1.संयुक्त राष्ट्र में बोले ट्रंप : अब आतंकियों के मददगारों को बेनकाब करने का समय
• अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को दुनिया के नेताओं से कहा कि यह उन देशों को बेनकाब करने और जिम्मेदार ठहराने का समय है जो आतंकी संगठनों को धन मुहैया कराते हैं और उन्हें पनाह देते हैं।
• कुछ हफ्ते पहले उन्होंने पाकिस्तान को अराजक तत्वों के एजेंटों का समर्थन करने को लेकर चेतावनी दी थी।संयुक्तराष्ट्र महासभा में अपने पहले भाषण में ट्रंप ने कहा, सभी जिम्मेदार राष्ट्रों को आतंकियों और उन्हें शह देने वाले इस्लामिक चरमपंथियों का मुकाबला करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
• उन्होंने कहा, हम कट्टर इस्लामिक आतंकवाद को रोकेंगे क्योंकि हम उसे अपने देश को, वाकई में पूरी दुनिया को तहस-नहस नहीं करने दे सकते। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिये कहा, यह उन देशों को बेनकाब करने और जिम्मेदार ठहराने का समय है जो आतंकी संगठनों की फंडिंग करते हैं और उन्हें पनाह देते हैं।
• ट्रंप ने कहा, देशों को आतंकियों को उनकी घिनौनी विचारधाराओं के चलते पनाहगाह, प्रशिक्षण, फंडिंग और किसी भी प्रकार के सहयोग से वंचित करना चाहिए।
• उन्होंने कहा, हमें अपने देशों से उन्हें हर हालत में खदेड़ देना चाहिए। यह उन देशों को बेनकाब करने और जिम्मेदार ठहराने का वक्त है जो अलकायदा, हिज्बुल्ला और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों को सहयोग पहुंचाते हैं और पैसा उपलब्ध कराते हैं।
2. भारत ने कहा, संयुक्त राष्ट्र में स्थायी व अस्थायी सदस्यों में हो बढ़ोतरी
• संयुक्त राष्ट्र में सुधार के अमेरिकी प्रयासों का समर्थन करते हुए भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र स्थायी व अस्थायी सदस्यों में बढ़ोतरी होनी जरूरी है। इस मसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उच्च स्तरीय बैठक की थी। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसमें शिरकत की।
• उल्लेखनीय है कि ट्रंप संयुक्त राष्ट्र के आलोचक रहे हैं, लेकिन हाल के दिनों में उनके रुख में बदलाव आया है। सोमवार को उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में सुधार के लिए मंत्रणा की। उनका कहना था कि वह हमेशा से मानते हैं कि संयुक्त राष्ट्र में बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन अफसरों का रवैया इसमें अड़ंगा डाल रहा है।
• उनका कहना था कि संस्था में सुधार की बेहद जरूरत है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ने जिस लाइन पर बात कही है, उसका भारत लंबे अर्से से पैरोकार रहा है। भारत का मानना है कि संस्था की गतिविधियों में सुधार तभी आ सकता है जब इसके संगठनात्मक ढांचे में सुधार हो।
• उधर, व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने बताया कि ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतेरस के उस दृष्टिकोण का समर्थन किया है जिसमें 2030 के लिए व्यापक सुधार करने की बात पर जोर दिया गया है। गुतेरस ने कहा था कि सुरक्षा व शांति के ढांचे में आमूलचूल बदलाव की जरूरत है, जिससे ये और ज्यादा प्रभावी हो सके।
• उनका कहना है कि हम अपने सिस्टम को चाकचौबंद कर रहे हैं, जिससे फील्ड में ज्यादा ध्यान लगाया जा सके और वैश्वीकरण के सपने को ज्यादा सार्थक हो सके।
• गौरतलब है कि सुधार के कार्यक्रम का 130 देशों ने समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की प्रतिनिधि निक्की हेली का कहना है कि संस्था में कुल 193 सदस्य हैं। अभी भी तकरीबन 70 सदस्यों ने सुधार को लेकर अपनी रजामंदी नहीं दी है। उन्हें भी साथ लाने की कोशिश लगातार होनी जरूरी हैं।
3. रोहिंग्या संकट पर आंग सान सू की के रुख से भारत की बंधी उम्मीद
• रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस उनके देश म्यांमार भेजने की तैयारी में जुटे भारत को आंग सान सू की के नए रुख से उम्मीद मिली है। सू की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में मंगलवार को दिए अपने भाषण में कहा है कि वैध रो¨हग्या शरणार्थियों को वापस लिया जा सकता है।
• उन्होंने कहा, बांग्लादेश के साथ 1990 के शुरू में जिस पुष्टि प्रक्रिया पर सहमति बनी थी उसके अनुरूप ही रोहिंग्या को वापस लिया जाएगा। शरणार्थी के रूप में जिनकी पुष्टि की जा चुकी है। उन्हें स्वदेश आने दिया जाएगा।
• म्यांमार की नेता के बयान से भारत को रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी का नया रास्ता निकलने की उम्मीद है। पहली बार म्यांमार की नेता ने रो¨हग्या संकट पर अपना पक्ष रखा है।
• सरकारी सूत्रों का कहना है कि हम रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने को तैयार थे, लेकिन म्यांमार इस पर चुप्पी साधे हुए था। अभी भी म्यांमार ने खुल कर यह संकेत नहीं दिया है कि वह हर शरणार्थी को वापस लेने को तैयार है। लेकिन जिनकी वैधता साबित हो जाएगी उनके लौटने की उम्मीद बन सकती है।
• अभी भी एक बड़ी समस्या है कि म्यांमार ने यदि इन्हें स्वीकार नहीं किया तो इनके साथ क्या किया जाएगा। लेकिन अब बातचीत की एक उम्मीद बंधी है। भारत अपने यहां रह रहे 40 हजार रो¨हग्या शरणार्थियों को म्यांमार भेजना चाहता है।
• देश में रोहिंग्या एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। सरकार के स्तर पर कार्रवाई जारी है। एक दिन पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर केंद्र सरकार ने कहा है कि रोहिंग्या शरणार्थी देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
• हलफनामे में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1951 में शरणार्थियों की स्थिति पर किए गए अंतरराष्ट्रीय समझौते या 1967 के समझौते पर उसने हस्ताक्षर नहीं किया है। इसलिए इन समझौते की शर्तो को मानने का दबाव उसपर नहीं डाला जा सकता।
• सरकार ने कहा है कि 1951 के समझौते या 1967 के प्रोटोकाल के किसी भी प्रावधान से देश नहीं बंधा है। इसी तरह भारत ने अभी तक दबाव, क्रूरता, गैर मानवीय व्यवहार या दंड के कारण निर्वासित व्यक्तियों की सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते को लागू नहीं किया है। ऐसे में भारत उनके प्रावधानों को लागू करने के लिए बाध्य नहीं है। केंद्र सरकार ने कहा है कि उक्त समझौतों को लागू नहीं करने के कारण वह शरणार्थियों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
• रोहिंग्या शरणार्थियों के समर्थकों का कहना है कि चूंकि भारत अंतरराष्ट्रीय समझौते को स्वीकार करता है इसलिए उन्हें देश से निकालने की पहल नहीं कर सकता।
4.जापान ने होकाइदो द्वीप पर तैनात की एक और मिसाइल रोधी प्रणाली
• उत्तर कोरिया से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सीनेट ने 45 लाख करोड़ के रक्षा बजट पर मुहर लगा दी है। बजट में अमेरिका की मिसाइल रक्षा व मारक प्रणाली को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया है। यह वर्ष 2003 के बाद अमेरिकी रक्षा बजट में हुई अब तक की सबसे ज्यादा बढ़ोतरी(बीते वर्ष के मुकाबले लगभग पांच लाख करोड़ रुपये अधिक) है।
• उल्लेखनीय है कि सीनेटर जॉन मैक्केन ने हाल में हुई कुछ दुर्घटनाओं में अमेरिकी सैनिकों की मौत के लिए भी कुछ हद तक कम बजट को भी कारण बताया था। बजट में उपलब्ध कराए गए लगभग 41 लाख करोड़ रुपये पेंटागन के लिए रखे गए हैं।
• इनसे मिसाइल समेत अन्य अत्याधुनिक हथियारों की खरीद होगी। साथ ही सैनिकों के वेतन पर खर्च होगा। चार लाख करोड़ रुपये विदेशी सैन्य मिशंस के लिए हैं। इसे अफगानिस्तान, इराक और सीरिया में तैनात सैनिकों पर खर्च किया जाएगा।
• बजट में कहा गया है कि अलास्का में फोर्ट ग्रीली के पास 14 अतिरिक्त इंटरसेप्टर तैनात किए जाएंगे जो मिसाइलों को हवा में ही मार गिराएंगे। इसके अलावा रिजर्व में 14 इंटरसेप्टर होंगे।
• इनकी तैनाती के लिए अभी स्थान तय नहीं किया गया है। वहीं मध्य पश्चिम व पूर्वी तट पर अतिरिक्त 100 मिसाइलों की तैनाती होगी।
5. एमएफआई के लिए नए नियम
• छोटे ऋण देने वाले संस्थानों (माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस) के संगठन माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस नेटवर्क (एमएफआईएन) ने मंगलवार को नई आचार संहिता जारी की। इसके तहत गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की समस्या से निपटने के लिए ऋण देने की कुछ शर्तें रखी गई हैं।
• रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन ने यहां एक कार्यक्रम में इस आचार संहिता को जारी किया। सिड्बी के उप प्रबंध निदेशक मनोज मित्तल भी इस मौके पर मौजूद थे। नई आचार संहिता के अनुसार यदि किसी उधारकर्ता ने तीन लघु ऋण दाताओं से ऋण ले रखा है तो उसे नया ऋण नहीं दिया जाएगा। साथ ही संयुक्त उत्तरदायित्व समूह माडल पर किसी भी ऋणकर्ता को 60 हजार रपए से अधिक का ऋण नहीं दिया जा सकेगा।
• यदि किसी ऋण की स्वीकृति देने से इस माडल के तहत कुल ऋण राशि 60 हजार से ज्यादा हो रही हो तो नया ऋण इस माडल की तहत मंजूर नहीं किया जा सकेगा। एमएफआईएन का कहना है कि ये उपाय एनपीए का बोझ कम करने के उद्देश्य से किए गए हैं।
• एमएमआईएन की रिपोर्ट के अनुसार, छोटे ऋण में सबसे ज्यादा योगदान अधिसूचित बैंकों का है। प्रत्यक्ष एवं बैंकिंग कॉरेस्पांडेंटों के परोक्ष रूप से दिए गए ऋणों को शामिल करते हुए चालू वित्त की पहली तिमाही में माइक्रो फाइनेंस उद्योग का कारोबार 1,06,823 करोड़ रूपये का रहा।
6. आडवाणी आचार समिति के अध्यक्ष मनोनीत
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लोकसभा अध्यक्ष ने संसदीय समितियों का पुनर्गठन कर दिया है। लालकृष्ण आडवाणी को आचार समिति लोकसभा के उपाध्यक्ष डा. एम थम्बीदुरई को सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड) और रमेश पोखरियाल निशंक को सरकारी आश्वासनों की समिति का फिर से अध्यक्ष बनाया गया है।
• सरकारी आश्वासनों पर समिति के सदस्यों में अध्यक्ष रमेश पोखरियाल निशंक के अलावा सदस्य राजेन्द्र अग्रवाल, एंटो एंटनी, तारिक अनवर, प्रो. सौगत बोस, नारणभाई बी कछाड़िया, पी के कुन्हलीकुट्टी, बहादुर सिंह कोली, प्रह्लाद सिंह पटेल, ए टी नाना पाटिल, सुनील कुमार सिंह, के सी वेणुगोपाल, एस आर विजय कुमार शामिल है। एक सीट रिक्त है। इसका कार्यकाल एक सितम्बर से प्रभावी होगा।
• लोकसभा अध्यक्ष ने भाजपा के वरिष्ठ सांसद लालकृष्ण आडवाणी को आचार संबंधी समिति का अध्यक्ष मनोनीत किया है। इस समिति के अन्य सदस्यों में ए अरुणमोझिथेवम, निनांग एरिंग, शेरसिंह गुवाया, हेमंत तुकाराम गोडसे, प्रह्लाद जोशी, भगत सिंह कोश्यारी, भतृहरि माहताब, करिया मुंडा, जयश्रीबेन पटेल, एम रेड्डी, सुमेधानंद सरस्वती, डा. भोला सिंह, राकेश सिंह, अक्षय यादव शामिल हैं।
• सदस्यों के निजी विधेयक एवं संकल्पों संबंधी समिति का अध्यक्ष एम थम्बीदुरई को बनाया गया है। इस समिति के सदस्यों में जयदेव गाला, चौधरी महबूब कौशर, थांगो बेदते, बदरूद्दीन अलमल, रत्न लाल कटारिया, संतोष कुमार, पूनम महाजन, अभिषेक सिंह, कुंवर भारतेन्द्र सिंह, भोला सिंह, पशुपति नाथ सिंह, वाई वी सुब्बारेड्डी, कामाख्या प्रसाद ताशा, शिवकुमार उदासी शामिल हैं।
• करुणाकरण अनुपस्थिति संबंधी समिति के अध्यक्ष बने : लोकसभा अध्यक्ष ने पी करुणाकरण को सदन की बैठक से सदस्यों की अनुपस्थिति संबंधी समिति का अध्यक्ष मनोनित किया।
• समिति के अन्य सदस्यों में सुभाष चंद्र बहेरिया, प्रताप सिंह चौहान, डा. रत्ना डे नाग, दीपेन्दर सिंह हुड्डा, दिनेश कश्यप, हरि माझी, डा. सीताराम नाईक, देवजी एम पटेल, डा. अंबूमणि रामदौस, लखन लाल साहू, नब कुमार सरनिया, बृजभूषण सरण सिंह, प्रो. साधु सिंह, प्रभुभाई नागरभाई बसावा शामिल है।
7. तेजी से घूमते तारे ने भारतीय नोबल विजेता के सिद्धांत की पुष्टि की
• भारतीय अंतरिक्ष विज्ञानी और नोबल विजेता सुब्रमण्यम चंद्रशेखर की 70 साल से भी पहले की गई भविष्यवाणी की पुष्टि अब हुई है। उनके सिद्धांत की यह पहली पुष्टि ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने की है। सुब्रमण्यम ने अपनी इस भविष्यवाणी में कहा था कि तेजी से घूमते हुए तारे ध्रुवित प्रकाश उत्सर्जित करेंगे।
• ऑस्ट्रेलिया की ‘‘न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी’ और ब्रिटेन स्थित ‘‘यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन’ के शोधकर्ताओं ने ‘‘रेगुलुस’ नामक तारे से निकलते ध्रुवित प्रकाश की पहचान के लिए एक बेहद संवेदनशील उपकरण का इस्तेमाल किया।
• ‘‘रेगुलुस’ रात के समय आकाश में सबसे ज्यादा चमकने वाले तारों में से एक है। इस उपकरण की मदद से तारे से जुड़ी अभूतपूर्व जानकारी मिली। इससे वैज्ञानिकों को तारे के घूर्णन की दर और घूर्णन कक्षा में उसकी स्थिति के बारे में पता लगाने में मदद मिली।
• ‘‘यूएनएसडब्ल्यू’ के डेनियल ने कहा, वह 320 किमी प्रति सेकेंड की दर से घूर्णन कर रहा है। वर्ष 1946 में चंद्रशेखर ने तारों के किनारों से ध्रुवित प्रकाश के उत्सर्जन की भविष्यवाणी की थी। इससे स्टेलर पोलरीमीटर जैसे संवेदनशील उपकरणों का विकास संभव हुआ। ये उपकरण इस प्रभाव की पहचान कर सकते हैं।
