Friday, September 1, 2017

इसरो ने पीआरएलवी सी 39 से आईआरएनएसएस-1 एच का लॉंच किया

September 01, 2017 0
इसरो ने पीआरएलवी सी 39 से आईआरएनएसएस-1 एच का लॉंच किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने हाल ही में अपने नेविगेशन उपग्रह आईआरएनएसएस -1 एच की शुरुआत की।
      यह उपग्रह श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर से पीएसएलवी सी 39 से लॉंच किया गया।
     उपग्रह आईआरएनएसएस -1 एच स्वदेशी नेवीगेशन तंत्र का एक हिस्सा है जिसे 'नेविइक' कहा जाता है, जिसे शुरू में सात उपग्रहों का नक्षत्र बनाने की योजना थी।
     रूबिडीयम जिसे श्रृंखला में उपग्रह के परमाणु घड़ियों के रूप में आईआरएनएसएस-1 ए कहा जाता है, उसमें खराबी आ गई है।
     एनएवीसी सिस्टम जीपीएस सेवा के बराबर है, पूरे भारत में और सभी तरफ से लगभग 1500 किलोमीटर की सीमाओं पर इसके पदचिडह्न हैं।
     यह उपयोगकर्ता एजेंसियों को सड़क और समुद्र पर अपने वाहनों की आवाजाही की योजना और निगरानी करने में सहायता करता है।
      यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमाओं पर पहुंचते समय मछुआरों को चेतावनी दे सकता है और सार्वजनिक रूप से उन पतों की पहचान करने में मदद कर सकता है जो उनके लिए आवश्यक हैं।
आईआरएनएसएस

         भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) नेविक (भारतीय नक्षत्र के साथ नेविगेशन) के परिचालन नाम के साथ एक स्वायत्त क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है, जो सटीक वास्तविक समय स्थिति और समय सेवाएं प्रदान करती है।
     यह भारत को और इसके चारों ओर 1,500 किलोमीटर तक फैले क्षेत्र को कवर करता है, और आगे के विस्तार की योजना बनाता है। वर्तमान में प्रणाली में 7 उपग्रहों का एक नक्षत्र होता है, साथ ही धरती पर दो अतिरिक्त उपग्रह हैं।
    नक्षत्र में से सात उपग्रहों में से तीन जियोस्टेशनरी कक्षा (जीईओ) में स्थित हैं और चार झुकाव भू-सिंक्रोनस कक्षा (जीएसओ) में हैं।
    ये उपग्रह हैं- (1) आईआरएनएसएस -1 ए (2) आईआरएनएसएस -1 बी (3) आईआरएनएसएस -1 सी (4) आईआरएनएसएस -1 डी (5) आईआरएनएसएस -1 ई (6) आईआरएनएसएस -1 एफ (7) आईआरएनएसएस -1 जी (8) आईआरएनएसएस -1 एच (आईआरएनएसएस -1 ए की जगह के लिए)

स्रोत- आकाशवाणी

इसरो ने उद्योग के लिए उपग्रह बनाने के रास्ते खोले

September 01, 2017 0
इसरो ने उद्योग के लिए उपग्रह बनाने के रास्ते खोले

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने घरेलू संस्थाओं के लिए दरवाजा खोल दिया है जो इसे 2018 के अंत तक एक साल में 18 अंतरिक्ष यान बना सकता है।
     बेंगलुरु स्थित इसरो सैटेलाइट सेंटर (आईएसएसी) ने अभी तक लगभग 90 भारतीय अंतरिक्ष-क्राफ्ट पेश किए हैं, इस अवसर के लिए आवेदन करने के लिए एकल या संयुक्त उद्योगों को आमंत्रित किया है।
     भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन वर्तमान में चार श्रेणियों के अंतरिक्ष यान बनाता है - संचार, रिमोट सेंसिंग, नेविगेशन और वैज्ञानिक मिशन – और यह 1000 किलो से 4,000 किग्रा के तीन आकार में होते हैं।
     यह एक भारतीय अंतरिक्ष उद्योग के निर्माण की दिशा में आईएसएसी का पहला कदम है।

स्रोत- द हिंदू

चीन ने ब्रिक्स के विस्तार की योजना का परित्याग किया

September 01, 2017 0
चीन ने ब्रिक्स के विस्तार की योजना का परित्याग किया

चीन ने स्थायी ब्रिक्स प्लस सुविधा बनाने की अपनी कोशिश को निरस्त कर दिया
      अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, चीन के ज़ियामेन शहर में 3 सितंबर और 4 सितंबर को निर्धारित है।
     चीन ने भी पांच गैर-ब्रिक्स देशों को ज़ियामेन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।
      यह थाईलैंड, मिस्र, ताजिकिस्तान, मैक्सिको और गिनी हैं, जो कि पांच अलग-अलग महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह देश चीन के वन बेल्ट वन रोड (ओबोर) कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

स्रोत- इकोनॉमिक टाइम्स

01 September 2017(Friday)

September 01, 2017 0
01 September 2017(Friday)

दैनिक समसामयिकी

1.कालेधन पर लगाम को भारत  से सहयोग करेगा स्विटजरलैंड

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विटजरलैंड की राष्ट्रपति डोरिस लिउथार्ड ने बृहस्पतिवार को यहां द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विविध विषयों पर व्यापक र्चचा की। इसके साथ ही कर अपवंचन और कालाधन पर द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा बनाने के लिए सहयोग बढ़ाने के रास्तों पर र्चचा की गई। दोनों देशों के बीच रेलवे के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग समेत दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति डोरिस लिउथार्ड के साथ बातचीत के बाद कहा, हमारे बीच अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथा द्विपक्षीय मुद्दों पर सार्थक बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड ने कर चोरी और काले धन से लड़ाई में सहयोग और बढ़ाया।
• मोदी ने परमाणु आपूत्तर्िकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के प्रवेश को समर्थन देने पर स्विस राष्ट्रपति का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंतण्रव्यवस्था (एमटीसीआर) की सदस्यता के लिए भारत का समर्थन करने के लिए हम स्विटजरलैंड के आभारी हैं।
•  प्रधानमंत्री ने लिउथार्ड के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, हमारे बीच अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर सार्थक र्चचा हुई। वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता को विश्वव्यापी चिंता का विषय करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में स्विटजरलैंड के साथ हमारा द्विपक्षीय सहयोग जारी रहेगा।
• लिउथार्ड ने उम्मीद जाहिर की कि स्विटजरलैंड की संसद इस वर्ष के अंत तक सूचनाओं के स्वत: आदान प्रदान पर कानून को मंजूरी प्रदान कर देगी। लिउर्थड का भारत आने के बाद बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।
• इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मौजूद थे। स्विस राष्ट्रपति की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान दोनों देश कारोबार, निवेश एवं आर्थिक विषयों समेत द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
• भारत और स्विटजरलैंड के बीच मैत्री संधि की 70वीं वर्षगांठ पर स्विस राष्ट्रपति डोरिस लिउर्थड भारत की यात्रा पर आई हैं और इस दौरान भारत स्विस मित्रता के 70 साल : मन के तार जोड़ने और भविष्य को प्रेरित करने वाला रिश्ता विषयक कई कार्यक्रमों को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।

2. हिन्द महासागर की सुरक्षा करें सदस्य राष्ट्र: सुषमा

• विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि हंिदू महासागर क्षेत्र के स्थायित्व के लिए इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सदस्य राष्ट्रों पर है। समूचे विश्व की आर्थिक प्रगति के लिए इस क्षेत्र में शांति की बेहद ज्यादा जरूरत है। उनका इशारा साफ तौर पर चीन की घुसपैठ की तरफ था।
• श्रीलंका के कोलंबो में दो दिवसीय भारतीय उप महाद्वीप की कांफ्रेंस में वह बोल रही थीं। सुषमा ने कहा कि भारतीय समुद्री क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाले सभी देश वैश्विक नियमों का पालन करें। यह एक बेहद जटिल क्षेत्र है, लेकिन विश्व की तरक्की में क्षेत्र का योगदान अहम है। इसके पानी से हर साल एक लाख से ज्यादा जहाज गुजरते हैं।
• उनका कहना था कि भारत की समुद्री सीमा 75 सौ किमी लंबी है। भारत का 90 फीसद कारोबार पानी के जरिये ही होता है। गौरतलब है कि अफ्रीका में बंदरगाह स्थापित करने के बाद चीन पाकिस्तान के ग्वादर के साथ श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र में अपनी घुसपैठ कर रहा है।
• हिन्द  महासागर में चीन के जहाज बीते कुछ समय से ज्यादा दिखने लगे हैं। सुषमा का कहना था कि पीएम नरेंद्र मोदी मानते हैं कि सागर का मतलब क्षेत्र में रहने वाले सभी देशों के विकास को लेकर है। वह मानते हैं कि पड़ोसी देशों से संपर्क बेहतर होगा तो विकास को पंख लग जाएंगे।
• इस सम्मेलन का आयोजन इंडिया फाउंडेशन, सिंगापुर स्थित एस राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज और कोलंबो स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल स्टडीज कर रहे हैं। इसमें लगभग 35 देश भाग ले रहे हैं। इसका विषय है कि हिंद महासागर में दोनों देशों के लिए क्या-क्या संभावनाएं हो सकती हैं। दोनों देशों के लिए समुद्र में क्या-क्या हो सकता है और किस तरीके से भारत और श्रीलंका शांति, समृद्धि हासिल कर सकते हैं।
• इसका पहला सत्र सितंबर 2016 में सिंगापुर में हुआ था। 1श्रीलंका के राष्ट्रपति से मिलीं : विदेश मंत्री ने श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे से गुरुवार को मुलाकात की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों को लेकर दोनों में बात हुई। इस दौरान स्वराज ने सिंगापुर के अपने समकक्ष से भी मुलाकात की।

3. अमीर देशों के खिलाफ भारत-चीन

• किसानों को अमीर देशों में कृषि उत्पादों पर मिल रही भारी भरकम सब्सिडी के खिलाफ भारत और चीन ने संयुक्त मोर्चा खोल दिया है। दोनों देशों ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) इस तरह की सब्सिडी को खत्म करने की मांग करने का प्रस्ताव रखा है।
• विकासशील देशों में किसानों को दी जा रही सब्सिडी को खत्म करने की अमीर देशों की नीति के खिलाफ मोर्चा लेते हुए भारत और चीन ने इसे भेदभाव वाली नीति बताया है। वाणिज्य मंत्रलय ने गुरुवार को यह जानकारी दी।1मंत्रलय की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारत और चीन ने संयुक्त रूप से पिछले महीने डब्ल्यूटीओ में एक प्रस्ताव रखा है।
•  इसमें विकसित देशों में किसानों को मिल रही सब्सिडी को खत्म करने की मांग की गई है। 18 जुलाई को दिए गए इस प्रस्ताव में कहा है कि विश्व व्यापार संगठन के कुछ सदस्य विकासशील देशों में गरीब किसानों को मिल रही सब्सिडी पर सवाल खड़े करते रहे हैं। जबकि वे अपने यहां किसानों को ‘एग्रीगेट मेजरमेंट ऑफ सपोर्ट’ (एएमसी) के नाम पर भारी मात्र में कृषि सब्सिडी दे रहे हैं।
• भारत और चीन ने विश्व व्यापार में असंतुलन पैदा करने वाली विकसित देशों के कृषि सब्सिडी के प्रारूप को समाप्त करने की मांग की है। दोनों देशों की तरफ से दिया गया यह संयुक्त प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिसंबर में ब्यूनस आयर्स में होने वाली डब्ल्यूटीओ की मंत्री स्तरीय बैठक होने वाली है।
• इस बैठक में दोनों देश अन्य विकासशील मुल्कों के समर्थन से इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी कर रहे हैं। विश्व व्यापार संगठन में फैसला लेने वाली यह सबसे बड़ी संस्था है। इस समिति की हर दो साल बाद बैठक होती है।
• साझा प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और कनाडा जैसे विकसित देशों में किसानों को निरंतर भारी भरकम सब्सिडी दी जा रही है। जबकि विकासशील देशों में किसानों को सब्सिडी के लिए डब्ल्यूटीओ ने काफी ऊंची सीमा तय कर रखी है। ये देश सालाना 160 अरब डॉलर तक की राशि अपने किसानों को सब्सिडी के तौर पर मुहैया करा रहे हैं। भारत जैसे देश में सालाना एक किसान को 260 डॉलर की ही राशि सब्सिडी के तौर पर उपलब्ध कराई जाती है।
• भारत और चीन जैसे अधिकांश विकासशील देशों को डब्ल्यूटीओ के तहत एएमसी की सुविधा नहीं दी गई है। कई विकसित देशों में उत्पाद की कुल लागत का 50 फीसद और कई मामलों में तो 100 प्रतिशत तक सब्सिडी के तौर पर उपलब्ध कराया जाता है। इसके उलट विकासशील देशों पर इसे 10 फीसद के दायरे में रखने की बाध्यता है।

4. आर्थिक विकास की धीमी पड़ी रफ्तार

• देश की आर्थिक विकास दर में नोटबंदी के बाद पहली बार तेज गिरावट आई है। वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 5.7 फीसद पर सिमट गई।
• पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 7.9 फीसद रही थी।केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा बृहस्पतिवार को जीडीपी के आंकड़े जारी किए जाने के बाद मुख्य सांख्यिकीविद टीसीए अनंत ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विनिर्माण गतिविधियों में सुस्ती आने से आर्थिक विकास पर असर पड़ा है। वर्ष 2016-17 की अंतिम तिमाही में जनवरी-मार्च के दौरान जीडीपी वृद्धि दर 6.1 फीसद रही थी।
• वर्ष 2016-17 में पूरे साल के दौरान विकास दर 7.1 फीसद रही थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अप्रैल-जून के दौरान विकास दर घटकर 5.7 फीसद पर आ गई जो इसी अवधि में चीन की 6.9 फीसद वृद्धि दर की तुलना में बहुत कम है।
• पिछले कुछ समय से भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था था लेकिन अब यह चीन से पिछड़ गया है।उन्होंने कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) 5.6 फीसद रहा है जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 7.6 फीसद रहा था।
• पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र का जीवीए घटकर 1.2 फीसद पर आ गया जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 10.7 फीसद रहा था। विनिर्माण जीवीए में कारपेट क्षेत्र की हिस्सेदारी 74 फीसद है।
• नोटबंदी के कारण विकास प्रभावित होने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 की दूसरी तिमाही में थोक मूल्य सूचकांक ऋणात्मक था और जबसे यह ऋणात्मक से निकल कर धनात्मक हुआ है तब से ही विकास दर में वृद्धि सुस्त पड़ी है।

5. निजी क्षेत्र की मदद से बने पहले सेटेलाइट की लांचिंग विफल

• पहली बार निजी क्षेत्र की मदद से बने भारत के अत्याधुनिक आठवें नेवीगेशन सेटेलाइट आइआरएनएसएस-1एच की लांचिंग विफल हो गई। गुरुवार शाम सात बजे सटीक उड़ान के बीस मिनट बाद सेटेलाइट को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने से ठीक पहले उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी सी-39 में तकनीकी खराबी आने से ऐसा हुआ।
• हीट शील्ड यान से अलग नहीं हो पाया। उपग्रह इसमें ही था। लिहाजा उसका प्रक्षेपण नहीं हो पाया।
• भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने लांच मिशन की असफलता की जानकारी देते हुए इसे हादसे की संज्ञा दी है।
• उनका कहना है, ‘लांच मिशन सफल नहीं हो पाया। हालांकि उपग्रह प्रक्षेपण यान के सभी सिस्टम बेहद अच्छे तरीके से काम कर रहे थे। लेकिन एक दुर्घटना हुई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उड़ान के बीस मिनट बाद हीट शील्ड यान से अलग नहीं हुआ। लिहाजा इसमें मौजूद नेवीगेशन सेटेलाइट प्रक्षेपण यान पीएसएलवी सी-39 के चौथे चरण में ही फंस कर रह गया।
• इसी चरण में यान उपग्रह को कक्षा में प्रक्षेपित करता है। ऐसा क्यों हुआ? हम इसका व्यापक विश्लेषण करेंगे।’
• उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी सी-39 ने गुरुवार शाम सात बजे 1425 किलोग्राम वजनी नेवीगेशन सेटेलाइट आइआरएनएसएस-1 एच को लेकर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सही तरीके से उड़ान भरी। शुरू में तो सब कुछ ठीक-ठाक रहा, लेकिन बीस मिनट बाद ही बुरी खबर आई कि हीट शील्ड यान से अलग नहीं हुआ।

6. फलों, सब्जियों और मसालों की रिकार्ड पैदावार का अनुमान

• देश में वर्ष 2016-17 में बागवानी की रिकार्ड 30 करोड़ टन पैदावार होने का अनुमान है। बागवानी फसलों की खेती का क्षेत्र दो करोड़ 45 लाख हेक्टेयर से बढ़कर दो करोड़ 51 लाख हेक्टेयर हो गया है।कृषि मांलय की ओर से यहां जारी तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार चालू वर्ष के दौरान फलों का रिकार्ड नौ करोड़ 37 लाख टन, सब्जियों का 17 करोड़ 60 लाख टन और फूलों का उत्पादन 23 लाख टन होने का अनुमान है।
• इसके  साथ ही मसालों का रिकार्ड 82 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है।पिछले वर्ष की तुलना में बागवानी फसलों के उत्पादन में 4.8 प्रतिशत वृद्धि होने की उम्मीद है।
• फलों के उत्पादन में 3.9 प्रतिशत तथा सब्जियों के उत्पादन में 4.2 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। प्याज की पैदावार में 3.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ही इसका उत्पादन 2.17 करोड़ टन होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य हैं।
• गत वर्ष आलू का 4.34 करोड़ टन उत्पादन हुआ था जो इस बार बढकर 4.82 करोड़ टन हो गया है। पिछले साल की तुलना में इसके उत्पादन में 11 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
• उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, पंजाब, गुजरात और मध्य प्रदेश प्रमुख आलू उत्पादक राज्य है।

7. जीएसटी में ई-वे बिल के नियमों की अधिसूचना जारी

• वित्त मंत्रालय  ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत ई-वे बिल से जुड़े नियमों को अधिसूचित कर दिया है। अलबत्ता अभी इसके लागू करने की तारीख तय नहीं की गई है। इसे अमल में लाने के लिए अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी। हालांकि सूत्रों की मानें तो ई-वे बिल को पहली अक्टूबर से लागू किया जाना लगभग तय है।
• जीएसटी प्रणाली में माल के परिवहन से पहले इसका पहले से रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। ई-वे बिल से फल-सब्जियों, अनाज, मांस, ब्रेड, दही, किताबों और ज्वैलरी को छूट दी गई है। यानी इन उत्पादों की ढुलाई के लिए कोई भी जानकारी ई-वे बिल के जरिये नहीं देनी होगी। 1सरकार ने अधिसूचना के साथ जीएसटी में माल के परिवहन का फ्रेमवर्क तय कर दिया है।
• अधिसूचना के मुताबिक 50 हजार रुपये से ज्यादा के माल को भेजने के पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर इलेक्ट्रॉनिक बिल (ई-वे बिल) लेना जरूरी होगा। राज्य के भीतर दस किलोमीटर की दूरी तक माल की ढुलाई के लिए ई-वे बिल की जरूरत नहीं होगी।
• ई-वे बिल के प्रावधानों को वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल पांच अगस्त की बैठक में मंजूरी दे चुकी है। 1जीएसटी नेटवर्क पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद ई-वे जनरेट होगा। यह दूरी के आधार पर एक से 20 दिन तक के लिए मान्य होगा।
• एक दिन की वैधता सौ किमी तक की ढुलाई के लिए होगी। फल-सब्जियों, अनाज, मांस, ब्रेड, दही, किताबें, करेंसी, ज्वैलरी, खादी, कच्चा रेशम, राष्ट्रीय ध्वज, काजल, शहरी कचरा, पूजा सामग्री, एलपीजी, किरॉसिन और करेंसी को इस ई-वे बिल से छूट दी गई है।
• कस्टम मंजूरी के लिए बंदरगाह, हवाई अड्डे, एयर कार्गो कॉम्पलेक्स या लैंड कस्टम स्टेशन से इनलैंड कंटेनर डिपो अथवा कंटेनर फ्रेट स्टेशन तक के माल परिवहन पर ई-वे बिल के प्रावधान लागू नहीं होंगे।

8. राजीव महर्षि नए कैग नियुक्त

• पूर्व केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि को देश का नया नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) और पूर्व आईएएस अधिकारी सुनील अरोड़ा को नया चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है। महर्षि बुधवार को ही सेवानिवृत्त हुए हैं। वह शशिकांत शर्मा का स्थान लेंगे।
• इसी तरह, वरिष्ठ नौकरशाह राजीव कुमार को वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग का सचिव और अनीता कारवल को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है।
• पीएम मोदी की संस्तुति पर राष्ट्रपति रामनाथ कोबिंद  ने महर्षि की नियुक्ति को स्वीकृति दी है। उनका कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की उम्र, जो भी पहले होगा, की अवधि के लिए की गई है।
• चुनाव आयुक्त के तौर पर सुनील अरोड़ा की नियुक्ति को लेकर कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया है कि 61 साल के अरोड़ा की नियुक्ति उस दिन से प्रभावी होगी, जिस दिन वह पदभार संभालेंगे।

पारदर्शी होगी न्यायिक प्रक्रिया (विनय जायसवाल)

September 01, 2017 0
पारदर्शी होगी न्यायिक प्रक्रिया

(विनय जायसवाल)

सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में निचली अदालतों की कार्यवाही के वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिग के लिए सहमति दी है। यह न्यायालय के इसी साल मार्च में दिए गए अपने एक फैसले का विस्तार है, जिसमें उसने हरेक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के दो-दो जिला न्यायालयों में प्रायोगिक तौर पर केवल वीडियो रिकॉर्डिग के लिए कहा था। हालांकि अभी यह फैसला केवल निचली अदालतों के लिए है, इस संबंध में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के लिए स्थिति स्पष्ट नहीं है।

उच्चतम न्यायालय के मौजूदा आदेश को ऑडियो-वीडियो रिकार्डिग की अनिवार्य व्यवस्था की दिशा में एक शुरुआत मान सकते हैं। हो सकता है आने वाले समय का भारत न्यायिक प्रक्रिया के ऑडियो-वीडियो रिकार्डिग की व्यवस्था के जरिये पारदर्शी और उत्तरदायी न्याय की नई इबारत लिखे। इससे भारतीय न्याय प्रणाली पर लगे भ्रष्टाचार के लांछनों को निश्चित रूप से कम करने में मदद मिलेगी। ऐसे उपाय केवल भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के लिए ही नहीं बल्कि निचली अदालतों में बहुत से अनुचित तरीके से दर्ज कराए जाने वाले मुकदमों पर भी रोक लग सकेगी। ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि वकील सांठगांठ करके अदालतों में न केवल शिकायत याचिका दर्ज करवाते हैं बल्कि जज भी बिना पूरी प्रक्रिया के केस को दाखिल करके समन या वारंट जारी कर देते हैं। इसी तरह कई बार ट्रायल के दौरान बयानों और सबूतों से भी छेड़छाड़ के आरोप लगते रहे हैं। यही नहीं ऊपरी अदालतों में अपील के दौरान जज वही व्यू देख पाते हैं जो निचली अदालत के जज ने दिखाया होता है, लेकिन ऑडियो-वीडियो रिकार्डिग प्रणाली लागू होने के बाद ऊपरी अदालत के जज निचली अदालत की पूरी कार्यवाही को देख और सुन सकेंगे, इससे उन्हें पूरे ट्रायल को समझने में आसानी होगी। इसे न्याय के क्षेत्र में क्रांति की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।

एक आकलन के अनुसार देश के करीब 45 प्रतिशत लोग मानते हैं कि न्यायपालिका भ्रष्ट है। 2017 के एक सर्वे के मुताबिक करीब 60 फीसद ने वकील को, करीब पांच फीसद ने जज को और करीब 30 प्रतिशत ने कोर्ट के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने पक्ष में निर्णय देने के लिए रिश्वत देने की बात स्वीकार की है। देश के पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने 2010 में सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि देश के पिछले 16 मुख्य न्यायाधीशों में से आधे भ्रष्ट रहे हैं। इसी तरह से अपने विवादित बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वाले सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय पर कई बार भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा चुके हैं। निश्चित रूप से न्यायालय के भ्रष्टाचार पर सार्वजनिक रूप से बात करने के लिए बड़ी हिम्मत चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के अवमानना के केस में सजा काट रहे कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायाधीश सी.एस. कर्णन का भी आरोप है कि उन्होंने न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है, इसलिए उन पर निशाना साधा गया।

न्यायाधीश कर्णन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों और मद्रास हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए थे। अब ये आरोप कितने सही हैं और कितने गलत, यह निश्चित रूप से जांच का विषय है, लेकिन इससे न्यायालय की भूमिका पर सवाल तो खड़े ही होते हैं। सर्वोच्च न्यायालय से लेकर विभिन्न उच्च न्यायालय समय-समय पर सरकार को पारदर्शी प्रशासन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्यस्थलों से लेकर सार्वजनिक स्थानों तक पर सीसीटीवी लगाए जाने का निर्देश देते रहे हैं, लेकिन न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर इस तरह की व्यवस्था को टालते रहे। उल्लेखनीय है कि अगस्त 2014 में विधि मंत्रलय की सलाहकार समिति, विधि आयोग और सर्वोच्च न्यायालय की शीर्ष ई-कमिटी की बैठक के दौरान केंद्र सरकार ने प्रस्ताव दिया था कि निचली अदालतों की सभी न्यायिक कार्यवाहियों की ऑडियो-वीडियो रिकार्डिग की शुरुआत की जाए और फिर इसे उच्च और उच्चतम न्यायालय में लागू किया जाए। इस प्रस्ताव को नवंबर 2014 में सर्वोच्च न्यायालय की शीर्ष ई-कमिटी ने कथित रूप से मानने से इन्कार कर दिया था। इसी तरह से जुलाई 2015 में ‘नेशनल मिशन फॉर जस्टिस डिलिवरी एंड लीगल रिफॉर्म’ की सलाहकार समिति की बैठक के दौरान विधि आयोग के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस ए.पी. शाह ने इस मसले को उठाते हुए कहा कि न्यायिक कार्यवाहियों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिग के विरोध का एक भी उचित कारण नहीं है क्योंकि यह हर हाल में न्यायिक उत्तरदायित्व में इजाफा ही करेगा। हालांकि जनवरी 2015 में सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एच.एल. दत्तू ने सर्वोच्च न्यायालय में कैमरा लगाने की जनहित याचिका को खारिज करके संकेत दे दिया था कि शीर्ष कोर्ट की इस मसले पर मंशा क्या है? यह ऐसी अकेली याचिका नहीं थी जिसे खारिज किया गया, विभिन्न उच्च न्यायालयों से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक में न्यायिक पारदर्शिता को लेकर ऑडियो-वीडियो रिकार्डिग की मांग के संदर्भ में लगाई गई अनेक याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में 1955 से ही मौखिक बहस की न केवल ऑडियो रिकार्डिग होती है बल्कि यह कोर्ट की वेबसाइट पर डाउनलोड करने या सीधे सुनने के लिए उपलब्ध होती है। इन रिकार्डिग्स की देखरेख का जिम्मा वहां की नेशनल आर्काइव और रिकार्ड्स एडमिनिस्ट्रेशन के पास होता है। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया सुप्रीम कोर्ट के कुछ निर्णय और आदेश वेब पर प्रसारित किए जाते हैं। ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को टेलीविजन से प्रसारित किया जाता है।

भारत में भी 2015 में तत्कालीन कानून मंत्री वी सदानंद गौड़ा ने सभी न्यायालयों की कानूनी कार्यवाही को प्रसारित करने पर जोर दिया था। भारत में पहली बार मद्रास हाईकोर्ट ने कोर्ट रूम के बाहर एलक्ष्डी टीवी लगाकर न्यायिक कार्यवाही को प्रसारित किया था, जिससे मामले से जुड़े अन्य पक्षकार और वकील सुनवाई को देख सकें। इसी तरह से जुलाई 2015 में कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने एक खास मामले में वीडियो और ऑडियो रिकाडिर्ंग के आदेश दिए थे, हालांकि उनका यह आदेश केवल कोर्ट की सहायता के लिए ही था, इसके किसी भी तरह के सार्वजनिक उपयोग पर उनकी अनुमति के बिना निषेध था। ऐसे में देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निचली अदालतों में न्यायिक परीक्षण की वीडियो रिकार्डिग का आदेश जारी करना सकारात्मक बदलाव की ओर संकेत करता है।(DJ)
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)