Tuesday, August 29, 2017

24 August 2017(Thursday)

1.आइएएस, आइपीएस अफसरों के लिए नई कैडर पॉलिसी

• आइएएस, आइपीएस व आइएफएस अफसरों के लिए सरकार ने नई कैडर पॉलिसी को अंतिम रूप दे दिया है। नई नीति का उद्देश्य देश की शीर्ष नौकरशाही में राष्ट्रीय एकीकरण सुनिश्चित करना है। नई नीति अगले साल से अमल में आ जाएगी।
• इसमें सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि कैडर का आवंटन अब राज्य नहीं, बल्कि जोन के आधार पर किया जाएगा।
• अभी तक जो व्यवस्था अमल में है उसके मुताबिक अफसर राज्य के आधार पर कैडर का चयन करते रहे हैं, लेकिन देखा जा रहा है कि वे गृह क्षेत्र को वरीयता देते हैं।
• सरकार का मानना है कि किसी भी अफसर के काम करने का तरीका तभी प्रभावी हो सकता है जब वह दूसरे व जटिल राज्य में अपना सेवा दे। सरकार ने अब 26 कैडर पांच जोन में विभाजित किए हैं।
• कार्मिक मंत्रालय  के एक अधिकारी ने बताया कि नई पॉलिसी में अफसर पहली वरीयता में किसी भी जोन के तहत आने वाले राज्य का चयन कर सकते हैं, लेकिन दूसरी, तीसरी, चौथी व पांचवीं वरीयता उसे दूसरे जोनों से देनी होगी।
• इसमें ख्याल रखा गया है कि अफसर को दूर के राज्यों में काम करने का मौका मिले, क्योंकि अभी तक वे पहली वरीयता में गृह राज्य को रखते थे तो दूसरी में पड़ोस के सूबे को।
• नई नीति यह सुनिश्चित करेगी कि अगर कोई अधिकारी बिहार का है तो उसे दक्षिणी और पूर्वोत्तर  के राज्यों में भी काम करना होगा, जो कि स्वाभाविक रूप से उनके पसंदीदा कैडर नहीं होंगे।
• अधिकारी के मुताबिक यह नीति यह सुनिश्चित करेगी कि देश के शीर्ष प्रशासनिक तंत्र के बीच राष्ट्रीय एकीकरण का भाव हो, क्योंकि उन्हें उनके मूल निवास वाले राज्य से इतर राज्यों में काम करना होगा।
• उन्होंने कहा कि नई नीति अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा के पीछे जो मूल आधार है उसे मजबूती देने का काम करेगी। प्रशासनिक सेवा के अफसरों के बारे में यह सोचा जाता है कि उनके पास तरह-तरह की परिस्थितियों का अनुभव होगा। यह अनुभव तभी हासिल किया जा सकता है जब वे ऐसे राज्यों में भी काम करें जो उनके लिए नए हैं।1नई नीति के मुताबिक सिविल सेवा की परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को कैडर के संबंध में अपनी प्राथमिकता घटते हुए क्रम में देखनी होगी।
• चयन के बाद पसंद का यह क्रम बना रहेगा और उसमें बदलाव की इजाजत नहीं दी जाएगी। अगर कोई अभ्यर्थी अपनी वरीयता सूची नहीं देता है तो माना जाएगा कि उसकी पसंदीदा जगह कोई नहीं है।

2. क्रीमीलेयर की सीमा बढ़ी, ज्यादा लोगों को होगा लाभ

• केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अन्य पिछड़ा वगरे (ओबीसी) की श्रेणी में क्रीमीलेयर की सीमा छह लाख रपए से बढ़ाकर आठ लाख प्रतिवर्ष कर दिया है। ओबीसी के उप वर्गीकरण के लिए भी एक आयोग बनाने का फैसला लिया गया है।
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कईमहत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बताया कि ओबीसी श्रेणी में 8 लाख रूपये  तक प्रति वर्ष आमदनी वालों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। इससे दो लाख की अतिरिक्त आय वालों को भी ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।
• एक सवाल के जवाब में जेटली ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को इस फैसले के दायरे में लाने के प्रस्ताव पर सरकार विचार कर रही है।
• आयोग के गठन को मंजूरी : मंत्रिमंडल ने ओबीसी के उप वर्गीकरण के मुद्दे पर विचार के लिए एक आयोग गठित करने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दे दी। कैबिनेट की बैठक में संविधान के अनुच्छेद 340 के तहत अन्य पिछड़ा वर्गो के उप वर्गीकरण के मुद्दे पर विचार के लिए एक आयोग गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
• आयोग अपने अध्यक्ष की नियुक्ति की तिथि से 12 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगा। इस आयोग को अन्य पिछड़ा वगरे के उप वर्गीकरण पर विचार करने वाले आयोग के नाम से जाना जाएगा।
• सुप्रीम कोर्ट ने डब्ल्यूपी (सी) न. 930/1990 (इंद्रा साहनी और अन्य बनाम भारत सरकार) के मामले में 16 नवम्बर 1992 के फैसले में यह कहा था कि किसी राज्य में पिछड़ी जातियों को पिछड़ा और अति पिछड़ा के रूप में कैटेगराइज्ड करने पर कोई संवैधानिक या कानूनी रोक नहीं है। अगर सरकार ऐसा चाहे तो कानूनी दिक्कत नहीं है।
• क्या करेगा आयोग: आयोग केंद्रीय लिस्ट में शामिल ओबीसी के बारे में ओबीसी की डिटेल कैटेगरी में शामिल जातियों/समुदायों के बीच आरक्षण के लाभ के असमान डिस्ट्रीब्यूशन की जांच करेगा।
• आयोग ओबीसी के भीतर सब कैटेगराइजेशन के लिए मैकेनिज्म, मानक और पैरा-मीटर्स का साइंटिफिक तरीके से आकलन करेगा।
•  आयोग ओबीसी की केंद्रीय लिस्ट में संबंधित जातियों/समुदायों/उप जातियों आदि की पहचान करेगा और उन्हें उनकी संबंधित सब कैटेगरी में कैटेगराइजेशन की पहल शुरू करेगा।
•  राज्यों में ओबीसी में है सब कैटेगरी
• अभी देश के 9 राज्यों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पुडुचेरी, हरियाणा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु में पिछड़ी जातियों के सब-कैटेगराइजेशन व्यवस्था है।
• क्या है क्रीमीलेयर : क्रीमीलेयर में आने वाले ओबीसी के लोग आरक्षण के दायरे से बाहर हो जाते हैं। सरकारी नौकरियों और एजुकेशन इंस्टीट्यूट ओबीसी के लिए 27 फीसद आरक्षण है।
• इस आरक्षण का लाभ लेने में शर्त यह है कि परिवार की सालाना इनकम क्रीमीलेयर के दायरे में ना आती हो। अभी तक सालाना
• इनकम लिमिट छह लाख रूपये  थी। अब यह 8 लाख कर दी गई है।जिनकी सालाना आय इस दायरे से अधिक होगी, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकेगा

3. सरकारी बैंक कम होंगे लेकिन ताकत बढ़ेगी

• विरासत में मिली लचर बैंकिंग व्यवस्था को सुधारने की कोशिश केंद्र सरकार के स्तर पर लगातार चल रही है। इस दिशा में बुधवार को कैबिनेट ने सरकारी बैंकों में विलय व एकीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
• सरकार की मंशा यह है कि तीन वर्षो में मौजूदा 21 बैंकों की संख्या घटाकर 10-12 कर दी जाए। बाद में यह संख्या और घटेगी।
• कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया, ‘नई वैकल्पिक व्यवस्था का उद्देश्य देश में मजबूत व प्रतिस्पर्धी बैंकों को स्थापित करन है। लेकिन विलय व एकीकरण का प्रस्ताव बैंकों की तरफ से ही आएगा। सरकार पूरी तरह से इन बैंकों के वाणिज्यिक हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला करेगी।’
• माना जा रहा है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत विभिन्न मंत्रलयों को मिलाकर एक समिति गठित की जाएगी। वित्त मंत्री जेटली इस समिति के अध्यक्ष होंगे।
• यह समिति रिजर्व बैंक के सहयोग से बैंक विलय के प्रस्तावों का रोडमैप बनाएगी और बैंकों की तरफ से आने वाले प्रस्तावों को लागू करने में मदद करेगी। कुछ बैंकों में विलय की बात पहले से ही शुरू हो चुकी है। इस बारे में पहला प्रस्ताव अगले कुछ हफ्तों के भीतर ही सरकार को मिलने के आसार हैं।
• वित्त मंत्रालय  के सूत्रों का कहना है कि पिछले वर्ष भारतीय स्टेट बैंक में उसके पांच सहायक बैंक व भारतीय महिला बैंक के विलय की सफलता के बाद सरकार का भरोसा बढ़ा है कि अब अन्य बैंकों में भी विलय व एकीकरण का काम बगैर किसी खास रुकावट के हो सकता है।
• सरकार की तरफ से इस बात का भरोसा दिलाया गया है इस प्रक्रिया में इस बात का खास ख्याल रखा जाएगा कि किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाए। अगर कोई समय पूर्व सेवानिवृत्ति लेना चाहता है तो वह जरूर दिया जाएगा।
• वित्त मंत्रालय  के बैंकिंग विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विलय या एकीकरण का प्रस्ताव बैंकों की तरफ से ही आएगा। पहले बैंक के निदेशक बोर्ड फैसला लेंगे और उसके बारे में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत गठित समिति को सूचित करेंगे।
• सरकार की तरफ से भी कुछ बैंकों को विलय के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। इस बारे में फैसला कई बातों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
• सरकारी बैंकों के विलय की बात को आगे बढ़ाना इसलिए भी जरूरी हो गया है कि विलय के बाद एसबीआइ का आकार अब बहुत बड़ा हो गया है। जबकि देश के अन्य सरकारी बैंकों का आकार बहुत छोटा है। ऐसे में उनके प्रतिस्पर्धा में पीछे छूट जाने का डर है।
• सूत्रों के मुताबिक पहले चरण में जिन बैंकों के विलय के आसार हैं उनमें पीएनबी, देना बैंक और विजया बैंक शामिल हैं। इसके साथ ही बैंक ऑफ बड़ौदा और यूको बैंक के विलय की संभावना भी जताई जा रही है।
• इस तरह से इन बैंकों की संख्या कम जरूर होगी लेकिन वित्तीय तौर पर ये ज्यादा मजबूत होंगे। ज्यादा कर्ज दे सकेंगे और बाजार की अनिश्चितता या वैश्विक मंदी को ज्यादा बेहतर तरीके से ङोल सकेंगे। आकार बड़ा होने की वजह से इन बैंकों के लिए बाहर से फंड जुटाना आसान होगा।

4. भारत वैगन को बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी

• सरकार ने घाटे में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत वैगन एंड इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को बंद करने का फैसला किया है। रेल मंत्रलय के अधीन आने वाले इस उपक्रम को सरकार 151.18 करोड़ रुपये का पैकेज देगी ताकि कंपनी की देनदारियों को चुकाया जा सके।
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की आर्थिक मामलों संबंधी समिति ने इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी। भारत वैगन एंड इंजीनियरिंग के 626 कर्मचारियों को 2007 के वेतनमान पर स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति दी जाएगी।
• सरकार का कहना है कि बीडब्ल्यूईएल को बंद करने से सरकारी खजाने से होने वाला व्यय रुकेगा। घाटे में चल रही इस कंपनी को चलाने के लिए सरकार को भारी भरकम राशि खर्च करनी पड़ रही थी। यह कंपनी वैगन निर्माण के अलावा इनकी मरम्मत करती है।
• इसकी दो विनिर्माण इकाइयां बिहार में मोकामा और मुजफ्फरपुर में हैं। सरकार का कहना है कि बीते दस साल से कंपनी के खराब वित्तीय और भौतिक प्रदर्शन के मद्देनजर इसे बंद करने का फैसला किया गया है। रेल मंत्रलय इसे वित्तीय मदद मुहैया करा रहा था। हालांकि इसके घाटे से उबरने की संभावनाएं बेहद कम होने की वजह से इसे बंद किया जा रहा है।
• इस कंपनी को बंद करने की प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी की जाएगी। इस संबंध में भारी उद्योग विभाग के दिशानिर्देशों को पालन किया जाएगा। 1उल्लेखनीय है कि दो निजी कंपनियों मुजफ्फरपुर स्थित आर्थर बटलर और मोकामा स्थित ब्रिटानिया इंजीनियरिंग कंपनी के अधिग्रहण के बाद चार दिसंबर 1978 को सरकार ने बीडब्ल्यूईएल की स्थापना केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम के रूप में की थी।
• इस कंपनी को 2000 में बीआइएफआर यानी बोर्ड ऑफ इंडस्टियल एंड फाइनेंशियल रिकंस्ट्रक्शन के पास भेजा गया और इसे 2002 में बीमार घोषित किया गया। तब से यह कंपनी बीमार यानी घाटे में ही चल रही है।

5. अब Rs200 का नोट

• वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा कि सरकार 2000 रपए के नोट पर प्रतिबंध लगाने पर विचार नहीं कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि 200 रपए के नए नोट जारी करने को मंजूरी दे दी गई है और इसे जारी करने के समय के बारे में निर्णय रिजर्व बैंक करेगा।
• जेटली ने यहां संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने केंद्रीय बैंक को 200 रपए के नोट जारी करने को मंजूरी दे दी है। इस कदम का मकसद कम राशि की मुद्रा पर दबाव को कम करना है। नोट की छपाई कब होगी, इस संदर्भ में पूरी प्रक्रिया के बारे में निर्णय रिजर्व बैंक करेगा। अत: यह आरबीआई के लिए उपयुक्त होगा कि वह तारीख तथा नोट छपाई तथा उससे संबद्ध अन्य मामलों के बारे में जानकारी दे।
• यह पूछे जाने पर कि सरकार 2,000 रपए के नोट को धीरे-धीरे चलन से हटाने पर विचार कर रही है, उन्होंने कहा, नहीं, ऐसी कोई र्चचा नहीं है।
• पिछले साल नौ नवंबर को पुराने 500 और 1,000 रपए के नोटों को चलन से हटाए जाने के बाद रिजर्व बैंक ने अतिरिक्त सुरक्षा विशेषताओं के साथ 2000 रपए और 500 रपए के नए नोट पेश किए थे।

6. भारत और नेपाल के बीच बातचीत में चीन रहेगा सबसे बड़ा मुद्दा

• नेपाल के पीएम शेर बहादुर देऊबा पांच दिवसीय यात्रा  पर बुधवार को नई दिल्ली पहुंच गए। भारत उनकी यात्रा को कितना महत्व देता है उसे दिन भर चली गतिविधियों से समझा जा सकता है।
• पहला, उनकी आगवानी के लिए स्वयं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज हवाई अड्डे पर पहुंची।
• दूसरा, कैबिनेट ने नेपाल के साथ सहयोग के दो अहम मुद्दों को मंजूरी दी।
• तीसरा, गुरुवार को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता से पहले बुधवार देर शाम देऊबा ने अचानक पीएम नरेंद्र मोदी के निवास स्थान पर पहुंच कर मुलाकात की।
• दरअसल, डोकलाम मुद्दे पर चीन के साथ भारत जिस तरह से विवाद में फंसा हुआ है और चीन की तरफ से नेपाल को आकर्षित करने के लिए लगातार कोशिशें हो रही हैं उसे देखते हुए देऊबा की यह यात्र बहुत अहम हो गई है।
• जानकार यह भी मान रहे हैं कि गुरुवार को जब मोदी और देऊबा द्विपक्षीय वार्ता के लिए नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आमने-सामने बैठेंगे तो उनके एजेंडे में चीन के साथ जुड़ा मसला काफी उपर होगा। नेपाल में पैठ जमाने में चीन धीरे धीरे सफल हो रहा है और देऊबा सरकार को उससे कोई ऐतराज भी नहीं है।
• भारत की आपत्तियों के बावजूद चीन ने जब बेल्ट एंड रोड इनिसिएटिव (बीआरआइ) की बैठक बुलाई तो उसमें नेपाल ने हिस्सा लिया और समझौता भी किया। काठमांडू-तिब्बत के बीच रासुवागाढ़ी हाइवे को नए सिरे से बनाने और इस पर रेलवे लाइन बिछाने की बातचीत भी हुई है।
• चीन ने धीरे-धीरे नेपाल को ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति भी शुरू कर दी है। अभी तक नेपाल इसके लिए पूरी तरह से भारत पर आश्रित रहा है। नेपाल में चीन की गतिविधियों पर भारत की पैनी नजर है।
• इनके अलावा भी कई अहम मुद्दे हैं जिन पर दोनों देशों के बीच बातचीत होना बहुत आवश्यक हो गया है। इसमें एक बाढ़ नियंत्रण से जुड़ा मुद्दा भी है।
•  वर्तमान में बिहार के बड़े हिस्से में आई बाढ़ के लिए नेपाल से आने वाली नदियों का पानी जिम्मेदार है। नेपाल में इन नदियों पर बांध बनाने के मुद्दे पर पहले दोनो देशों में बातचीत हुई थी, लेकिन मामला अभी तक बहुत आगे नहीं बढ़ा है।
• इसके अलावा नेपाल में संविधान संशोधन और वहां रह रहे मधेशियों को उनका वाजिब हक दिलाने का मुद्दा भी भारत उठाएगा। वैसे मोदी सरकार ने बुधवार को नेपाल में मादक पदार्थो के कारोबार के खात्मे में सहयोग करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
• नेपाल में ड्रग की समस्या खतरे का निशान पार कर चुकी है। ऐसे में वह लगातार भारत से सहयोग मांग रहा है। राह इस समझौते से खुलेगी।
• दूसरा फैसला नेपाल-भारत सीमा पर मेछी नदी पर पुल बनाने को लेकर है। यह भारतीय मदद से बनेगा।

7. पाकिस्तान का दर्जा घटाने की तैयारी में अमेरिका

• अमेरिका आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बने पाकिस्तान पर दबाब बढ़ाने की तैयारी में जुट गया है। इसके तहत पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद में कटौती या फिर महत्वपूर्ण गैर नाटो सहयोगी देश का उसका दर्जा घटाया जा सकता है। इसके तहत पाकिस्तान को विशेष मदद मिलती है। विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने यह संकेत दिया है।
• टिलरसन ने मंगलवार को कहा, ‘पाकिस्तान को दिए जाने वाले समर्थन पर विचार किया जा रहा है। अमेरिका का पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंध इस्लामाबाद द्वारा आतंकी गुटों के खिलाफ कार्रवाई और उसके परिणामों पर निर्भर करेगा।’
• अमेरिका का शीर्ष नेतृत्व अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा कार्रवाई न किए जाने से बेहद निराश है। सांसद टेड पो ने तो पाकिस्तान को ‘आतंक प्रायोजक देश’ की सूची में डालने की मांग की है। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ ट्रंप के सख्त रुख की भी तारीफ की है।
• रक्षा मंत्री बोले, पाक पर होगी कार्रवाई : अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने भी कहा है कि इस बार ट्रंप सरकार पाकिस्तान के खिलाफ जरूर कार्रवाई करेगी।
• अतीत में भी पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की बात कहे जाने के सवाल पर मैटिस ने यह आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, ‘आप भविष्य में इस पर अमल (पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई) होता देखेंगे।
• मैं नाटो के महासचिव के अलावा सहयोगी देशों के साथ विचार-विमर्श कर रहा हूं। उनमें से कई ने जवानों की तादाद बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता जताई है। हम लोग मिलकर आतंकवादियों को तबाह करने में अफगान सुरक्षा बलों का सहयोग करेंगे।’

8. भारत-रूस की लड़ाकू विमान परियोजना अटकी!

• काफी समय से लंबित भारत और रूस की मिलकर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की परियोजना लगता है अटक गई है। रक्षा मंत्रलय का मानना है कि यह काफी खर्चीली हो सकती है। मंत्रलय ने इस परियोजना के आकलन के लिए समिति बनाई थी जिसने हाल में अपनी रिपोर्ट सौंपी है।
• रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे चार प्रोटोटाइप लड़ाकू विमान विकसित करने में छह अरब डॉलर (करीब 3842 करोड़ रुपये) का खर्च आएगा।
• रक्षा मंत्रालय  के अधिकारियों के मुताबिक, यह काफी अधिक है। भारत और रूस ने 2007 में पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान परियोजना के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह रूसी लड़ाकू विमान सुखोई-57 या पीएके एफए टी-50 पर आधारित होनी थी।
• साथ ही एसयू-57 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए भी रूस से बातचीत की थी। दिसंबर 2010 में भारत ने लड़ाकू विमान के आरंभिक डिजाइन के लिए 29.5 करोड़ डॉलर (करीब 188 करोड़ रुपये) देने की सहमति जताई थी। हालांकि बाद के वर्षों में बातचीत में काफी बाधाएं उत्पन्न हुईं।

9. सही साबित हुआ सूर्य कोरोना पर भारतीय वैज्ञानिकों का पूर्वानुमान

• भारतीय खगोल वैज्ञानिकों द्वारा 21 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण के मौके पर सूर्य कोरोना की संरचना के बारे में लगाया गया पूर्वानुमान सही साबित हुआ है। वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर सिमुलेशन तकनीक और अपने विकसित किए गए सौर मॉडल की मदद से पहली बार सूर्य ग्रहण से पहले ही सूर्य की अदृश्य चुंबकीय संरचना और सूर्य कोरोना के स्वरूप का अनुमान लगा लिया था।
• यह लगाया था अनुमान : वैज्ञानिकों ने सूर्य के दक्षिणी गोलार्ध के पूर्वी एवं पश्चिमी हिस्से में हेलमेट स्ट्रीमर्स नामक कमल की पत्तियों के आकार की दो संरचनाओं के साथ-साथ सूर्य के दक्षिणी गोलार्ध के पश्चिमी हिस्से में विकसित हो रहे संभावित नैरो स्ट्रीमर और उत्तरी गोलार्ध में भी इसी तरह की दो संरचनाएं होने का अनुमान लगाया था।
• दक्षिण-पूर्वी किनारे पर सूर्य के कम सक्रिय होने की भविष्यवाणी भी सही पाई गई है।
• ज्यादातर परिणाम सही मिले : अध्ययनकर्ताओं की टीम के प्रमुख डॉ. दिब्येंदु नंदी के मुताबिक, कुछेक बातों को छोड़कर हमारा पूर्वानुमान काफी हद तक सही पाया गया है।
• एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की पब्लिक आउटरीच कमेटी के अध्यक्ष नीरूज मोहन के मुताबिक, सभी पूर्वानुमानों की पुष्टी कर ली गई है।
• इसरो को मिलेगा फायदा : सुपर कंप्यूटर्स का उपयोग किए बिना सामान्य कंप्यूटिंग क्षमता के दम पर किए गए इस पहले प्रयास में पूर्वानुमानों और वास्तविक अवलोकन के बीच के बारीक अंतर का पाया जाना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
• इस मॉडल की सफलता का फायदा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा लांच की जाने वाली सौर वेधशाला, आदित्य-एल1 द्वारा किए जाने वाले परीक्षणों को भी मिलेगा।

10. सार्क देशों की सूची में सुरक्षित पेयजल उपलब्धता में भारत का आखिरी स्थान

• दुनिया की बहुत बड़ी आबादी आज भी स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की सुविधा से वंचित है। भारत के लिहाज से देखें तो 85.5 फीसद घरों में सुरक्षित पेयजल की सुविधा उपलब्ध है, फिर भी दक्षिण एशियाई देशों की सूची में हम आखिरी स्थान पर हैं। भूजल गुणवत्ता की बात करें तो देश में सबसे बुरी स्थिति पश्चिम बंगाल की है।
• हरियाणा की ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों श्रीरूप चौधरी और मिमी रॉय के सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने वर्ष 11 की भारतीय जनगणना के आंकड़ों के आधार पर सुरक्षित पेयजल और बुनियादी स्वच्छता के आधार पर पेयजल क्षेत्र का मूल्यांकन किया है।
• राज्यों में पेयजल उपलब्धता की अलग-अलग स्थिति : राजस्थान में 78 फीसद घरों में सुरक्षित पेयजल स्नोत होने के बावजूद 48 प्रतिशत से अधिक लोग पेयजल के लिए भूजल पर निर्भर हैं। राजस्थान के 32 फीसद घरों में ही उपचारित नल का पानी आता है। गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक में 39 से 48 फीसद तथा बिहार, नागालैंड, लक्षद्वीप, असम, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश में 15 फीसद से कम परिवारों को नल का उपचारित पानी मिल पाता है।
• शहरीकरण और औद्योगीकरण से जल चक्र प्रभावित : पूरे भारत में लोग नल, हैंडपंप, ट्यूबवेल, बोरवेल, नहर, नदी-नालों, तालाब व अन्य स्त्रोत से पेयजल प्राप्त करते हैं। शहरीकरण और औद्योगीकरण से जल चक्र प्रभावित हो रहा है, वहीं भूजल के रिचार्ज में भी कमी आई है।
• अपशिष्ट निपटान से जल निकायों में भौतिक-रासायनिक गुणों में बदलाव होने से जल की गुणवत्ता भी खराब हो रही है। वैज्ञानिकों ने ऐसे परिवर्तनों को चिह्न्ति करके पेयजल स्नोतों की पहचान करने के सुझाव दिए हैं।

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