1.पीएम मोदी ने दिया डिजिटल साक्षरता पर जोर, बोले डिजिटल इंडिया से : हमने बदली विकास की परिभाषा
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आह्वान किया कि देश में किसी भी कीमत पर डिजिटल साक्षरता के मामले में विभाजन नहीं पैदा होना चाहिए। उन्होंने इस पर रोक लगाने और केवल ज्ञान आधारित नवाचार की जगह आवश्यकता आधारित नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया।
• मोदी ने यहां आईआईटी गांधीनगर के 1700 करोड़ की लागत से निर्मित तथा 400 एकड़ में फैले नए परिसर तथा ग्रामीण डिजिटल साक्षरता मिशन के लोकार्पण के मौके पर बोल रहे थे। कार्ल मार्क्स की र्चचा करते हुए मोदी ने कहा कि एक समय में उनका वर्ग संघर्ष और विभाजन का दर्शन चलता था जो अब सिमट कर नाम मात्र का रह गया है पर डिजिटल साक्षरता के मामले में विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए।
• इस मामले में सतर्क रहना होगा कि कहीं ऐसा न हो कि कुछ लोग इसमें माहिर हों और बहुत लोगों को कुछ भी पता न हो। यह सामाजिक समरसता के लिए संकट पैदा कर सकता है। डिजिटल साक्षरता और डिजिटल इंडिया जैसे अभियान भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी प्रशासन और सुशासन की गारंटी बन सकते हैं।
• व्यापारी को लालफीताशाही से बचाना है : द्वारका में उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि देश का व्यापारी लालफीताशाही और फाइलों तथा बाबुओं और साहबों के चक्कर लगाने के चक्कर में फंस जाए। इसलिए वित्त मंत्री ने कल जीएसटी काउंसिल में सबको राजी कर महत्वपूर्ण फैसले लिये जिनका एक स्वर में पूरे देश में स्वागत हुआ है।
• हर राज्य में होंगे 15-20 हवाई अड्डे : चोटिला में मोदी ने कहा कि उड्डयन क्षेत्र के निरंतर प्रसार और उनकी सरकार की ओर से तैयार संबंधित नीति के चलते एक समय ऐसा आएगा जब हर राज्य में 15 से 20 हवाई अड्डे होंगे और छोटे-छोटे शहर भी हवाई सेवा से जुड़े होंगे।
2. सरकार ने नई हज नीति पेश की
• सरकार ने शनिवार को नई हज नीति पेश कर दी, जिसमें 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को बिना मेहरम (जिसके साथ खून का रिश्ता हो) के हज पर जाने की इजाजत देने सहित कई कदम सुझाए गए हैं। हज नीति 2018-22 में हज यात्रियों को समुद्री मार्ग से भेजने के विकल्प पर काम करने की बात की गई है।
• इसमें यह प्रावधान किया गया है कि हजयात्रियों के प्रस्थान के स्थानों की संख्या को 21 से घटाकर नौ किया जाएगा।
• हज नीति तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार, नई हज नीति को 2012 के उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक तैयार किया गया है।
• शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि 10 साल की अवधि में सब्सिडी खत्म की जाए। नकवी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश में स्पष्ट रूप से सब्सिडी के बारे में बात की गई है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि हज सब्सिडी खत्म हो और गरीब हजयात्रियों पर बोझ कम पड़े।
• अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से गठित समिति के संयोजक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अफजल अमानुल्लाह थे। पूर्व न्यायाधीश एसएस पार्कर, भारतीय हज समिति के पूर्व अध्यक्ष कैसर शमीम और इस्लामी जानकार कमाल फारूकी सदस्य थे तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में हज प्रभारी संयुक्त सचिव जे. आलम समिति के सदस्य सचिव थे।
• नकवी ने कहा, 2018 में हज नई हज नीति के तहत होगा। प्रस्तावित सुविधाओं को देखते हुए यह एक बेहतर नीति है। यह पारदर्शी और जनता के अनुकूल नीति होगी। यह हज यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
• अब कुल कोटे के 70 फीसद हजयात्री हज समिति के जरिए जाएंगे तो 30 फीसद निजी टूर ऑपरेटरों के जरिए हज पर जाएंगे।
• अब 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं बिना मेहरम के हज पर जा सकेंगी, हालांकि वे चार महिलाओं के समूह में जा सकेंगी।
• मेहरम के लिए कोटा 200 से बढ़ाकर 500 करने का भी प्रस्ताव है। मेहरम उसे कहते हैं, जिससे महिला का निकाह नहीं हो सकता। मसलन, पिता, सगा भाई, बेटा और पौत्र-नवासा मेहरम हो सकते हैं।
• हज के लिए प्रस्थान स्थलों की संख्या को 21 से हटाकर नौ किया जाएगा।द दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू और कोच्चि से लोग हज के लिए प्रस्थान कर सकेंगे।
• समुद्री रास्ते से हज के सफर के विकल्प पर सऊदी अरब सरकार से विचार-विमर्श करने और पोत कंपनियों की रुचि एवं सेवा की थाह लेने के लिए विज्ञापन देने का भी प्रस्ताव है।
• राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए हज कोटे का प्रावधान उनकी यहां की मुस्लिम आबादी के अनुपात में किया जाएगा।
3. उप्र को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए शबरी संकल्प अभियान
• उत्तर प्रदेश सरकार ‘‘ शबरी संकल्प अभियान’ के तहत अगले तीन सालों में सूबे को कुपोषण से आजादी दिलाएगी। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनुपमा जायसवाल ने आज यहां कहा कि प्रदेश की उन्नति एवं विकास तभी संभव है, जब वहां के निवासी स्वस्थ, सबल हों।
• स्वस्थ और क्षमतावान जनशक्ति की उपलब्धता तभी संभव है, जब मातृ एवं शिशु दोनों स्वस्थ होंगे।उन्होंने कहा कि शबरी संकल्प पोषण योजना आगामी 23 अक्टूबर को‘‘ वजन दिवस’ के साथ प्रारंभ होगी। कुपोषण से सर्वाधिक ग्रसित प्रदेश के 29 जिलों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जन्म के समय किसी भी बच्चे का वजन ढाई किलो से कम न हो।
• इसके लिए बच्चों और महिलाओं को बड़े पैमाने पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य मंत्री ने बताया कि नीति आयोग ने भी प्रदेश के 29 जिलों को सर्वाधिक कुपोषण से ग्रसित बताया है। इन जिलों में प्रभावित गांवों को चिह्नित करने के बाद कुपोषण से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री ने बताया कि बाल विकास एवं पुष्टाहार योजना के तहत लाभार्थियों का शत-प्रतिशत सत्यापन कर उनकी सूची तैयार की जा रही है।
• लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं के तहत उपलब्ध कराये जा रहे लाभ का रिकॉर्ड रखा जाएगा ताकि उनकी निगरानी की जा सके। उन्होंने बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे राज्य से कुपोषण जैसी व्याधि से निपटने के लिए कार्य करें।
• मातृ, शिशु तथा किशोरियों के स्वास्य को सुधारने के साथ-साथ कुपोषण को समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करें।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कुपोषण से निपटने के लिए गंभीर है। इसके कारणों का पता लगाना होगा, ताकि इसे जड़ से दूर किया जा सके।
• इसकी रोकथाम सही समय पर की जाए तो इससे निपटा जा सकता है। ग्राम स्वास्य पोषण दिवस को और प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गये हैं। इसके तहत ज्यादा से ज्यादा बच्चों का वजन लेने के साथ-साथ उनका टीकाकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
• माताओं के रक्तचाप और खून तथा वजन की भी जांच की जाएगी। इसमें ग्राम प्रधान की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा कुपोषण मुक्त गांव को‘‘ मॉडल विलेज’ के रूप में विकसित किये जाने की है।
4. विदेश व्यापार नीति की मध्यावधि समीक्षा होने की संभावना नहीं
• सरकार पंचवर्षीय योजना की तर्ज पर एकमुश्त पंचवर्षीय विदेश व्यापार नीति के एलान के स्थान पर सरकार वक्त की जरूरत के मुताबिक आयातकों और निर्यातकों के लिए नीतिगत फैसले लेने को प्राथमिकता दे रही है। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग को बढ़ाने के लिए निरंतर नीतिगत प्रयास करने होंगे जिसके लिए निश्चित अवधि वाली नीति तैयार करने का इंतजार नहीं किया जा सकता है।
• सरकार ने मौजूदा पांच वर्षीय विदेश व्यापार नीति 2015 में जारी की थी। इस वर्ष इसकी मध्यावधि समीक्षा होनी थी। लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई एलान नहीं हुआ है। वाणिज्य व उद्योग मंत्रलय से संकेत मिल रहे हैं कि संभवत: इस वर्ष मध्यावधि समीक्षा के लिए कोई औपचारिक बयान जारी न हो।
• निर्यातकों की समस्याओं पर विचार के लिए वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु की तरफ से बुलाई गई एक बैठक के बाद वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया ने एक सवाल के जवाब में कहा भी कि इस संबंध में कोई औपचारिक नीतिगत एलान होगा या नहीं, इसका निर्णय खुद मंत्री लेंगे।
• अभी तक की परंपरा के मुताबिक प्रत्येक पांच वर्षीय विदेश व्यापार नीति की तीसरे वर्ष में मध्यावधि समीक्षा की जाती थी। यह कार्य सितंबर के अंत तक पूरा कर लिया जाता था। उसके बाद निर्यातकों व आयातकों के लिए आवश्यक नीतिगत बदलावों की घोषणा की जाती थी जो नीति की शेष अवधि में जारी रहते थे।
• वाणिज्य मंत्रलय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बदलते वैश्विक परिदृश्य और प्रतिस्पर्धा में अब नीतिगत बदलावों के लिए दो-तीन वर्ष की इंतजार करना संभव नहीं है। बाजार की जरूरतें तेजी से बदल रही हैं। अर्थव्यवस्था में भी लगातार बदलाव हो रहे हैं।
• इस दृष्टि से प्रत्येक उद्योग क्षेत्र की रफ्तार बनाये रखने के लिए यह आवश्यक है कि समय-समय पर जरूरत के मुताबिक निर्णय होते रहें। यही नियम आयात निर्यात क्षेत्र पर भी लागू होता है। अधिकारी का मानना है कि यदि किसी क्षेत्र विशेष के निर्यातक या आयातक किसी दिक्कत में फंसते हैं तो उसका निदान उसी वक्त करना होगा अन्यथा वे अंतरराष्ट्रीय बाजार की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे।
• सरकार इस तरह के दस्तावेजों को आज के माहौल में अप्रासंगिक मान रही है। सरकार ने पंचवर्षीय योजना बनाने का काम भी अब बंद कर दिया है। देश की आखिरी पंचवर्षीय योजना दस्तावेज 2012 से 2017 के लिए बना था। 1इस साल मार्च में इसकी अवधि समाप्त हो चुकी है।
• उसके बाद सरकार ने नयी योजना का एलान नहीं किया है। इससे पहले इस योजना की मध्यावधि समीक्षा भी नहीं हुई थी। इसी तर्ज पर अब माना जा रहा है कि पांच वर्ष के लिए आयात निर्यात नीति बनाने की परंपरा भी बंद की जा सकती है।
5. परमाणु हथियार प्रतिबंध करार का हिस्सा नहीं बनेगा अमेरिका
• इंटरनेशनल कैंपेन टू एबोलिश न्यूक्लियर वेपंस (आइसीएएन) को वर्ष 2017 का शांति का नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद भी परमाणु हथियार संपन्न देश अमेरिका के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह परमाणु हथियार को कानूनी तौर पर प्रतिबंधित करने वाले करार का हिस्सा नहीं बनेगा। हालांकि आइसीएएन की लगातार कोशिशों से संयुक्त राष्ट्र के 122 सदस्य देशों ने परमाणु हथियार को प्रतिबंधित करने वाले समझौते को स्वीकार कर लिया है।
• इसपर और 50 देशों के हस्ताक्षर के बाद यह अमल में आएगा, लेकिन अमेरिकी रुख से करार के प्रभावी होने की संभावना बेहद कम है। रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इजरायल व उत्तर कोरिया ने भी करार से दूरी बना रखी है।1अमेरिकी विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता ने कहा, ‘इस घोषणा (नोबेल का शांति पुरस्कार) से संधि के प्रति अमेरिका के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है।
• अमेरिका न तो इसका समर्थन करता है और न ही ‘परमाणु हथियार निषेध संधि’ पर हस्ताक्षर करेगा। करार से दुनिया ज्यादा शांतिपूर्ण नहीं हो पाएगी। इसकी मदद से एक भी परमाणु हथियार को खत्म नहीं किया जा सकेगा। साथ ही किसी भी देश की सुरक्षा भी नहीं दुरुस्त होगी।’
• विदेश विभाग के प्रवक्ता ने मौजूदा परमाणु अप्रसार संधि के तहत ही काम करने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका मौजूदा व्यवस्था के तहत ही परमाणु हथियार निरस्त्रीकरण के लिए अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में काम करता रहेगा।

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