Friday, September 1, 2017

निजता के अधिकार के आदेश के बाद एलजीबीटी समुदाय आन्नदित

निजता के अधिकार पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से एलजीबीटी समुदाय में आशा और उत्साह आई है। इस फैसले ने संभावना को पुन: रौशन किया है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 जल्द ही इतिहास हो सकती है, जिसके अनुसार समलैंगिक यौन संबंध एक अपराध है।
     जुलाई, 2009 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 पर चोट की थी।
      हालांकि, इस फैसले को अधिप्रभावी करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 आईपीसी को लोकप्रिय रूप से कौशल फैसले के रूप में संदर्भित किया है।
      हाल में निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एलजीबीटी नागरिक सभी की तरह न केवल निजता का अधिकार , बल्कि समानता का अधिकार, स्वतंत्र अभिव्यक्ति और जीवन का अधिकार भी प्राप्त है।

स्रोत- द हिंदू

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