Friday, October 6, 2017

यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल भारतीय धरोहर स्थल

October 06, 2017 0
यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल भारतीय धरोहर स्थल

यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल भारतीय धरोहर स्थल
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1. ताजमहल - उत्तर प्रदेश [1983]
2. आगरा का किला - उत्तर प्रदेश [1983]
3. अजंता की गुफाएं - महाराष्ट्र [1983]
4. एलोरा की गुफाएं - महाराष्ट्र [1983]
5. कोणार्क का सूर्य मंदिर - ओडिशा [1984]
6. महाबलिपुरम् का स्मारक समूह -तमिलनाडू [1984]
7. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान - असोम [1985]
8. मानस वन्य जीव अभयारण्य - असोम [1985]
9. केवला देव राष्ट्रीय उद्यान - राजस्थान [1985]
10. पुराने गोवा के चर्च व मठ - गोवा [1986]
11. मुगल सिटी, फतेहपुर सिकरी - उत्तर प्रदेश [1986]
12. हम्पी स्मारक समूह - कर्नाटक [1986]
13. खजुराहो मंदिर - मध्यप्रदेश [1986]
14. एलीफेंटा की गुफाएं - महाराष्ट्र [1987]
15. पट्टदकल स्मारक समूह - कर्नाटक [1987]
16. सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान - प. बंगाल [1987]
17. वृहदेश्वर मंदिर तंजावुर - तमिलनाडू [1987]
18. नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान - उत्तराखंड [1988]
19. सांची का बौद्ध स्मारक - मध्यप्रदेश [1989]
21. हुमायूँ का मकबरा - दिल्ली [1993]
22. दार्जिलिंग हिमालयन रेल - पश्चिम बंगाल [1999]
23. महाबोधी मंदिर, गया - बिहार [2002]
24. भीमबेटका की गुफाएँ - मध्य प्रदेश [2003]
25. गंगई कोड़ा चोलपुरम् मन्दिर - तमिलनाडु [2004]
26. एरावतेश्वर मन्दिर - तमिलनाडु [2004]
27. छत्रपति शिवाजी टर्मिनल - महाराष्ट्र [2004]
28. नीलगिरि माउंटेन रेलवे - तमिलनाडु [2005]
29. फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान - उत्तराखंड [2005]
30. दिल्ली का लाल किला - दिल्ली [2007]
31. कालका शिमला रेलवे -हिमाचल प्रदेश [2008]
32. सिमलीपाल अभ्यारण्य - ओडिशा [2009]
33. नोकरेक अभ्यारण्य - मेघालय [2009]
34. भितरकनिका उद्यान - ओडिशा [2010]
35. जयपुर का जंतर-मन्तर - राजस्थान [2010]
36. पश्चिम घाट [2012]
37. आमेर का किला - राजस्थान [2013]
38. रणथंभोर किला - राजस्थान [2013]
39. कुंभलगढ़ किला - राजस्थान [2013]
40. सोनार किला - राजस्थान [2013]
41. चित्तौड़गढ़ किला - राजस्थान [2013]
42. गागरोन किला - राजस्थान [2013]
43. रानी का वाव - गुजरात [2014]
44. ग्रेट हिमालय राष्ट्रीय उद्यान - हिमाचल प्रदेश [2014]

परमाणु ऊर्जा में भारत की लंबी छलांग

October 06, 2017 0
परमाणु ऊर्जा में भारत की लंबी छलांग

=>परमाणु ऊर्जा में भारत की लंबी छलांग, लगाए जाएंगे 10 स्वदेशी संयंत्र
    
★ देश में परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी तकनीक से निर्मित परमाणु ऊर्जा के दस संयंत्र लगाए जाएंगे।
★ दाबित भारी जल (प्रेशराइज्ड हैवी वाटर रिएक्टर) के दस परमाणु संयंत्र लगाए जाएंगे । इनकी कुल स्थापित क्षमता सात हजार मेगावाट की होगी।
★ ये परमाणु संयंत्र सरकारी कंपनियां और सरकारी कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम स्थापित करने वाली कंपनियां ही लगा सकेंगी ।

=>अपनाए जाएंगे अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा मापदंड
★ इन संयंत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा मापदंड अपनाए जाएंगे। इससे घरेलू उद्योगों को करीब 70 हजार करोड़ रूपए के ऑर्डर मिलने की संभावना है। ★इसके साथ ही 33400 प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे । ये संयंत्र परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में मेक इन इंडिया की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक होंगे ।

=>इस वक्त देश में संचालित 22 परमाणु संयंत्र
★इस समय देश में 22 परमाणु संयंत्र संचालित है जिनकी चालू स्थापित क्षमता 6780 मेगावाट है जबकि 6700 मेगावाट की क्षमता वाली परमाणु संयंत्र परियोजनाएं निर्माणाधीन है। निर्माणाधीन परियोजनाओं के 2021-22 तक चालू होने की संभावना है।
★ये दस संयंत्र अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक से निर्मित तथा सुरक्षा के उच्च मापदंडों का पालन करते हुए 700 मेगावाट के ताजा डिजायन के पीएचडब्ल्यूआर की योजना का हिस्सा हैं ।

=>जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने में अहम कदम

जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने में यह फैसला ऐतिहासिक है। यह स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा को बढ़वा देकर कार्बन उत्सर्जन कम करने पर पेरिस में की गई प्रतिबद्धता पर भारत की गंभीरता को दर्शाता है ।
★ यह पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदनशीलता का भी परिचायक है। यह हमारे वैज्ञानिकों के प्रति सम्मान भी है जिनमें अपार क्षमता एवं कुशलता है । इससे पता लगता है कि हमारे वैज्ञानिकों ने परमाणु संयंत्र के विकास में हर तरह की स्वदेशी तकनीक का विकास किया है ।
★ भारत ने पिछले करीब 40 वर्षों में परमाणु संयंत्र बनाने और उनके संचालन में अपने अच्छे रिकार्ड का लोहा दुनिया में मनवाया है ।

अफ्रीका में जड़ें मजबूत करने का मौका

October 06, 2017 0
अफ्रीका में जड़ें मजबूत करने का मौका

अफ्रीका में जड़ें मजबूत करने का मौका

हर्ष वी पंत, प्रोफेसर किंग्स कॉलेज लंदनUpdated: 4 अक्तूबर, 2017 11:00 PM

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपनी पहली विदेश यात्रा पर इसी सप्ताह अफ्रीका जा रहे हैं। सरकार ने गंतव्य के रूप में जिबूती और इथियोपिया का चयन कर सही फैसला लिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति की पहली विदेश यात्रा के लिए अफ्रीका का चयन, वर्तमान सरकार की नजर में इस महाद्वीप के महत्व को दर्शाता है। मोदी सरकार अफ्रीका को अपने हित-विस्तार के एक क्षेत्र के रूप में देखती रही है और वहां अपनी मजबूत मौजूदगी को उत्सुक है। अफ्रीका यानी एक ऐसा महाद्वीप, जिसके साथ भारत के रिश्तों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है और जहां आज हर प्रमुख शक्ति अपना प्रभाव जमाने के लिए दांव लगाना चाह रही है।  

जिबूती हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख देश बनकर उभर रहा है। इसका भौगोलिक दायरा भी महत्वपूर्ण है। देश से बाहर चीन का पहला सैन्य अड्डा यहीं है, और इस रूप में जिबूती के नौसैनिक बेस ने दुनिया भर में तरह-तरह की प्रतिक्रियाओं को भी मौका दिया। इस नौसैनिक अड्डे को चीन की अपनी ही विदेश नीति की सीमाओं के विस्तार के तौर पर देखा जाता है। यह अफ्रीका में उसकी बढ़ती सैन्य ताकत का भी प्रतीक है। 

चीनी विदेश मंत्री वांग यी की 2016 की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस पर गौर करें, तो अफ्रीका में यह नया सैन्य अभियान ‘अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों के राजनीतिक समाधान की दिशा में उसकी रचनात्मक भूमिका निभाने की इच्छा का हिस्सा है, ताकि विदेशों में चीन की संभावनाओं के विस्तार के लिए अधिक उपयुक्त और सुरक्षित माहौल तैयार हो सके। वह और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जिम्मेदारियों का वहन कर सके।’ दरअसल, अफ्रीका में चीन की बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षा, महाद्वीप में उसके अपने आर्थिक आधार का ही विस्तार है। यह अपने वैश्विक हितों की अत्यंत महत्वाकांक्षी और विस्तारित परिभाषा की ओर बढ़ना भी है। अफ्रीका में इसके व्यवसाय को विदेशों में बढ़ते इसके सैन्य प्रभाव सहित उसके इन्हीं हितों को हासिल करने का नया तंत्र विकसित करने के तौर पर देखा जाना चाहिए। 

जिबूती अपनी जमीन पर भारत की मौजूदगी को लेकर सदैव उत्साहित रहा है और इसका स्वागत करता है। 2015 में येमन से निकलने के समय में भारत को इससे खासी मदद मिली थी। उधर इथियोपिया के साथ भारत के पारंपरिक रिश्ते रहे हैं और भारत से उसे आज भी खासी रियायती मदद मिल रही है। अफ्रीका में भारत की मजबूत उपस्थिति के लिए ये दोनों देश खासे महत्वपूर्ण साधन हैं।
2015 के भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के साथ ही मोदी सरकार ने अफ्रीका के साथ सदियों पुराने संबंधों में तेजी लाने के लिए तत्परता का संकेत दिया था। ऐसे संबंध, जो दोनों देशों के लाखों प्रवासियों के जरिये परवान चढ़ते हैं। साझा औपनिवेशिक विरासत और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद की विकास-यात्रा के अनुभवों ने भारत-अफ्रीका संबंधों को नए आधार दिए हैं। 1947 में आजादी हासिल करने के बाद भारत की उपनिवेशवाद और नस्लभेद विरोधी छवि ने इन रिश्तों को काफी मजबूती दी और यह स्वाभाविक रूप से अफ्रीकी राष्ट्रों के करीब आ गया। 

शीत युद्ध के खात्मे के बाद से और अफ्रीका में चीन की बढ़ती उपस्थिति के मद्देनजर भारत अफ्रीकी महाद्वीप के साथ अपने संबंधों को फिर से परिभाषित करते हुए और मजबूती देना चाह रहा है। विगत भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग के स्वरूप पर बनी सहमति और अफ्रीका में निवेश व सहायता बढ़ाने की भारतीय पहल, नई दिल्ली और अफ्रीकी महाद्वीप के बीच मजबूत साझेदारी बढ़ाने के भारत के इरादे को दर्शाने वाली थी।

अब अफ्रीका में भारत के हित खासे बढ़े हुए हैं। विश्व के चंद तेजी से बढ़ते देशों के साथ ही अफ्रीका अब अतीत का ‘अंधेरे में डूबा महाद्वीप’ नहीं है। क्षेत्रीय देशों की जरूरतें अलग होती हैं, हित अलग होते हैं, तो उनकी ताकत भी अलग होती है। बीते कुछ दशकों में भारत का ध्यान भी महाद्वीप में बड़े पैमाने पर अपनी क्षमता-विस्तार पर गया है। भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (आईटीईसी) के अंतर्गत इसने इस दिशा में बड़ा सहयोग दिया है। 40 देशों में फैली 137 परियोजनाओं पर अफ्रीका के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए इसने 7.5 अरब डॉलर के सहयोग का वादा किया है। भारत ने कम विकसित अफ्रीकी देशों के लिए अपने यहां शुल्क मुक्त बाजार सुलभ कराने की भी पेशकश की है, लेकिन सच यह है कि अफ्रीका के साथ भारत का व्यापार क्षमता से कहीं अधिक कम है। भारत, इस क्षेत्र में आर्थिक संबंधों का नया अध्याय शुरू करने के लिए अफ्रीका से ‘विकासमूलक साझेदारी’ चाहता है। ऐसा करके वह आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के सदस्य देशों में अपनी अलग छवि दिखाना चाहेगा, जो समय की मांग भी है। 

अफ्रीका में तेल क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए वित्तीय और सैन्य सहायता का इस्तेमाल करने की बीजिंग की नीति दिल्ली को निराश करने वाली है। अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए संसाधनों और ऊर्जा के लिए चीन और भारत की जबरदस्त प्रतिस्पद्र्धा को 19वीं शताब्दी में अफ्रीका के लिए यूरोपीय देशों के बीच मची तथाकथित हलचल से जोड़कर देखा गया। दरअसल कहने को तो यह एक प्रतिस्पद्र्धा ही है, क्योंकि अफ्रीका में भारत की स्थिति, चीन से काफी पीछे है। सच तो यही है कि जहां सरकारी तंत्र के विभिन्न स्तरों पर चीन की समन्वित मौजूदगी देखी जा सकती है, वहीं भारत इस मामले में विफल रहा है। अब भारत यदि आर्थिक मोर्चे पर क्षेत्र में चीन की उपस्थिति का अंतर पाटना चाहता है, तो उसे अपनी कंपनियों को और ज्यादा सक्रिय और खुला समर्थन देना होगा।

फिर भी अफ्रीका के साथ व्यवहार के मामले में भारत की अपनी ही ताकत है। इसकी लोकतांत्रिक परंपराएं अफ्रीका संबंधी मामलों पर सहयोग के लिए इसे चीन की तुलना में पश्चिम के लिए ज्यादा अनुकूल साथी के रूप में पेश करने में सहायक हैं। तमाम देश भारत को अफ्रीका में एक बेहतर उत्पादक भागीदार के रूप में पाते हैं, क्योंकि भारतीय कंपनियों की अफ्रीकी समाज में ज्यादा स्वीकार्यता है। ऐसे में, नई दिल्ली को अफ्रीका से रिश्ते मजबूत करने और महाद्वीप में अपनी उपस्थिति बेहतर बनाने के लिए अपनी इन्हीं ताकतों का इस्तेमाल करना होगा। 

राष्ट्रपति कोविंद का अफ्रीका दौरा न सिर्फ भारत की विदेश नीति के स्वरूप में निरंतरता के महत्व को 
दर्शाता है, बल्कि अफ्रीकी महाद्वीप के साथ दीर्घकालिक भागीदारी कायम करने के नई दिल्ली के संकल्प को भी फिर से दर्शाता है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

दैनिक समसामयिकी 06 Oct 2017(Friday)

October 06, 2017 0
दैनिक समसामयिकी 06 Oct 2017(Friday)

1.साहित्य का नोबेल काजुओ इशिगुरो को

• ‘‘द रिमेन्स ऑफ द डे’ उपन्यास के लिए मशहूर ब्रिटिश लेखक काजुओ इशिगुरो को इस वर्ष के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। स्वीडिश अकादमी ने यह जानकारी दी।अकादमी ने अपनी घोषणा में कहा, 62 साल के लेखक ने शानदार भावनात्मक प्रभाव वाले उपन्यासों में दुनिया के साथ हमारे जुड़ाव की अवास्तविक भावना के नीचे के शून्य को दिखाया है।
• इशिगुरो ने आठ किताबें और साथ ही फिल्म एवं टेलीविजन के लिए पटकथाएं भी लिखी हैं। उन्हें 1989 में ‘‘द रिमेन्स ऑफ दि डे’ के लिए मैन बुकर प्राइज जीता था।जापान के नागासाकी में जन्मे इशिगुरो पांच साल की उम्र में अपने परिवार के साथ ब्रिटेन चले गए थे और वयस्क होने पर जापान की यात्रा की।
• उनका पहला उपन्यास ‘‘अ पेल व्यू ऑफ दि हिल्स’ (1982) और दूसरा उपन्यास ‘‘ऐन आर्टिस्ट ऑफ दि फ्लोटिंग र्वल्ड’ (1986) दोनों द्वितीय विश्वयुद्ध के कुछ सालों के बाद के नागासाकी की पृष्ठभूमि पर आधारित है। अकादमी ने कहा, इशिगुरो को सबसे ज्यादा जिन विषयों के साथ जोड़ा जाता है वह यहां पहले से ही मौजूद हैं-स्मृति, समय और आत्म विमोह।
• अकादमी के अनुसार यह उनके सबसे मशहूर उपन्यास द रिमेन्स ऑफ दि डे में खासतौर पर दिखता है जिसपर बनी फिल्म में एंथनी होपकिंस ने काम को लेकर बेहद समर्पित रसोइए स्टीवेंस की भूमिका निभायी थी। घोषणा में कहा गया, इशिगुरो की रचनाओं में अभिव्यक्ति का एक संयमित माध्यम दिखता है जो घटनाक्र मों से अप्रभावित होता है।
• नोबेल निर्णायक मंडल के अनुसार लेखक की मशहूर रचनाओं में 2005 में आयी किताब ‘‘नेवर लेट मी गो’ शामिल है जिसमें उन्होंने अपनी रचना में साइंस फिक्शन के धीमे अंतप्र्रभाव को पेश किया।
• 2015 में आए उनके नवीनतम उपन्यास ‘‘द बरिड जाइंट’ में एक गतिशील तरीके से दिखाया गया है कि स्मृति का विस्मृति, इतिहास का वर्तमान और फंतासी का वास्तविकता से क्या संबंध है।

2. पाक की चिंताओं के चलते भारत ने अफगानिस्तान में नहीं भेजे सैनिक

• अमेरिकी रक्षामंत्री जिम मैटिस ने कहा है कि अफगानिस्तान में अपने सैनिक न भेजने का भारत का फैसला पाकिस्तान की चिंताओं की वजह से है क्योंकि इससे क्षेत्र में नई जटिलताएं पैदा होंगी।मैटिस ने सदन की सशस्त्र सेवा समिति में सांसदों के समक्ष युद्धग्रस्त अफगानिस्तान की मदद में भारत के योगदान की सराहना की और कहा, नई दिल्ली ने अफगानिस्तान की मदद करने की दिशा में सर्वागीण रवैया अपनाया है।
• उन्होंने दक्षिण एशिया पर कांग्रेस की सुनवाई के दौरान सांसद डग लैम्बोर्न के एक सवाल के जवाब में कहा, यह वास्तव में एक बहुत ही सर्वागीण रवैया है जो भारत अपना रहा है। आप देखेंगे कि मैंने भारतीय सैनिकों का विकल्प पाकिस्तान के लिए उत्पन्न होने वाली जटिलता की वजह से छोड़ दिया।
• मैटिस ने कहा, हम इसे एक समावेशी रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं और हम उनमें ऐसी कोई भावना नहीं भरना चाहते कि वह पश्चिमी पक्ष की ओर से किसी भारतीय सैनिक को लेकर सहज नहीं हैं। अमेरिकी रक्षामंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच मुक्त सीमा व्यापार से क्षेत्रीय स्थिरता लाने में मदद मिलेगी।
• मैटिस ने कहा, यदि भारत और पाकिस्तान के बीच दोनों देशों के व्यापक आर्थिक लाभ के वास्ते व्यापार के लिए सीमा खोलने का कोई रास्ता निकलता है तो यह समूचे क्षेत्र के लिए बड़ा मददगार होगा। उन्होंने कहा, स्थिरता से आर्थिक समृद्धि आती है। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि आखिरकार वह इसे होते हुए देखेंगे।
• मैटिस ने सीमा पार से होने वाली घुसपैठ तथा उस पर रोक के अप्रत्यक्ष संदर्भ में कहा, मेरा मानना है कि भारत ऐसा चाहता है, लेकिन यह ऐसी स्थिति में करना बेहद मुश्किल है जब आप सीमा किसी और चीज के लिए खोलते है तथा आपको मिलता कुछ और है।
• अफगानिस्तान में भारत की भूमिका पर सिलसिलेवार सवालों का जवाब देते हुए मैटिस ने कहा, नई दिल्ली का अफगानिस्तान के साथ वर्षो से लगाव रहा है। वर्षो से अफगानिस्तान को वित्तीय मदद की वजह से भारत को बदले में अफगान लोगों का लगाव मिला है। वह इस प्रयास को लगातार जारी रखना चाहते हैं और इसे विस्तारित करना चाहते हैं।

3. भारत व इथोपिया के बीच व्यापार व संचार पर हुए दो समझौते

• राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की इथोपिया यात्र के दौरान दो महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। व्यापार व मीडिया, संचार के क्षेत्र में हुए करार पर कोविंद व इथोपिया के राष्ट्रपति मुलातू टेसहोम ने दस्तखत किए।
• कोविंद ने इस दौरान ‘इंटरनेशनल सोलर अलाइंस’ (आइएसए) में भागीदारी के लिए इथोपिया का आभार जताया। ये 2015 में गठित हुआ था। इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को प्रभावी बनाना है। कोविंद ने कहा कि इथोपिया के बिजली, स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में भारत का योगदान अतुलनीय है।
• भारत उन तीन देशों में शामिल है जहां से इथोपिया को सीधा विदेशी निवेश मिलता है। इसके बाद दोनों देशों के प्रमुखों ने ‘इंडिया-इथोपिया बिजनेस फोरम’ को संबोधित करने के साथ ‘इंडिया-इथोपिया, 70 ईयर्स ऑफ डिप्लोमेटिक रिलेशन’ किताब का विमोचन भी किया।
• इस फोरम में सौ से ज्यादा भारतीय कंपनियां शामिल हैं। कोविंद ने कहा कि भारत ने नौकरियों का सृजन करके इथोपिया को समृद्ध होने में मदद की।
• उल्लेखनीय है कि जिबूती से बुधवार को कोविंद इथोपिया पहुंचे थे। बीती रात उन्होंने भारतीय समुदाय को संबोधित भी किया था।

4. पटरी पर लौट रही सेवा क्षेत्र की गाड़ी

• देश में सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में सितम्बर में तीन महीने में पहली बार बढ़ोतरी दर्ज हुई। एक मासिक सर्वे में कहा गया है कि सितम्बर में सेवा क्षेत्र माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रि यान्वयन से पैदा हुई अड़चनों से उबरा।
• नए आर्डर मिलने से क्षेत्र में नए रोजगार के अवसरों का भी सृजन हुआ।निक्की इंडिया सर्विसेज का पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक सितम्बर में बढ़कर 50.7 पर पहुंच गया जो अगस्त में 47.5 पर था। इसका आशय सुधार से है।
•  पीएमआई के तहत 50 से ऊपर का मतलब विस्तार से है जबकि इससे नीचे गिरावट को दर्शाता है। सर्वे में कहा गया है कि कंपनियों के विपणन अभियान और मांग मजबूत होने से नए कारोबार में वृद्धि दर्ज की गई। सेवा क्षेत्र के पीएमआई से पहले मंगलवार को विनिर्माण क्षेत्र के पीएमआई आंकड़े आए थे। इसमें भी सितम्बर में लगातार दूसरे महीने औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि दर्ज हुई थी।
•  विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का संकेतक निक्की इंडिया कम्पोजिट पीएमआई उत्पादन सूचकांक सितम्बर में 51.1 पर पहुंच गया जो अगस्त में 49 पर था।
• आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री तथा रिपोर्ट के लेखक आशना दोधिया ने कहा कि जुलाई में जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद अब भारत के निजी क्षेत्र में कुछ सुधार आ रहा है। विनिर्माण क्षेत्र के बाद सेवा क्षेत्र में भी वृद्धि दर्ज हुई है।

5. रूस ने उत्तर कोरिया को दिया पावरफुल इंटरनेट कनेक्शन

• रूस की एक सरकारी कंपनी ने उत्तर कोरिया को इंटरनेट का दूसरा कनेक्शन दिया है। उच्च क्षमता वाले इस कनेक्शन से उत्तर कोरिया की साइबर ताकत बढ़ गई है। इससे उत्तर कोरिया को अलग-थलग करने के अमेरिकी प्रयास को धक्का लगा है।
• इस बीच अमेरिका ने अपने मिसाइल डिफेंस सिस्टम को और प्रभावशाली करने पर कार्य शुरू किया है। इसके लिए संसद से 440 मिलियन डॉलर (2,860 करोड़ रुपये) के अतिरिक्त बजट स्वीकृति की दरकार है। 1ट्रांस टेलीकॉम द्वारा दिए गए इस कनेक्शन का पता रविवार को लगा। यह सन 2010 में चीन की कंपनी चाइना यूनीकॉम के दिए इंटरनेट कनेक्शन के अतिरिक्त होगा और उसे मजबूती देगा।
• इस नए कनेक्शन से उत्तर कोरिया के साइबर नेटवर्क में होने वाले किसी हमले या गड़बड़ी से निपटने में मदद मिलेगी। नया कनेक्शन उत्तर कोरिया के साइबर नेटवर्क को अतिरिक्त ताकत मुहैया कराएगा। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रलय के अनुसार उत्तर कोरिया के पास 6,800 साइबर युद्ध विशेषज्ञों की फौज है।
• यह दूसरे देशों पर कई बार साइबर अटैक कर चुकी है। सन 2014 में इसी ने सोनी पिक्चर्स की हैकिंग थी।
• उत्तर कोरिया के साथ युद्ध के खतरे के चलते अमेरिका ने अपनी मिसाइल रक्षा प्रणाली को और मजबूत करने का फैसला किया है। इसके लिए रक्षा मंत्रलय ने संसद से बजट में और बढ़ोतरी का अनुरोध किया है। मिसाइल डिफेंस के बजट में अमेरिकी रक्षा मंत्रलय को पहले ही 8.2 अरब डॉलर (करीब 53 हजार करोड़ रुपये) की रकम मिल चुकी है।

दैनिक समसामयिकी 06 Oct 2017(Friday)

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दैनिक समसामयिकी 06 Oct 2017(Friday)

1.साहित्य का नोबेल काजुओ इशिगुरो को

• ‘‘द रिमेन्स ऑफ द डे’ उपन्यास के लिए मशहूर ब्रिटिश लेखक काजुओ इशिगुरो को इस वर्ष के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। स्वीडिश अकादमी ने यह जानकारी दी।अकादमी ने अपनी घोषणा में कहा, 62 साल के लेखक ने शानदार भावनात्मक प्रभाव वाले उपन्यासों में दुनिया के साथ हमारे जुड़ाव की अवास्तविक भावना के नीचे के शून्य को दिखाया है।
• इशिगुरो ने आठ किताबें और साथ ही फिल्म एवं टेलीविजन के लिए पटकथाएं भी लिखी हैं। उन्हें 1989 में ‘‘द रिमेन्स ऑफ दि डे’ के लिए मैन बुकर प्राइज जीता था।जापान के नागासाकी में जन्मे इशिगुरो पांच साल की उम्र में अपने परिवार के साथ ब्रिटेन चले गए थे और वयस्क होने पर जापान की यात्रा की।
• उनका पहला उपन्यास ‘‘अ पेल व्यू ऑफ दि हिल्स’ (1982) और दूसरा उपन्यास ‘‘ऐन आर्टिस्ट ऑफ दि फ्लोटिंग र्वल्ड’ (1986) दोनों द्वितीय विश्वयुद्ध के कुछ सालों के बाद के नागासाकी की पृष्ठभूमि पर आधारित है। अकादमी ने कहा, इशिगुरो को सबसे ज्यादा जिन विषयों के साथ जोड़ा जाता है वह यहां पहले से ही मौजूद हैं-स्मृति, समय और आत्म विमोह।
• अकादमी के अनुसार यह उनके सबसे मशहूर उपन्यास द रिमेन्स ऑफ दि डे में खासतौर पर दिखता है जिसपर बनी फिल्म में एंथनी होपकिंस ने काम को लेकर बेहद समर्पित रसोइए स्टीवेंस की भूमिका निभायी थी। घोषणा में कहा गया, इशिगुरो की रचनाओं में अभिव्यक्ति का एक संयमित माध्यम दिखता है जो घटनाक्र मों से अप्रभावित होता है।
• नोबेल निर्णायक मंडल के अनुसार लेखक की मशहूर रचनाओं में 2005 में आयी किताब ‘‘नेवर लेट मी गो’ शामिल है जिसमें उन्होंने अपनी रचना में साइंस फिक्शन के धीमे अंतप्र्रभाव को पेश किया।
• 2015 में आए उनके नवीनतम उपन्यास ‘‘द बरिड जाइंट’ में एक गतिशील तरीके से दिखाया गया है कि स्मृति का विस्मृति, इतिहास का वर्तमान और फंतासी का वास्तविकता से क्या संबंध है।

2. पाक की चिंताओं के चलते भारत ने अफगानिस्तान में नहीं भेजे सैनिक

• अमेरिकी रक्षामंत्री जिम मैटिस ने कहा है कि अफगानिस्तान में अपने सैनिक न भेजने का भारत का फैसला पाकिस्तान की चिंताओं की वजह से है क्योंकि इससे क्षेत्र में नई जटिलताएं पैदा होंगी।मैटिस ने सदन की सशस्त्र सेवा समिति में सांसदों के समक्ष युद्धग्रस्त अफगानिस्तान की मदद में भारत के योगदान की सराहना की और कहा, नई दिल्ली ने अफगानिस्तान की मदद करने की दिशा में सर्वागीण रवैया अपनाया है।
• उन्होंने दक्षिण एशिया पर कांग्रेस की सुनवाई के दौरान सांसद डग लैम्बोर्न के एक सवाल के जवाब में कहा, यह वास्तव में एक बहुत ही सर्वागीण रवैया है जो भारत अपना रहा है। आप देखेंगे कि मैंने भारतीय सैनिकों का विकल्प पाकिस्तान के लिए उत्पन्न होने वाली जटिलता की वजह से छोड़ दिया।
• मैटिस ने कहा, हम इसे एक समावेशी रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं और हम उनमें ऐसी कोई भावना नहीं भरना चाहते कि वह पश्चिमी पक्ष की ओर से किसी भारतीय सैनिक को लेकर सहज नहीं हैं। अमेरिकी रक्षामंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच मुक्त सीमा व्यापार से क्षेत्रीय स्थिरता लाने में मदद मिलेगी।
• मैटिस ने कहा, यदि भारत और पाकिस्तान के बीच दोनों देशों के व्यापक आर्थिक लाभ के वास्ते व्यापार के लिए सीमा खोलने का कोई रास्ता निकलता है तो यह समूचे क्षेत्र के लिए बड़ा मददगार होगा। उन्होंने कहा, स्थिरता से आर्थिक समृद्धि आती है। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि आखिरकार वह इसे होते हुए देखेंगे।
• मैटिस ने सीमा पार से होने वाली घुसपैठ तथा उस पर रोक के अप्रत्यक्ष संदर्भ में कहा, मेरा मानना है कि भारत ऐसा चाहता है, लेकिन यह ऐसी स्थिति में करना बेहद मुश्किल है जब आप सीमा किसी और चीज के लिए खोलते है तथा आपको मिलता कुछ और है।
• अफगानिस्तान में भारत की भूमिका पर सिलसिलेवार सवालों का जवाब देते हुए मैटिस ने कहा, नई दिल्ली का अफगानिस्तान के साथ वर्षो से लगाव रहा है। वर्षो से अफगानिस्तान को वित्तीय मदद की वजह से भारत को बदले में अफगान लोगों का लगाव मिला है। वह इस प्रयास को लगातार जारी रखना चाहते हैं और इसे विस्तारित करना चाहते हैं।

3. भारत व इथोपिया के बीच व्यापार व संचार पर हुए दो समझौते

• राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की इथोपिया यात्र के दौरान दो महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। व्यापार व मीडिया, संचार के क्षेत्र में हुए करार पर कोविंद व इथोपिया के राष्ट्रपति मुलातू टेसहोम ने दस्तखत किए।
• कोविंद ने इस दौरान ‘इंटरनेशनल सोलर अलाइंस’ (आइएसए) में भागीदारी के लिए इथोपिया का आभार जताया। ये 2015 में गठित हुआ था। इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को प्रभावी बनाना है। कोविंद ने कहा कि इथोपिया के बिजली, स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में भारत का योगदान अतुलनीय है।
• भारत उन तीन देशों में शामिल है जहां से इथोपिया को सीधा विदेशी निवेश मिलता है। इसके बाद दोनों देशों के प्रमुखों ने ‘इंडिया-इथोपिया बिजनेस फोरम’ को संबोधित करने के साथ ‘इंडिया-इथोपिया, 70 ईयर्स ऑफ डिप्लोमेटिक रिलेशन’ किताब का विमोचन भी किया।
• इस फोरम में सौ से ज्यादा भारतीय कंपनियां शामिल हैं। कोविंद ने कहा कि भारत ने नौकरियों का सृजन करके इथोपिया को समृद्ध होने में मदद की।
• उल्लेखनीय है कि जिबूती से बुधवार को कोविंद इथोपिया पहुंचे थे। बीती रात उन्होंने भारतीय समुदाय को संबोधित भी किया था।

4. पटरी पर लौट रही सेवा क्षेत्र की गाड़ी

• देश में सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में सितम्बर में तीन महीने में पहली बार बढ़ोतरी दर्ज हुई। एक मासिक सर्वे में कहा गया है कि सितम्बर में सेवा क्षेत्र माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रि यान्वयन से पैदा हुई अड़चनों से उबरा।
• नए आर्डर मिलने से क्षेत्र में नए रोजगार के अवसरों का भी सृजन हुआ।निक्की इंडिया सर्विसेज का पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक सितम्बर में बढ़कर 50.7 पर पहुंच गया जो अगस्त में 47.5 पर था। इसका आशय सुधार से है।
•  पीएमआई के तहत 50 से ऊपर का मतलब विस्तार से है जबकि इससे नीचे गिरावट को दर्शाता है। सर्वे में कहा गया है कि कंपनियों के विपणन अभियान और मांग मजबूत होने से नए कारोबार में वृद्धि दर्ज की गई। सेवा क्षेत्र के पीएमआई से पहले मंगलवार को विनिर्माण क्षेत्र के पीएमआई आंकड़े आए थे। इसमें भी सितम्बर में लगातार दूसरे महीने औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि दर्ज हुई थी।
•  विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का संकेतक निक्की इंडिया कम्पोजिट पीएमआई उत्पादन सूचकांक सितम्बर में 51.1 पर पहुंच गया जो अगस्त में 49 पर था।
• आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री तथा रिपोर्ट के लेखक आशना दोधिया ने कहा कि जुलाई में जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद अब भारत के निजी क्षेत्र में कुछ सुधार आ रहा है। विनिर्माण क्षेत्र के बाद सेवा क्षेत्र में भी वृद्धि दर्ज हुई है।

5. रूस ने उत्तर कोरिया को दिया पावरफुल इंटरनेट कनेक्शन

• रूस की एक सरकारी कंपनी ने उत्तर कोरिया को इंटरनेट का दूसरा कनेक्शन दिया है। उच्च क्षमता वाले इस कनेक्शन से उत्तर कोरिया की साइबर ताकत बढ़ गई है। इससे उत्तर कोरिया को अलग-थलग करने के अमेरिकी प्रयास को धक्का लगा है।
• इस बीच अमेरिका ने अपने मिसाइल डिफेंस सिस्टम को और प्रभावशाली करने पर कार्य शुरू किया है। इसके लिए संसद से 440 मिलियन डॉलर (2,860 करोड़ रुपये) के अतिरिक्त बजट स्वीकृति की दरकार है। 1ट्रांस टेलीकॉम द्वारा दिए गए इस कनेक्शन का पता रविवार को लगा। यह सन 2010 में चीन की कंपनी चाइना यूनीकॉम के दिए इंटरनेट कनेक्शन के अतिरिक्त होगा और उसे मजबूती देगा।
• इस नए कनेक्शन से उत्तर कोरिया के साइबर नेटवर्क में होने वाले किसी हमले या गड़बड़ी से निपटने में मदद मिलेगी। नया कनेक्शन उत्तर कोरिया के साइबर नेटवर्क को अतिरिक्त ताकत मुहैया कराएगा। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रलय के अनुसार उत्तर कोरिया के पास 6,800 साइबर युद्ध विशेषज्ञों की फौज है।
• यह दूसरे देशों पर कई बार साइबर अटैक कर चुकी है। सन 2014 में इसी ने सोनी पिक्चर्स की हैकिंग थी।
• उत्तर कोरिया के साथ युद्ध के खतरे के चलते अमेरिका ने अपनी मिसाइल रक्षा प्रणाली को और मजबूत करने का फैसला किया है। इसके लिए रक्षा मंत्रलय ने संसद से बजट में और बढ़ोतरी का अनुरोध किया है। मिसाइल डिफेंस के बजट में अमेरिकी रक्षा मंत्रलय को पहले ही 8.2 अरब डॉलर (करीब 53 हजार करोड़ रुपये) की रकम मिल चुकी है।