Sunday, September 3, 2017

एएमएस पर विश्व व्यापार संगठन में भारत और चीन द्वारा संयुक्त प्रस्ताव:

भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद सुलझने के बाद सरकार ने अमीर देशों द्वारा अपने किसानों को दी जा रही सब्सिडी के विरोध में चीन के साथ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को भेजे गए भारत-चीन संयुक्त प्रस्ताव का समर्थन दोहराया है। दोनों देशों ने संयुक्त रूप से जुलाई में डब्ल्यूटीओ को प्रस्ताव सौंपा था, जिसमें विकसित देशों द्वारा दी जाने वाली कृषि सब्सिडी को व्यापार बिगाडऩे वाली सबसे सबसे खराब व्यवस्था बताते हुए वापस लिए जाने की मांग की गई है।

31 अगस्त 2017 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की सहायता खत्म की जानी चाहिए, जो घरेलू समर्थन को लेकर चल रही चर्चा की पूर्वशर्त है। दोनों देशों का संयुक्त प्रस्ताव इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि दिसंबर में ब्यूनस आयर्स में 11वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन होने जा रहा है। संयुक्त प्रस्ताव अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्राजील के नेतृत्व में अमीर देशों द्वारा विकासशील देशों की सब्सिडी को निशाना बनाए जाने विरोध में आया है। विकसित देश अपनी अर्थव्यवस्था के तहत भारी मात्रा में कृषि सब्सिडी बहाल रखे हुए हैं।

प्रस्ताव के विरोध में ब्राजील और यूरोपीय संघ पहले ही साथ आ गए हैं और डब्ल्यूटीओ में आक्रामक रूप से विरोध कर रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है, 'भारत व चीन ने संयुक्त रूप से एक प्रस्ताव डब्ल्यूटीओ को सौंपा है जिसमें विकसित देशों द्वारा दी जा रही कृषि सब्सिडी को समाप्त करने का आह्वान किया गया है।' बयान के अनुसार प्रस्ताव में इस सब्सिडी को 'कृषि सब्सिडी का सबसे अधिक व्यापार बिगाड़ू रूप' बताया गया है। डब्ल्यूटीओ की भाषा में इस प्रकार की सब्सिडी को 'एग्रीगेट मेजरमेंट आफ सपोर्ट (एएमएस)' या 'एंबर बाक्स' सब्सिडी कहा जाता है।

संयुक्त पत्र में कहा गया है कि अमेरिका, यूरोपीय संघ तथा कनाडा सहित विकसित देश अपने किसानों को लगातार भारी भरकम सब्सिडी दे रहे हैं। यह सब्सिडी विकासशील देशों के लिए तय सीमा से कहीं अधिक है।

पृष्ठभूमि:

विकसित देशोंं द्वारा 1995 से ही दी जा रही भारी भरकम सब्सिडी वाले उत्पादों का उल्लेख करते हुए इस पत्र में कहा गया है कि इनमें से तमाम उत्पादों पर 50 प्रतिशत से ऊपर और यहां तक कि कुछ उत्पादों पर 100 प्रतिशत से ऊपर सब्सिडी दी जाती है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, 'संयुक्त पत्र में अमेरिका, यूरोपीय संघ और कनाडा सहित विकसित देशों का हवाला दिया गया है, जो अपने किसानों को कारोबार बिगाडऩे वाली सब्सिडी लगातार मुहैया करा रहे हैं, जो विकासशील देशों के लिए तय की गई सीमा की तुलना में बहुत ज्यादा है।'

इसके अनुसार विकसित देशों द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी लगभग 160 अरब डॉलर की है। वहीं दूसरी ओर भारत जैसे देशों द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी लगभग 260 डॉलर प्रति किसान सालाना है। इस तरह  कुछ विकसित देश किसानों को विकासशील देशों की तुलना में 100 गुना से ज्यादा सब्सिडी मुहैया करा रहे हैं। इस मसले पर भारत ने कहा कि कृषि सब्सिडी तय सीमा से अधिक नहीं दी जानी चाहिए।

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