दैनिक समसामयिकी
1.ब्रिक्स समिट : आतंकवाद के खिलाफ समग्र दृष्टिकोण अपनाएं: चिनफिंग
• चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने रविवार को ब्रिक्स देशों से सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में समग्र दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए उसके ‘लक्षण और मूल कारणों’ से निपटा जाना चाहिए ताकि आतंकियों के छिपने की कोई जगह न हो।
• ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और द. अफ्रीका) बिजनेस फोरम के उद्घाटन भाषण में चिनफिंग ने कहा,ब्रिक्स देशों को भू-राजनीतिक मुद्दों को सुलझाने की प्रक्रिया में रचनात्मक हिस्सा लेकर उचित योगदान करना चाहिए।
• ‘मैं इस बात से आश्वस्त हूं कि जब हम सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में समग्र दृष्टिकोण अपनाएंगे और इसके लक्षण तथा मूल कारणों से निपटेंगे तब आतंकियों के छिपने की जगह नहीं होगी।’
• ज्ञात हो, चिनफिंग की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में पाकिस्तान को ‘अराजक एजेंटों’ का पनाहगाह बताए जाने के बाद आई है। ट्रंप ने इन तत्वों पर अफगानिस्तान में अमेरिकियों की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इस्लामाबाद को आतंकियों को पनाह देने पर ‘बहुत कुछ गंवाना’ होगा।
• चीन की मेजबानी में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में भारत भी आतंकवाद का मुद्दा जोर-शोर से उठाने वाला है। हालांकि चीन ने कहा है कि भारत द्वारा पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी रिकॉर्ड की चर्चा इस फोरम के लिए ‘उचित विषय’ नहीं है। ब्रिक्स के तीन दिवसीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ब्राजील के राष्ट्रपति माइकल टेमर, दक्षिण अफ्रीका के जैकब जुमा और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शिरकत करेंगे।
• इस सम्मेलन की शुरुआत ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के सम्मेलन से हुई है।1चिनफिंग ने ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि बड़ी इमारत के निर्माण की शुरुआत नींव (फाउंडेशन) से होती है। हमने नींव रखी है और ब्रिक्स सहयोग का फ्रेमवर्क खड़ा करना है।
• पिछले दस वर्षों में ब्रिक्स सहयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए एक-दूसरे से बराबरी का व्यवहार तथा मतभेदों को ठंडे बस्ते में डालना महत्वपूर्ण है।
• उन्होंने ब्रिक्स देशों की उपलब्धि बताते हुए कहा कि पिछले दशक में इस ब्लॉक के संयुक्त जीडीपी में 179 फीसद की वृद्धि हुई जबकि व्यापार 94 फीसद बढ़ा है।
2. आर्थिक क्षमता के बल पर विश्व में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है चीन
• इसी वर्ष जनवरी में दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में चीनी राष्ट्रपति ने अपने देश को मुक्त व्यापार एवं वैश्वीकरण का चैंपियन बताया था। उसके बाद मई में उन्होंने वैश्विक एकीकरण के लिए अपने देश का दृष्टिकोण दुनिया के सामने प्रस्तुत किया था, जिसमें एशिया को यूरोप और उसके आगे तक रेल, रोड एवं समुद्र मार्ग से जोड़ने की बात शामिल थी। कुछ विश्लेषकों को चीन के इस दृष्टिकोण पर संदेह है लेकिन, उसकी आलोचना में महत्वपूर्ण बातें नजरअंदाज हो रही हैं।
• चीन बहुपक्षवाद को बढ़ावा दे रहा है और उसके नियम उसने खुद तैयार किए हैं। उसकी रणनीति में उसका आर्थिक एवं राजनीतिक प्रभाव दिखता है। हालांकि, खुद चीन के लिए इसके मिले-जुले परिणाम होंगे। यह ऐसे दौर की बात है जब अमेरिका बहुपक्षवाद से पीछे हट रहा है, चीन पूरी ताकत से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
• चीनी बहुपक्षवाद के व्यावहारिक सिद्धांत अमेरिका, अन्य पश्चिमी देशों एवं वैश्विक स्तर से बिल्कुल अलग हैं। इसमें आपसी विश्वास एवं सहयोग बढ़ाने की बातें भी शामिल होती हैं, जो चीन की रूपरेखा में नहीं दिखती हैं। शायद इसलिए क्योंकि वह लोकतंत्र, मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मूल्यों को नहीं मानता है।
• चीन की रणनीति में कुछ बातें चिंताजनक हैं: वह खुद खिलाड़ी है और खेल के नियम भी वह अपने अनुसार बदलना चाहता है। वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठानों-संस्थाओं में अपने प्रभाव का विस्तार कर रहा है। चीन ने वर्ष 2001 में विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता इस वादे के साथ ली थी कि वह अपने व्यापार क्षेत्र को विदेशी सामान एवं निवेश के लिए खोलेगा।
• उसने यह भी कहा था कि विदेशी निर्यातकों को वह अपने मार्केट तक आसान पहुंच मुहैया कराएगा। लेकिन, विदेशियों के लिए अपने मार्केट की पहुंच का वादा उसने पूरा नहीं किया। विदेशी निर्यातकों एवं निवेशकों को आज भी चीन में कई बैरियरों से गुजरना पड़ता है। विदेशी कंपनियों को वहां माल बेचने के लए स्थानीय पार्टनर बनाकर डील करना जरूरी है। जो विदेशी कंपनी वहां काम करना चाहती है, उसे स्थानीय कंपनी को पार्टनर बनाना जरूरी है।
• चीन खुद को अंतरराष्ट्रीय संस्थान दिखाना चाहता है। वह अपनी परियोजनाओं में अन्य पक्षों को तो साथ रखता है, लेकिन अपनी चमक भी दिखाता है। 'वन बेल्ट-वन रोड' उसी का एक उदाहरण है। चीन से यूरोप तक जाने वाली इस परियोजना पर वह एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक राशि खर्च कर रहा है।
• वह भारत और चीन को भी इस रूपरेखा में साथ लेना चाहता है, जो वर्षों से उसके भू-राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। यह परियोजना वह एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर बैंक के सहयोग से पूरा करेगा, जिसमें एशिया अन्य महाद्वीपों के 61 देश (अमेरिका नहीं) सदस्य हैं।
• चीन में स्थित मुख्यालय वाला यह बैंक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की तर्ज पर उभर रहा है। इन संस्थाओं का उद्देश्य राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सुधार लाना और सहयोग बढ़ाना है कि किसी एक देश पर अपना प्रभाव जमाना।
3. उत्तर कोरिया ने किया हाइड्रोजन बम के परीक्षण का दावा
• दुनिया को चौंकाने वाले कारनामों के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए उत्तर कोरिया ने रविवार को छठा परमाणु परीक्षण किया। यह उसके पांचवें परमाणु परीक्षण से कम से कम दस गुना ज्यादा शक्तिशाली था। परीक्षण में प्रयुक्त बम 1945 में जापान के नागासाकी शहर पर डाले गए अमेरिकी परमाणु बम से ज्यादा शक्तिशाली था।
• परीक्षण के वक्त रिक्टर पैमाने पर 6.3 के भूकंप की तरह धरती डोली। चीन, रूस और जापान में भूकंप का झटका महसूस किया गया। उत्तर कोरिया का दावा है कि उसने हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया है। हाइड्रोजन बम परमाणु बम से 100 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है।
• अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास के चंद रोज बाद किए गए परीक्षण से उत्तर कोरिया ने जता दिया है कि वह किसी की परवाह नहीं करता। पैदा हुए हालात पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की है। एबी का सुझाव है कि अब उत्तर कोरिया को तेल की आपूर्ति रोकी जाए। उत्तर कोरिया के इस कदम की दुनिया के ज्यादातर देशों ने निंदा की है।
• भारत का कहना है कि उत्तर कोरिया का यह कदम शांति के लिए बड़ा खतरा है। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने परमाणु परीक्षण की निंदा करते हुए उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंध लगाने की जरूरत बताई है। चीन ने भी उत्तर कोरिया के परीक्षण की कड़ी निंदा की है।
• रूस ने भी संबद्ध पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उधर, अमेरिका उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए नया मसौदा तैयार कर रहा है।
• अधिकारियों ने उत्तर कोरिया के दावे को खारिज करते हुए इसे हाइड्रोजन बम का परीक्षण मानने से इन्कार किया है।
4. बैंक खुद विलय का प्रस्ताव बना कर मंत्री समूह को भेजेंगे
• वित्त मंत्रालय ने सभी पीएसयू बैंकों के प्रमुखों को विलय के संबंध में पत्र लिखा है। इसमें सरकारी बैंकों में विलय की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए मंत्री समूह बनाए जाने के बारे में अवगत कराया गया है। वित्तीय सेवाओं के विभाग की ओर से बैंकों के सीईओ को औपचारिक रूप से यह सूचना दिए जाने के साथ सरकारी बैंकों में विलय की प्रक्रिया की गति और तेज हो गई है।
• वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया, मंत्रालय चाहता है कि बैंक अपने स्तर पर तय करें कि वे किसके साथ बेहतर विलय कर सकते हैं। इसके बाद विलय का प्रस्ताव मंत्री समूह के सामने लेकर आएं। लेकिन इससे पहले वह क्षेत्रीय संतुलन, भौगोलिक पहुंच, आईटी कम्पैटिबिलिटी, वित्तीय बोझ और मानव संसाधन के ट्रांजिशन का विश्लेषण कर लें।
• पिछले महीने कैबिनेट ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के विलय में गति लाने के लिए मंत्री समूह के रूप में वैकल्पिक तंत्र बनाने का निर्णय लिया था। बैंकों से विलय के प्रस्ताव सैद्धांतिक मंजूरी के लिए इस मंत्री समूह के सामने रखे जाएंगे।
• विलय तेजी से हो इसके लिए सरकार ने राष्ट्रीयकृत बैंकों के मर्जर को उचित व्यापार व्यवहार नियामक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की मंजूरी लेने से छूट दी है। यह छूट 10 साल के लिए प्रभावी रहेगी। यह विलय कितनी जल्द हो सकता है, इस पर एक अधिकारी ने कहा कि इसमें कुछ महीने लग सकते हैं।
• एसबीआई में सहयोगी बैंकों का विलय आसान था क्योंकि वे देश के सबसे बड़े बैंक के सहयोगी बैंक थे। इस साल की शुरुआत में सरकार ने एसबीआई में पांच सहयोगी बैंकों के विलय को मंजूरी दी थी।
5. जम्मू-कश्मीर में सेवानिवृत्त जजों को सुरक्षा का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
• जम्मू-कश्मीर में हाई कोर्ट और जिला अदालतों के सेवानिवृत्त जजों और पूर्व एडवोकेट जनरलों को सुरक्षा देने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने सेवानिवृत्त जजों और पूर्व एडवोकेट जनरलों को सुरक्षा देने के हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
• सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार की इस याचिका पर सोमवार को विचार करेगा।
• गत शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने राज्य सरकार की याचिका को चार सितंबर को सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया था।
• इससे पहले जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन और शोएब आलम ने कहा कि सेवानिवृत्त जजों और पूर्व एडवोकेट जनरलों को सुरक्षा देने का हाई कोर्ट का आदेश ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में वीआइपी और अन्य किसी को भी सुरक्षा गृह मंत्रलय द्वारा तय दिशानिर्देशों में उस व्यक्ति की जान को होने वाले खतरे को देखते हुए दी जाती है। इस बारे में विस्तृत दिशानिर्देश और व्यापक तंत्र बना हुआ है।
• पूरे देश में उसी का पालन होता है। इसमें इस तरह हाई कोर्ट आदेश नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी अपने आदेशों में कह चुका है कि किसे सुरक्षा देनी चाहिए और किसे नहीं, ये विशेषज्ञता का मसला है और कोर्ट इस बारे में आदेश नहीं दे सकता।
• पीठ ने दलीलें सुनने के बाद याचिका की प्रति कोर्ट में मौजूद एएसजी पिंकी आनंद को देने का आदेश दिया। कोर्ट ने एएसजी से कहा कि वे इस केस के बारे में अटार्नी जनरल को सूचित करें।
6. कॉरपोरेट गवर्नेस पर और सख्त होगा सेबी
• कंपनियों के कामकाज में सूचना और निर्णयों की जानकारी को साझा करने के मामले में कॉरपोरेट गवर्नेस के नियम और सख्त हो सकते हैं। बाजार नियामक सेबी अब इस बात पर विचार करेगा कि कंपनियों का प्रबंधन या निदेशक बोर्ड अपने गैर कार्यकारी प्रमोटरों और स्वतंत्र निदेशकों के साथ कितनी सूचनाएं साझा करते हैं। आगे सेबी इस मामले को कारपोरेट गवर्नेस के नियमों में भी शामिल कर सकता है।
• हाल के दिनों में इन्फोसिस और कुछ अन्य कंपनियों में बोर्ड व कंपनी प्रबंधन के बीच सूचनाओं को साझा करने संबंधी विवाद उठे थे। सूत्र बताते हैं कि उसके बाद से ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इस पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया है।
• माना जा रहा है कि इस महीने के अंत में होने वाली सेबी बोर्ड की बैठक में इस पर विचार होगा। सेबी के भीतर एक वर्ग मानता है कि गैर कार्यकारी प्रमोटरों और स्वतंत्र निदेशकों के साथ सूचनाएं साझा करने से न केवल कंपनी के कामकाज में पारदर्शिता आएगी, बल्कि ये लोग भी कंपनी के संचालन में सक्रिय भागीदारी कर पाएंगे।
• उच्चस्तरीय समिति कर रही विचार : हालांकि, कॉरपोरेट गवर्नेस के कई विषयों पर शीर्ष बैंकर उदय कोटक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति विचार कर रही है। लेकिन टाटा समूह व इन्फोसिस के शीर्ष पदों पर आसीन अधिकारियों के पद छोड़ने के बाद सेबी को विदेशी और घरेलू निवेशकों की तरफ से कई प्रतिनिधिमंडल मिले हैं। सेबी ने कोटक की अध्यक्षता वाली इस समिति का गठन इसी साल जून में किया था।
• हालांकि इन मुद्दों पर कोई भी नियम बनाने से पहले मसौदा तैयार होगा, जिसे सार्वजनिक चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जा सकेगा। इस मसौदे में कॉरपोरेट गवर्नेस से जुड़े तमाम मसलों को शामिल किया जाएगा।
• अक्टूबर से लागू होने हैं नए नियम : अक्टूबर से शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए कॉरपोरेट गवर्नेस के कई नए नियम लागू होने हैं। इनमें निवेशकों के अधिकारों की रक्षा से लेकर डिस्क्लोजर के कड़े नियम शामिल हैं। माइनॉरिटी शेयरधारकों और विदेशी शेयरधारकों को समान दर्जा देने का मामला भी शामिल है।
• सेबी के पास निवेशकों की लंबित शिकायतों की संख्या में 18 फीसद की कमी आई है। यह इस साल मार्च के अंत का आंकड़ा है। सेबी शिकायतों के तेजी से निपटान के लिए काम कर रहा है।
• ताजा आंकड़ों के अनुसार 2008-09 में सेबी के पास लंबित शिकायतों की संख्या 49,113 थी। इसके मुकाबले अब यह संख्या घटकर 10 प्रतिशत ही रह गई है। सेबी की 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट में स्कोर्स के आंकड़ों के अनुसार कार्रवाई लायक लंबित शिकायतों की संख्या 31 मार्च, 2016 को 5,452 थी।
• 31 मार्च, 2017 तक यह 17.90 फीसद घटकर 4,476 रह गई है। सेबी की शिकायत निपटान प्रणाली (स्कोर्स) केंद्रीकृत वेब आधारित शिकायत निपटान प्लेटफॉर्म है। रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च तक लंबित कुल शिकायतों से से 3,492 छह महीने से कम समय से लंबित हैं।
7. श्रमिकों के वेतन में भारी वृद्धि की तैयारी
• केंद्र सरकार देश में न्यूनतम मजदूरी तय करने के मौजूदा फोर्मुले में बदलाव करने पर विचार कर रही है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर श्रमिकों का दोगुना वेतन होने की संभावना है।सूत्रों के अनुसार केंद्रीय श्रम मंत्रालय न्यूनतम मजदूरी के निर्धारण में बदलाव करते हुए श्रमिक की पत्नी के अलावा उसके माता- पिता और दो बच्चों को अलग-अलग इकाई के रूप में शामिल करने पर विचार कर सकता है।
• फिलहाल न्यूनतम मजदूरी के फामरूला तीन इकाई श्रमिक, पत्नी और दो बच्चों पर आधारित है। दो बच्चों को एक इकाई माना जाता है। यानी श्रमिक को कम से कम इतनी मजदूरी मिलनी चाहिए जिसमें तीन व्यक्तियों का भरण पोषण हो सके।
• प्रस्तावित फोर्मुले में माता-पिता को दो इकाई और दो बच्चों को दो अलग-अलग इकाइयों के तौर पर शामिल किया जा सकता है।सूत्रों ने बताया कि इस तरह से न्यून
तम मजदूरी का निर्धारण छह इकाइयों के आधार पर किया जाएगा।
• न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के अनुसार न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण श्रमिक और उसकी पत्नी को दो अलग-अलग इकाई और उसके दो बच्चों को एक इकाई मानते हुए किया जाता है। यह निर्धारण कृषि और गैर कृषि श्रमिकों के लिए होता है।
8. विश्व का पहला हीरा वायदा बाजार शुरू
• भारत में दुनिया का पहला हीरा वायदा कारोबार इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज लिमिटेड (आईसीईएक्स) पर शुरू हो गया। इसके साथ ही भारतीय कमोडिटी बाजारों के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
• आईसीईएक्स ने कहा है कि इससे हीरा उद्योग को उचित मूल्य की खोज और प्राइस हेजिंग प्लेटफार्म मिलेगा। मांग और आपूर्ति के बुनियादी मुद्दों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापारिक साझेदारी से उचित मूल्य का पता लगाया जाएगा। यह वायदा कारोबार लंदन स्टाक एक्सचेंज ग्रुप के मिलेनिअम आईटी (एमआईटी) की तकनीक द्वारा संचालित हो रहा है।
• डी बीअर्स ग्रुप की संस्था इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायमंड ग्रेडिंग एंड रिसर्च बाजार से डिलिवरी के लिए हीरे को प्रमाणित करेगी।आईसीईएक्स के अध्यक्ष अशोक सिन्हा ने इस मौके पर कहा कि आईसीईएक्स हीरा कारोबार को एक ऐसा विश्वस्तरीय मंच प्रदान करना चाहता है जो कीमतों के उतार चढ़ाव से जुड़े जोखिम को कम करेगा।
• आईसीईएक्स उचित बाजार प्रदान करेगा जो हीरे के व्यापार में बड़े पैमाने पर सबकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करेगा। हीरे के व्यापार से जुड़े सभी साझेदारों के लिए उसके उचित मूल्यों की खोज और प्रभावी हेजिंग प्लेटफार्म की जरूरत थी जिसको आईसीईएक्स पूरा कर रहा है।

No comments:
Post a Comment