2014 में एबी की पार्टी के गठबंधन को 325 सीटें मिली थीं। जापानी प्रधानमंत्री ने गत सितंबर में संसद भंग कर तय समय से साल भर पहले चुनाव कराने का एलान किया था।
• मध्यावधि चुनाव की घोषणा के तुंरत बाद हुए सर्वे में एबी को 40 सीटों के नुकसान तक की बातें कही गई थी। अब जापान के एक अखबार योमिसूयरी ने तो एबी की पार्टी को बिना सहयोगी दल के ही बहुमत प्राप्त कर लेने की बात कही है।

2. बैंक खातों को आधार से जोड़ना अनिवार्य : लिंक न कराने पर बंद कर दिया जाएगा खाते का परिचालन : रिजर्व बैंक

• रिजर्व बैंक ने शनिवार को कहा कि बैंक खातों को व्यक्ति की जैविक पहचान वाली आधार संख्या के साथ जोड़ना अनिवार्य है। बैंकिंग विनियामक का यह बयान ऐसे समय आया है जब कि मीडिया के कुछ हलकों में खबर थी कि बैंक खाते को आधार से जोड़ना अनिवार्य नहीं है।
• मीडिया रिपोर्टों  में सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत प्राप्त उत्तर का हवाला देकर कहा गया था कि भारतीय रिजर्व बैंक ने लोगों के बैंक खातों को उनके आधार से अनिवार्य तौर पर जोड़ने का कोई आदेश नहीं दिया है।
• रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा, रिजर्व बैंक यह स्पष्ट करता है कि एक जून 2017 को आधिकारिक गजट में प्रकाशित मनी लांडरिंग रोकथाम ( अभिलेखों का अनुरक्षण) दूसरे संशोधित विनियम के नियमों के तहत बैंक खातों को आधार से जोड़ना अनिवार्य है।
• उसने आगे कहा कि ये नियम सांविधिक हैं और ऐसे में बैंकों को बिना कोई अन्य निर्देश की प्रतीक्षा किए इसपर अमल करना है। सरकार ने बैंक खातों को खोलने तथा 50 हजार रपए या इससे अधिक के लेन-देन के लिए इस साल जून में आधार को अनिवार्य कर दिया था।
• मौजूदा बैंक खातों को भी 31 दिसंबर से पहले आधार से जोड़ देने का निर्देश दिया गया है। ऐसा नहीं कर पाने पर बैंक खाते का परिचालन बंद कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2017 के बजट में एक से अधिक पैन कार्ड रख कर करों की चोरी करने वाले लोगों पर वैिक कसने के लिए पैन के साथ आधार जोड़ना अनिवार्य किया था।

3. टाटा स्टील-थाइसेन क्रुप के विलय पर विरोध बढ़ा

• टाटा स्टील और जर्मन कंपनी थाइसेनक्रुप के विलय पर विरोध की आवाज तेज होने लगी है। दोनों कंपनियों ने यूरोप में कारोबार के लिए बराबर हिस्सेदारी के साथ संयुक्त उद्यम लगाने का समझौता किया है। टाटा स्टील की नीदरलैंड इकाई (टीएसएन) के कर्मचारियों के एक संगठन ने इस विलय का विरोध किया है।
• टीएसएन के सेंट्रल वर्क्सब काउंसिल (सीडब्ल्यूसी) ने कहा कि विलय को लेकर चल रही बातचीत में उसे शामिल नहीं किया जा रहा है। इस विलय से नीदरलैंड में कर्मचारियों को नौकरी से हटाए जाने की भी आशंका है। हालांकि टाटा स्टील के यूरोपीय कारोबार के सीईओ हैंस फिशर ने आश्वासन दिया कि सौदे पर आगे बढ़ते हुए सभी संबंधित पक्षों की राय लेने में समुचित प्रक्रिया का पालन होगा। उन्होंने कहा, ‘कंपनी ने कई बैठकें की हैं। यूरोपीय वर्क्सो काउंसिल, सीडब्ल्यूसी और ब्रिटिश स्टील कमेटी समेत कंपनी के निदेशक बोर्ड से चर्चा हुई है। संयुक्त उद्यम में हमें सबके सहयोग की जरूरत होगी, इसीलिए ये चर्चाएं हमारी प्राथमिकता में हैं।’
• उधर सीडब्ल्यूसी का कहना है कि प्रस्तावित नई कंपनी के वित्तपोषण और कारोबारी जिम्मेदारियों के बारे में स्पष्टता नहीं है। अभी जो संकेत मिल रहे हैं, उससे लगता है कि सौदा शायद ही टीएसएन और इसके कर्मचारियों के लिए अच्छा साबित हो।
• सीडब्ल्यूसी ने कंपनी के निदेशक और सुपरवाइजरी बोर्ड को सूचित किया है कि वह सौदे के समर्थन में नहीं है।
• जर्मनी के स्टील उद्योग के कामगार भी संयुक्त उपक्रम के पक्ष में नहीं हैं। संयुक्त उपक्रम की घोषणा के बाद पिछले महीने वहां हजारों कामगार विलय के विरोध में सड़क पर उतर आए थे।
• विलय से 4,000 नौकरियां जाने की आशंका है। टाटा स्टील ने 20 सितंबर को जर्मन स्टील कंपनी थाइसेनक्रुप के साथ यूरोपीय कारोबार के विलय के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया था।

4. भारत में पांच साल में नहीं बढ़ा मीथेन का उत्सर्जन

• शोधकर्ताओं के एक दल ने निष्कर्ष निकाला है कि भारत में 2010 और 2015 के बीच मीथेन उत्सर्जन के स्तर में कोई वृद्धि नहीं हुई है। यह पहला अवसर है जब भारत में मीथेन उत्सर्जन का स्वतंत्र रूप से आकलन किया गया है। भारत में 2010 और 2015 के बीच हुए मीथेन उत्सर्जन की वास्तविक मात्र का पता लगाने के लिए रिसर्चरों ने उपग्रह और विमान से किए गए परीक्षणों के अलावा जमीन पर किए गए अध्ययन का भी उपयोग किया।
• इस अवधि में औसत उत्सर्जन उतना ही था जितना भारत ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के फ्रेमवर्क कन्वेंशन को अधिकृत रूप से सूचित किया था। 1भारत के मीथेन उत्सर्जन में गायों और भैंसों जैसे जुगाली करने वाले पशुओं, कचरे और जीवाश्म आधारित ईंधनों का समान रूप से योगदान है।
• जुगाली करने वाले पशु अपना भोजन पचाने के लिए फर्मेटेशन (खमीर उठने की प्रक्रिया) का प्रयोग करते हैं। इस दौरान मीथेन गैस निकलती है, जो वायुमंडल में पहुंच जाती है। मीथेन के अन्य स्नोतों में धान के खेत और बायोमास अथवा कार्बनिक कचरे को जलाना शामिल है।
•  धान के खेतों और आद्रभूमि में गीली मिट्टी तथा पौधों और जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जो पानी की निरंतर मौजूदगी में पनपती हैं। पानी की अत्यधिक आवश्यकता और गर्म मौसम के कारण ऐसे स्थान मीथेन के बहुत बड़े स्नोत बन जाते हैं।
• सर्दियों में लोग खुद को गर्म रखने के लिए ज्यादा जीवाश्म-ईंधन जलाते हैं। इससे भी मीथेन उत्सर्जन बढ़ता है। अध्ययन से यह भी पता चलता है कि जून-सितंबर और फरवरी-मार्च में उत्सर्जन का स्तर बढ़ जाता है। दुनिया में जुगाली करने वाले पशुओं की सर्वाधिक आबादी भारत में है, हालांकि कृषि मंत्रलय ने 2006 और 2014 के दौरान जुगाली करने वाले पशुओं की आबादी में तीन प्रतिशत गिरावट की सूचना दी थी। इसका अर्थ यह हुआ कि इस क्षेत्र से उत्सर्जन कम हुआ है।
• धान की खेती के तौर-तरीकों में बदलाव करके तथा विभिन्न उर्वरकों का प्रयोग करके मीथेन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। सर्दियों में गर्म रखने के वैकल्पिक उपायों से भी मदद मिली है। इन सब का नतीजा यह होगा कि उत्सर्जन नहीं बढ़ेगा।
• अध्ययन के नतीजे नेचर कम्युनिकेशन पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। ध्यान रहे कि मीथेन कार्बन डाईऑक्साइड की तरह ही एक ग्रीनहाउस गैस है जो ग्लोबल वार्मिग को बढ़ाती है। कार्बन डाईऑक्साइड जहां वायुमंडल में 100 वर्ष तक रहती है वहीं मीथेन का असर नौ वर्ष तक रहता है। इसी वजह से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के लिए मीथेन को लक्षित किया जाता है।

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