1.भारत 10 साल में तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा
• भले ही कुछ सुधारों के कारण देश की जीडीपी वृद्धि दर प्रभावित हुई हो लेकिन मध्यम अवधि में संभावना उत्साहजनक दिखाई देती है। इसको देखते हुए भारत अगले दशक में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन सकता है। एचएसबीसी की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
• वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी के अनुसार हालांकि पिछले साल के कुछ सुधारों से आर्थिक वृद्धि के रास्ते में बाधा उत्पन्न हुई है जिससे संभवत: अल्पकाल में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर कम हुई है। लेकिन मध्यम अवधि में उन सुधारों से भारत की क्षमता का पूरा उपयोग होना चाहिए।
• एचएसबीसी ने एक शोध रिपोर्ट में कहा, हालांकि आज नियंतण्र जीडीपी का केवल तीन फीसद है लेकिन भारत की वृद्धि की प्रवृत्ति को देखने से लगता है कि यह अगले दशक में जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
• रिपोर्ट के अनुसार भारत दो दुनिया में फंसा है। एक जहां वृद्धि धीमी है, दूसरे जहां आर्थिक वृद्धि सुधर रही है। एचएसबीसी ने कहा, पहला भारत को चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष (2017-18, 2018-19) में देखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि यहां भारत मुख्य क्षेत्रों में कमजोर आर्थिक वृद्धि का सामना कर रहा है।
2. नई अफगानिस्तान नीति पर पाक का रुख देखेगा अमेरिका : मैटिस
• अमेरिका के रक्षामंत्री जिम मैटिस ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई अफगान और दक्षिण एशिया नीति पर पाकिस्तान के रुख पर अमेरिका नजर रखेगा। इसी के साथ रक्षामंत्री ने अफगानिस्तान के विकास में भारत की प्रतिबद्धता की भी सराहना की।
• ट्रंप ने अफगानिस्तान के लिए नई रणनीति की घोषणा करते वक्त पाकिस्तान पर अराजकता के एजेंटों को शरण देने तथा काबुल में अमेरिका समर्थित सरकार के खिलाफ बगावत करने वाले आतंकी संगठनों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने का आरोप लगाया था।
• वहीं पाकिस्तान ने ट्रंप की नई नीति का यह कहते हुए विरोध किया था कि उनके देश ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में जो बलिदान दिया है उसको अनदेखा किया गया है। लेकिन मैटिस ने काबुल की यात्रा के दौरान कहा, नई रणनीति किसी खास के लिए नहीं है।
• उन्होंने कहा, यह उन सभी जिम्मेदार देशों के लिए है जो आतंकवाद को रोकना चाहते हैं और निर्दोष लोगों की रक्षा करना चाहते हैं।
3. परमाणु संपन्न देशों के बीच संवाद की जरूरत : भारत
• भारत ने परमाणु निरस्त्रीकरण का लक्ष्य पूरा करने के उद्देश्य से विास और भरोसा कायम करने के लिए परमाणु हथियारों से संपन्न सभी देशों के बीच सार्थक संवाद की जरूरत उजागर की है।
• संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश लिखित पक्ष में भारत ने कहा है कि उसने परमाणु हथियारों के रखने, विकास, उत्पादन, खरीदारी, परीक्षण, जखीराबंदी, हस्तांतरण और इस्तेमाल या उसके लिए धमकी देने पर प्रतिबंध लगाने के लिए समग्र परमाणु हथियार कन्वेंशन के निरस्त्रीकरण पर सम्मेलन में वार्ता की हमेशा सुसंगत रूप से समर्थन किया है।
• भारत ने परमाणु हथियारों के उपयोग पर प्रतिबंध पर किसी कन्वेंशन पर र्चचा के लिए अलग से अपनी रजामंदी दोहराई।संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने कहा, विास और भरोसा बनाने और अंतरराष्ट्रीय मामलों एवं सुरक्षा अवधारणा में ऐसे हथियारों की प्रमुखता घटाने के लिए परमाणु हथियार संपन्न सभी देशों के बीच सार्थक संवाद की जरूरत है।
• अकबरूद्दीन ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन से खुद को जोड़ते हुए परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया और परमाणु हथियारों के पूरी तरह निर्मुलन के लक्ष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत ने यह बात मई में कही थी और यह संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का हिस्सा है जिसे बृहस्पतिवार को सार्वजनिक किया गया। इसमें अनेक अन्य देशों के बयान भी हैं।
• परमाणु हथियारों के अप्रसार पर संधि के संदर्भ में जिन पांच देशों के परमाणु हथियार संपन्न देश माना जाता है, उनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन हैं। परमाणु हथियारों से संपन्न अन्य देशों में भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया को गिना जाता है।
4. प्रत्यक्ष कर संग्रह 16 फीसद बढ़ा
• सरकार ने कर दायरा बढ़ाने पर जोर देते हुए शुक्रवार को कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में अभी तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 15.7 फीसद बढ़ा है। अब तक 3.7 लाख करोड़ रपए की वसूली हो चुकी है।
• केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां आयकर विभाग की पहल की परामर्श समिति की दूसरी बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने कर दायरा बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनसे नए करदाता जुड़े हैं। और पुराने करदाताओं के कर चुकाने में इजाफा हुआ है।
• ये कदम कार्य पण्राली में कुशलता, पारदर्शिता और निष्पक्षता से संबंधित हैं। इनके कारण प्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या 6.26 करोड़ तक पहुंच गई है जबकि वित्त वर्ष 2012-13 में यह आंकड़ा 4.72 करोड़ का था।उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2017-18 में 18 सितम्बर तक शुद्ध कर संग्रह 3.7 लाख करोड़ रपए रहा है जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 15.7 फीसद अधिक है।
• उन्होंने बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष में कर से कुल राजस्व संग्रहण आठ लाख 49 हजार 818 करोड़ रपए रहा है जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 14.5 फीसद अधिक है।
• कर चुकाने के लिए लोगों को प्रेरित करने के कदमों का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि पांच लाख रपए तक की सालाना आय पर कर चुकाने वाले गैर कारोबारी करदाताओं के लिए कोई छानबीन नहीं की व्यवस्था की गयी है। इससे अधिक से अधिक लोग कर चुकाने के लिए प्रोत्साहित हो रही है।

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