Tuesday, August 29, 2017

संविधान पीठ के सभी नौ सदस्यों का सर्वसम्मत फैसला : निजता मौलिक अधिकार

• सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने #एकमत से निजता को मौलिक अधिकार कहा है। #आधार की अनिवार्यता से उपजे विवाद के कारण सुप्रीम कोर्ट का फैसला अहम माना जा रहा है। हालांकि आधार को #कल्याणकारी योजनाओं के लिए सरकार अनिवार्य कर सकती है या नहीं, इस पर एक अलग #पांच_सदस्यीय संविधान पीठ सुनवाई करेगी।

• सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजता मानव गरिमा का संवैधानिक मूल तत्व और संरक्षित अधिकार है जो संविधान के #अनुच्छेद21 में प्रदत्त जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता की गारंटी के अधिकार से ही उत्पन्न होता है।

• संविधान पीठ ने कहा कि निजता व्यक्ति की #गरिमा को सुनिश्चित करती है और यह जीवन का मूल तत्व है जिसका उद्देश्य #जीवन और #स्वतंत्रता का संरक्षण करना है।
• निजता के तत्व #संविधान के #भाग_तीन में शामिल : चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस आरके अग्रवाल, एस अब्दुल नजीर, डी वाई चन्द्रचूड ने एक जजमेंट दिया जिसे जस्टिस चन्द्रचूड ने लिखा।

• नौ सदस्यीय संविधान ने कहा कि निजता के तत्वों का मुद्दा संविधान के भाग तीन में शामिल मौलिक अधिकारों द्वारा प्रदत्त स्वतंत्रता और गरिमा की गारंटी के विभिन्न परिप्रेक्ष्य में उठता है।
• जस्टिस चन्द्रचूड ने अपनी और तीन अन्य न्यायाधीशों की ओर से लिखे फैसले में कहा कि निजता एक व्यक्ति की स्वतंत्रता को सुरक्षा प्रदान करती है और जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को नियंत्रित करने की व्यक्ति की क्षमता को स्वीकार करती है।
• #संपूर्ण #मौलिक #अधिकार : संविधान के अंतर्गत निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित करने के पांच अन्य न्यायाधीशों के फैसले से सहमति व्यक्त करते हुए इन चार न्यायाधीशों ने कहा कि अन्य मौलिक अधिकारों की तरह ही #निजता_का_अधिकार_सम्पूर्ण_अधिकार_नहीं_है।

• संविधान पीठ ने कहा कि यह निर्णय देते समय हम #डिजिटल_युग में निजता के परिणाम और खतरों के प्रति सजग हैं। उन्होंने सरकार से कहा कि इन आंकड़ों की सुरक्षा के पहलू पर विचार करके इनकी सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था की जाए।

No comments:

Post a Comment