Saturday, October 28, 2017

दैनिक समसामयिकी 14 Oct 2017(Saturday)

1.सुशासन के अभाव में पिछड़े कुछ राज्य
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि भारत में विचारों, संसाधनों और क्षमताओं की कमी नहीं है लेकिन कुछ राज्य और इलाके सुशासन के अभाव मे पिछड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री विभिन्न राज्यों के राज्यपालों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के दो दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
• प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, मोदी ने कहा कि जिन प्रदेशों में सुशासन है, वहां गरीबों के कल्याण के लिए सरकार की विभिन्न योजनाएं ठीक ढंग से लागू हो रही हैं।
• मिशन ‘‘इंद्रधनुष’ का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि सरकार की ऐसी पहल को राज्यपाल अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। देश में एकता और एकजुटता की भावना को मजबूत बनाने के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यपालों को एक भारत, श्रेष्ठ भारत और रन फार यूनिटी जैसे कार्यक्रमों में स्वयं को शामिल करना चाहिए।
• उन्होंने कहा कि भारत में विचारों, संसाधनों और क्षमताओं की कमी नहीं है लेकिन कुछ राज्य और इलाके सुशासन के अभाव में पिछड़ रहे हैं। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल कहा था कि राज्यों के राज्यपाल संविधान की पवित्रता को बरकरार रखते हुए समाज में बदलाव के वाहक बन सकते हैं और न्यू इंडिया के संकल्प को जनांदोलन के स्वरूप प्रदान करने के लिये छात्रों एवं शिक्षकों को जोड़ सकते हैं।
• 2022 तक न्यू इंडिया के लक्ष्य का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि इस लक्ष्य को जनांदोलन बनाकर ही हासिल किया जा सकता है। इस संदर्भ में राज्यपालों को छात्रों एवं शिक्षकों से संवाद करना चाहिए।

2. डाक विभाग ने की संपूर्ण बीमा ग्राम योजना की शुरुआत : ग्रामीणों को मिलेगा सस्ता जीवन बीमा

• डाक विभाग ने शुक्रवार को संपूर्ण बीमा ग्राम योजना की शुरुआत की तथा पेशेवरों के लिए डाक जीवन बीमा के दायरे को विस्तृत किया। विभाग ने यह कदम वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने तथा लोगों को किफायती जीवन बीमा उपलब्ध कराने के प्रयासों के तहत किया है।
• संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने आज दोनों मुहिमों की शुरुआत की। नई संपूर्ण बीमा ग्राम योजना के तहत देश के प्रत्येक जिलों से कम से कम एक गांव का चयन किया जाएगा। चयनित गांव के हर परिवार को इस योजना के तहत कम से कम एक ग्रामीण डाक बीमा योजना से जोड़ा जाएगा।
• दूसरी मुहिम के तहत डाक जीवन बीमा के दायरे को बढ़ाया जाएगा। अब यह पेशेवरों, बंबई शेयर बाजार एवं नेशनल स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों के कर्मचारियों को भी उपलब्ध होगा। इससे पहले यह सरकारी और अर्ध सरकारी कर्मचारियों के लिए ही उपलब्ध था।
• संचार मंत्री ने इस मौके पर कहा कि योजना के दायरे को विस्तृत किया गया है ताकि डाक जीवन बीमा के तहत अधिक से अधिक लोगों को लाया जा सके। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों की योजनाओं से इतर डाक विभाग की योजनाओं का प्रीमियम कम होता है तथा बोनस अधिक होता है।
• डाक विभाग ने शुक्रवार को संपूर्ण बीमा ग्राम योजना की शुरुआत की तथा पेशेवरों के लिए डाक जीवन बीमा के दायरे को विस्तृत किया। विभाग ने यह कदम वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने तथा लोगों को किफायती जीवन बीमा उपलब्ध कराने के प्रयासों के तहत किया है।
• संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने आज दोनों मुहिमों की शुरुआत की। नई संपूर्ण बीमा ग्राम योजना के तहत देश के प्रत्येक जिलों से कम से कम एक गांव का चयन किया जाएगा। चयनित गांव के हर परिवार को इस योजना के तहत कम से कम एक ग्रामीण डाक बीमा योजना से जोड़ा जाएगा। दूसरी मुहिम के तहत डाक जीवन बीमा के दायरे को बढ़ाया जाएगा।
• अब यह पेशेवरों, बंबई शेयर बाजार एवं नेशनल स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों के कर्मचारियों को भी उपलब्ध होगा। इससे पहले यह सरकारी और अर्ध सरकारी कर्मचारियों के लिए ही उपलब्ध था।
• संचार मंत्री ने इस मौके पर कहा कि योजना के दायरे को विस्तृत किया गया है ताकि डाक जीवन बीमा के तहत अधिक से अधिक लोगों को लाया जा सके।

3. दहेज कानून पर अपने फैसले की समीक्षा करेगा सुप्रीम कोर्ट

• सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संकेत दिया कि वह दहेज विरोधी कानून में सख्ती कम कर देने वाले अपने दो माह पुराने फैसले पर फिर से गौर करेगा। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला वाकई उत्पीड़न की शिकार महिलाओं के अधिकारों में कटौती कर रहा है।
•  27 जुलाई को दो सदस्यीय पीठ ने निर्देश दिया था कि दहेज से संबंधित उत्पीड़न के मामलों में तब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए जब तक कि आरोपों की सही तरह जांच-पड़ताल न हो जाए, क्योंकि निदरेष लोगों के मानवाधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
• मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र, जस्टिस डीवाइ चंद्रचूड़ और जस्टिस एएम खानविलकर की खंडपीठ ने कहा कि हम उस फैसले से सहमत नहीं हैं और प्रथम दृष्ट्या समझते हैं कि दिशा-निर्देश संबंधित कानून के दायरे में ही होने चाहिए। हमें लगता है कि उस आदेश से महिलाओं के अधिकारों में कटौती हुई।
• महिलाएं दहेज के कारण उत्पीड़न का शिकार होती हैं और उनके अधिकारों में कटौती नहीं होनी चाहिए। खंडपीठ एक एनजीओ न्याय आधार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह एनजीओ महाराष्ट्र में अहमदनगर जिले की कुछ महिला वकीलों ने बनाया है।
• संगठन ने दहेज उत्पीड़न से संबंधित धारा 498-ए को और कड़ा बनाने की मांग की है। संगठन के अनुसार अगर ऐसा नहीं किया जाता तो पीड़ित महिलाओं के हाथ में जो भी अधिकार हैं उनकी कोई अहमियत नही रह जाएगी।
• 27 जुलाई के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने इस धारा के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा था कि आरोपों की पड़ताल किए बिना किसी की गिरफ्तारी नही होनी चािहए। कोर्ट ने इसके अलावा कुछ अन्य दिशा-निर्देश भी जारी किए थे जिनका उद्देश्य इस कानून के दुरुपयोग को रोकना था।
• कोर्ट ने कहा था कि हर जिले में एक या अधिक परिवार कल्याण समिति बननी चाहिए और पुलिस या मजिस्टेट के पास आने वाली दहेज उत्पीड़न से संबंधित हर शिकायत इस समिति के पास जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि इस समिति में सामाजिक कार्यकर्ता, सेवानिवृत्त लोग, कार्यरत अधिकारियों की पत्नियां हो सकती हैं।

4. पांच जजों की संविधान पीठ करेगी सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर फैसला
• धार्मिक आजादी के अधिकार और महिलाओं के साथ लिंग आधारित भेदभाव के मौलिक अधिकारों की रस्साकसी के अहम कानूनी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ विचार करेगी।
• शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर रोक का मामला पांच जजों की संविधान पीठ को भेज दिया।
• संविधान पीठ के सामने विचार के लिए कई प्रश्न भेजे गए हैं। लेकिन, जोर इस पर होगा कि धार्मिक संस्थाओं को धार्मिक रीति-रिवाज और प्रबंधन की आजादी ऊपर है या किसी व्यक्ति का धार्मिक विश्वास और पूजा-पाठ की आजादी।
• इस पर भी विचार होगा कि धार्मिक संस्था होने का दावा कर रहा भगवान अयप्पा का सबरीमाला मंदिर क्या महिलाओं का प्रवेश रोक सकता है? सुप्रीम कोर्ट में 2006 से इंडियन यंग लायर्स एसोसिएशन की याचिका लंबित है। इसमें 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर लगी रोक हटाने की मांग की गई है।
• केरल ने दो बार रुख बदला : इस केस का एक रोचक तथ्य यह भी है कि 11 वर्ष मामला लंबित रहने के दौरान केरल सरकार ने दो बार अपना रुख बदला। एक बार याचिका का विरोध करते हुए कहा कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी  और तपस्या में लीन हैं। इसलिए 10 से 50 वर्ष की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती। लेकिन पिछले साल नवंबर में आई वाम दलों की सरकार ने दोबारा रुख बदलते हुए कहा कि मंदिर में सभी आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति होनी चाहिए।
• बदलाव के चलते महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाने की प्रथा लिंग आधारित भेदभाव नहीं है?
• इसे समानता, लिंग आधारित भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ कानूनों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा?
• क्या इसे धार्मिक आजादी के तहत संरक्षण दिया जा सकता है?
• 10 से 50 वर्ष की महिलाओं को बाहर रखना धार्मिक रीति-रिवाज का अभिन्न हिस्सा माना जा सकता है?
• क्या धार्मिक संस्था प्रबंधन की धार्मिक आजादी के तहत इस तरह के रीति रिवाज का दावा कर सकती है?
• क्या अयप्पा मंदिर को धार्मिक संस्था माना जाएगा, जबकि उसका प्रबंधन केरल और तमिलनाडु सरकार के बजट से किया जाता है?

• राजधानी के सभी धार्मिक स्थलों में लगे लाउडस्पीकर पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याची ने तर्क दिया है कि यह लोगों के निजता के अधिकार का हनन है।
• कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश व न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की बेंच ने मामले में केंद्र व दिल्ली सरकार के साथ दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 29 जनवरी 2018 को होगी।
• याची संजीव कुमार के अनुसार, लाउडस्पीकरों पर प्रतिबंध लगाने से संविधान के अनुच्छेद 25 व 26 के प्रावधान का उल्लंघन नहीं होगा। याची ने दावा किया कि लाउडस्पीकर कभी भी किसी धर्म का हिस्सा नहीं रहा।
• लाउडस्पीकर के शोर से लोगों के अकेले रहने, दूसरों से बात करने, पढ़ने, सोने आदि के मौलिक अधिकारों का हनन होता है। धार्मिक स्थलों पर चार से पांच हजार साल पहले लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं होता था, क्योंकि लाउडस्पीकर 1924 में अस्तित्व में आया था।

5. परमाणु शक्ति का दर्जा बिना नहीं बनेंगे एनपीटी का हिस्सा

• भारत ने फिर परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर अपना रुख स्पष्ट किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिध अमनदीप सिंह गिल ने कहा कि भारत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र का दर्जा मिले बगैर एनपीटी का हिस्सा नहीं बनेगा।
• साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु परीक्षण पर एकतरफा प्रतिबंध को लेकर भारत पूर्व की भांति प्रतिबद्ध है। गिल ने अंतरिक्ष में हथियार तैनात करने की बढ़ती होड़ पर भी चिंता जताते हुए इसे रोकने के लिए समुचित उपाय करने का आह्वान किया।
• भारतीय प्रतिनिधि ने यूएन महासभा में निरस्त्रीकरण पर जारी बहस में परमाणु हथियारों पर देश का पक्ष रखा। उन्होंने कहा, ‘गैर परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के तौर पर एनपीटी में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता।
• इस पर भारत का रुख जगजाहिर है, ऐसे में उसे दोहराने की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद भारत वैश्विक अप्रसार के उद्देश्यों को बरकरार रखने और उसे मजबूत करने के कदम का समर्थन करता है।
• खासकर विभिन्न देशों द्वारा एनपीटी समेत विभिन्न करार में तय लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन का पक्षधर है।’

6. अल नीनो से कार्बनडाइऑक्साइड में दो हजार सालों की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

• वर्ष 2015-16 के दौरान लंबे समय तक चले अल नीनो के कारण वातावरण में कार्बनडाइऑक्साइड की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस गैस का स्तर कम से कम 2000 सालों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा। यह बात अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के एक अध्ययन में सामने आई है।
• नासा के ऑर्बिटिंग कार्बन ऑब्जर्वेटरी-2 (ओसीओ-2) उपग्रह से मिले पहले 28 महीने के आंकड़ों के विश्लेषण से शोधकर्ता इस निर्णय पर पहुंचे हैं कि दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और इंडोनेशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अल नीनो से संबंधित ताप और सूखा वैश्विक कार्बनडाइऑक्साइड की मात्र में रिकॉर्ड वृद्धि के लिए जिम्मेदार रहा।
• क्या है अल नीनो : अल नीनो समुद्र के उस गर्म जल को कहा जाता है, जिसका विकास प्रशांत महासागर में होता है और यह विश्वभर में तापमान और बारिश में बदलाव के लिए जिम्मेदार होता है। साल 2015-16 का अल नीनो काफी लंबा था और वैज्ञानिकों को संदेह है कि यह बढ़े हुए कार्बनडाइऑक्साइड में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार था।
• हालांकि, वैज्ञानिकों को अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि यह कैसे हुआ। उनके मुताबिक, यह अभी भी शोध का विषय बना हुआ है।
• 12.5 गीगा टन अधिक गैस उत्सर्जित : अमेरिका में नासा की जेट प्रक्षेपण प्रयोगशाला में कार्यरत और इस अध्ययन का नेतृत्व करने वालीं जुनजी ल्यू के मुताबिक, इन तीन उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों ने साल 2011 के मुकाबले वातावरण में 2.5 गीगा टन अधिक कार्बन उत्सर्जन किया।
• ये अतिरिक्त कार्बनडाइऑक्साइड 2011 से गैस के उच्चतम स्तर वाले 2015-16 के दौरान वातावरण में इस गैस वृद्धि दर के अंतर का कारण है।

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