Friday, September 29, 2017

दैनिक समसामयिकी 28 Sept 2017(Thursday)

दैनिक समसामयिकी

28 September 2017(Thursday)

1.केंद्रीय मंत्रिमंडल का बड़ा फैसला : आंतरिक सुरक्षा को 25000 करोड़ मंजूर

• केन्द्र ने आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों तथा राज्यों में कानून व्यवस्था की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बड़ा निर्णय लेते हुए पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की एक व्यापक योजना बनायी है। इसके तहत तीन वर्षों में 25 हजार करोड़ रूपये  से अधिक की राशि खर्च की जाएगी।
• केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति में इस योजना को मंजूरी दी गयी। केन्द्र ने इस योजना के माध्यम से राज्यों को सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले खर्च में बड़ी राहत दी है।
• इस योजना में 80 प्रतिशत यानी 18 हजार 636 करोड़ रुपये की राशि केन्द्र द्वारा वहन की जाएगी और राज्यों के हिस्से में केवल 6 हजार 424 करोड़ रुपये आएंगे। यह योजना वर्ष 2017-18, 18-19 और 2019-20 के लिए बनायी गयी है।
• गृह मंत्री ने कहा कि 25 हजार करोड़ रपए की राशि में से लगभग 11 हजार करोड़ रपए जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए खर्च किए जाएंगे।
• योजना में आंतरिक सुरक्षा, कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा , आधुनिक हथियारों की खरीद , पुलिस बलों की एक जगह से दूसरी जगह पर तैनाती , पुलिस साजो-सामान , हेलिकॉप्टरों की उपल्ब्धता, पुलिस वायरलैस का उन्नयन, राष्ट्रीय उपग्रह नेटवर्क, सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट और ई जेलों के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा।
• नक्सल समस्या से सबसे अधिक प्रभावित 35 जिलों में विकास की गति तेज करने के लिए भी 3 हजार करोड़ रूपये की राशि निर्धारित की गयी है।
• जम्मू-कश्मीर,पूर्वोत्तर राज्यों और नक्सल समस्या से जूझ रहे राज्यों में सुरक्षा व्यवथा से जुड़े खर्च के लिए 10 हजार, 132 करोड़ रपए आवंटित किए गए हैं। गृह मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में पुलिस सुविधाओं के उन्नयन, प्रशिक्षण संस्थानों और जांच सुविधाओं के लिए 100 करोड़ रूपये की राशि तय की गयी है।
• इस योजना के तहत राज्यों को पुलिस बलों से संबंधित ढांचागत सुविधाओं, अपराध विज्ञान प्रयोगशालाओं, संस्थानों और उपकरणों के उन्नयन के लिए सहायता दी जाएगी। अपराधों तथा अपराधियों के रिकार्ड का राष्ट्रीय डाटा तैयार करने के लिए पुलिस स्टेशनों के बीच तालमेल की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। इस पण्राली को जेलों, अपराध विज्ञान प्रयोगशालाओ से जोड़ा जायेगा।
• योजना के तहत आन्ध्र प्रदेश के अमरावती में अत्याधुनिक अपराध विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित की जायेगी। राजस्थान के जयपुर स्थित आतंकवाद और उग्रवाद रोधी नियंतण्र केन्द्र को अत्याधुनिक बनाया जायेगा। साथ ही गुजरात के गांधीनगर में अपराध विज्ञान विविद्यालय को भी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जायेगा।
• सैन्य ठिकानों में लगेंगे मोबाइल टावर : रक्षा मंत्रालय के नियंतण्रवाली जमीन पर मोबाइल टावर लगाने के प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गयी। इन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की व्यापक शिकायतें थीं जिसे देखते हुए यह फैसला किया गया है।
• लखनऊ मेट्रो को मिलेगी हवाई अड्डे की 1899 वर्गमीटर जमीन : लखनऊ की मैट्रो ट्रेन के लिए ट्रांसपोर्ट नगर में जगह की कमी को पूरा करने के लिए कैबिनेट ने चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की 1899 वर्गमीटर जमीन एलएमआरसी को देने का फैसला किया है।

2. कारोबारी रैंकिंग में भारत फिसलकर 40वें स्थान पर

• वर्ल्ड  इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के ग्लोबल कंपटीटिवनेस इंडेक्स में भारत की रैंकिंग एक पायदान गिरकर 40वीं है। सबसे प्रतिस्पर्धी देशों की इस सूची में शीर्ष पर स्विट्जरलैंड है।
• डब्ल्यूईएफ की 137 देशों की सूची में अमेरिका दूसरे और सिंगापुर तीसरे स्थान पर रहा। इस सूची में भारत 39वें स्थान से एक पायदान खिसककर 40वें पर पहुंच गया। इस सूची में चीन की रैंकिंग 27वीं रही।
• रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो साल में अच्छी छलांग लगाने के बाद भारत की रैंकिंग कमोबेश स्थिर रही। हालांकि प्रतिस्पर्धा के ज्यादातर मानकों में भारत ने सुधार किया है।
• इंफ्रास्ट्रक्चर में 66वें, उच्च शिक्षा में 75वें और टेक्नोलॉजीकल रेडीनेस में 107वें स्थान पर रहा। इससे लगता है कि इन क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश बढ़ा है।
• डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट के अनुसार भारत की रैंकिंग आइसीटी यानी इंफोर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी खासकर प्रति यूजर इंटरनेट बैंडविथ, मोबाइल फोन, ब्रॉडबैंड सब्सक्रिप्शन और स्कूलों में इंटरनेट की उपलब्धता के मामले में बेहतर हुई है। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार निजी क्षेत्र भारत में कारोबार के लिए भ्रष्टाचार को सबसे बड़ी समस्या मानता है।
• भारत के लिए बड़ी चिंता इस बात की है कि इनोवेटिव स्ट्रेंथ और उसकी टेक्नोलॉजीकल रेडीनेस (तीन पायदान के सुधार के साथ 107वां स्थान) के बीच संबंध नहीं बन पाया है। इस अंतराल के कारण भारत अर्थव्यवस्था को विस्तार देने के लिए अपनी तकनीकी ताकत का लाभ नहीं उठा पाएगा।
• सूची में ब्रिक्स देशों में चीन और रूस भारत से ऊपर हैं। रूस की रैंकिंग 38वीं रही है। दक्षिण अफ्रीका 61वें और ब्राजील 80वें स्थान पर रहा। हालांकि दक्षिण एशिया के पड़ोसी देशों में भारत सबसे आगे रहा। भूटान 82वें, श्रीलंका 85वें, नेपाल 88वें, बांग्लादेश 99वें और पाकिस्तान 115वें स्थान पर रहे।
• डब्ल्यूईएफ के अनुसार दक्षिण एशिया में पिछले एक दशक के दौरान टेक्नोलॉजीकलरेडीनेस में कोई सुधार नहीं हुआ। अब आइसीटी इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हो रहा है। हालांकि इसका उपयोग अभी भी चुनौती है।
• ग्लोबल कंपटीटिवनेस इंडेक्स प्रतिस्पर्धा के 12 मानकों को आधार बनाकर तैयार किया गया है। इंस्टीट्यूटशन, इंफ्रास्ट्रक्चर, मैक्रोइकोनॉमिक हालात, स्वास्थ्य व प्राइमरी शिक्षा, उच्च शिक्षा व प्रशिक्षण, मार्केट एफीशिएंसी, लेबर मार्केट एफीशिएंसी, वित्तीय बाजार विकास, टेक्नोलॉजीकल रेडीनेस, बाजार का आकार, कारोबारी जटिलता और इनोवेशन को रैंकिंग के लिए आधार बनाया गया है।
• डब्ल्यूईएफ के इस साल के सर्वे के अनुसार भारत में कारोबार के लिए भ्रष्टाचार को सबसे बड़ी समस्या मानी गई है। इसके बाद की दिक्कतों में वित्त पोषण, टैक्स रेट, अपर्याप्त बुनियादी सुविधाएं, श्रम शक्ति मं  नैतिकता का अभाव और अपर्याप्त शिक्षित श्रम शक्ति हैं।
• डब्ल्यूईएफ की रैंकिंग में भारत का प्रदर्शन कई मानकों में सुधरा14>>कारोबार करने में भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्या बनी

3. राहत पैकेज से बिगड़ सकती है राजकोषीय हालत

• सुस्त होती अर्थव्यवस्था के लिए राहत पैकेज को लेकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियों ने सरकार को ऐसा नहीं करने की चेतावनी दी है। एजेंसियों का मानना है कि राहत पैकेज के तहत सरकार को अपना खर्च बढ़ाना होगा जिससे राजकोषीय हालत और खराब हो सकती है।
• जापानी वित्तीय एजेंसी नोमूरा का मानना है कि सरकार के राजस्व संग्रह की रफ्तार में फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है। अर्थव्यवस्था की मौजूदा समस्याएं सरकार के अत्यधिक खर्च से हैं, राजस्व की कम रफ्तार की वजह से नहीं। ऐसी स्थिति में राहत पैकेज के जरिये खर्च और बढ़ाना सरकार के राजकोषीय संतुलन के लिए और भारी हो सकता है।
• चालू वित्त वर्ष के तहत किये गये सार्वजनिक खर्च में अब इस बात की गुंजाइश नहीं बची है कि इसे और बढ़ाया जा सके।1नोमूरा इंडिया के चीफ इकोनोमिस्ट सोनल वर्मा का मानना है कि इसलिए राहत पैकेज विकास की दर बढ़ाने में बहुत अधिक सहायक नहीं होगी। वर्मा का कहना है कि अगर सरकार के राजकोषीय रुख को देखें तो इसकी बहुत अधिक वजह खर्च है न कि राजस्व।
• उनका कहना है कि अप्रैल से जुलाई तक की अवधि में राजस्व संग्रह की रफ्तार इसकी ऐतिहासिक औसत दर से केवल 2.1 फीसद कम रही है। लेकिन अभी भी यह हाल के वर्षो में सबसे अच्छी है। बहुत संभव है कि टेलीकाम क्षेत्र, विनिवेश और लाभांश से मिलने वाला राजस्व लक्ष्य से कम रहे। लेकिन प्रत्यक्ष कर संग्रह की रफ्तार देखकर लगता है कि राजस्व संग्रह के लक्ष्य और प्राप्तियों में बहुत बड़ा अंतर नहीं रहेगा।
• शुरुआती दिक्कतों के बावजूद जीएसटी के चलते रेवेन्यू में बढ़त रहेगी।1दूसरी तरफ सरकार के खर्च का आंकड़ा बता रहा है कि यह अपने ऐतिहासिक औसत दर से साढ़े सात फीसद अधिक है। सरकार अपने व्यय के बजट लक्ष्य का 37.7 फीसद जुलाई तक खर्च कर चुकी है। यह इस अवधि में 2008-09 में खर्च की दर से भी अधिक है। उस वर्ष मंदी के चलते सरकार ने अर्थव्यवस्था के लिए राहत पैकेज जारी किया था।
• बीते वित्त वर्ष में भी इस अवधि में सरकार ने बजट अनुमान का 33.2 फीसद ही खर्च किया था। 1खर्च और राजस्व के इस अंतर के चलते सरकार का राजकोषीय घाटा भी अपने लक्ष्य से काफी अधिक चल रहा है। जुलाई 2017 तक यह बजट अनुमान के 92.4 फीसद के स्तर पर पहुंच चुका है।
• इस अवधि में सरकार का राजकोषीय घाटा 546532 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। जबकि बीते वर्ष इसी अवधि तक यह 504896 करोड़ रुपये था। माना जा रहा है कि इस वक्त सार्वजनिक खर्च में वृद्धि का मतलब राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों को खतरनाक स्तर तक लाना होगा। जबकि पैकेज देने से खर्च में इजाफा होगा।
• सरकार का सार्वजनिक खर्च पहले से ही काफी ज्यादा : नोमूरा:- अर्थव्यवस्था की दिक्कत अधिक खर्च की है राजस्व संग्रह की नहीं
• नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के आखिरी दो वर्षो में हुई आर्थिक सुस्ती खत्म हो चुकी है। अगले दो तिमाहियों में विकास दर सुधरने की संभावना है। 1 कुमार ने यह माना कि नोटबंदी और जीएसटी के चलते समस्याएं आ रही हैं।
• जीएसटी लागू करने में भी परेशानियां आ रही हैं लेकिन अब लोग इसके साथ समायोजन बनाने लगे हैं। एआइएमए के डायमंड जुबली अधिवेशन में उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास दर के लिहाज से अगला वित्त वर्ष काफी अच्छा रह सकता है।
• चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल-जून में विकास दर तीन साल के निचले स्तर 5.7 फीसद रह गई। नीति आयोग के उपाध्यक्ष का कहना है कि मैन्यूफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर का पीएमआइ जुलाई में न्यूनतम स्तर छू चुका है। अब इसमें सुधार होने लगा है।

4. भारत में तीसरी के छात्र दो अंकों को घटा नहीं सकते : विश्व बैंक

• विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत उन 12 देशों की सूची में दूसरे नंबर पर है जहां दूसरी कक्षा के छात्र एक छोटे से पाठ का एक शब्द भी नहीं पढ़ पाते।
• विश्व बैंक के अनुसार, 12 देशों की इस सूची में मलावी पहले स्थान पर है। भारत समेत निम्न और मध्यम आय वाले देशों में अपने अध्ययन के नतीजों का हवाला देते हुए विश्व बैंक ने कहा कि बिना ज्ञान के शिक्षा देना ना केवल विकास के अवसर को बर्बाद करना है बल्कि दुनियाभर में बच्चों और युवा लोगों के साथ बड़ा अन्याय भी है।
• विश्व बैंक ने अपनी ताजा रिपोर्ट में वैश्विक  शिक्षा में ज्ञान के संकट की चेतावनी दी। उसने कहा कि इन देशों में लाखों युवा छात्र बाद के जीवन में कम अवसर और कम वेतन की आशंका का सामना करते हैं क्योंकि उनके प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल उन्हें जीवन में सफल बनाने के लिए शिक्षा देने में विफल हो रहे हैं।
• बैंक ने रिपोर्ट ‘‘र्वल्ड डेवलेपमेंट रिपोर्ट 2018 : लर्निग टू रियलाइज एजुकेशन्स प्रॉमिस’ में कहा, ग्रामीण भारत में तीसरी कक्षा के तीन चौथाई छात्र दो अंकों के, घटाने वाले सवाल को हल नहीं कर सकते और पांचवीं कक्षा के आधे छात्र ऐसा नहीं कर सकते।
• रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना ज्ञान के शिक्षा गरीबी मिटाने और सभी के लिए अवसर पैदा करने और समृद्धि लाने के अपने वादे को पूरा करने में विफल होगी। यहां तक कि स्कूल में कई वर्ष बाद भी लाखों बच्चे पढ़-लिख नहीं पाते या गणित का आसान-सा सवाल हल नहीं कर पाते।

5. यूएन में भारत ने कहा- परमाणु हथियार सक्षम देशों के बीच विश्वास बढ़ाने की जरूरत

• भारत ने परमाणु हथियार कम करने और उसका दुरुपयोग रोकने के लिए विभिन्न देशों के बीच आपसी विश्वास और  भरोसा बढ़ाने के लिए सार्थक बातचीत का आह्वान किया है।
• यूएन में भारत के स्थाई राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने परमाणु निरस्त्रीकरण कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत परमाणु मुक्त विश्व के लक्ष्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विश्व को पूर्णत: परमाणु हथियार मुक्त बनाने के लिए अनुकूल परमाणु शस्त्र निरस्त्रीकरण नीति को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
• 26 सितंबर को परमाणु निरस्त्रीकरण इंटरनेशनल-डे को प्रोत्साहित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में आयोजित कॉन्फ्रेंस में अकबरुद्दीन ने कहा कि परमाणु निरस्त्रीकरण का लक्ष्य चरणबद्ध सार्वभौमिक प्रतिबद्धता एवं वैश्विक सम्मति और भेदभावरहित बहुपक्षीय प्रारूप से हासिल किया जा सकता है। इसके लिए सभी देशों के बीच सार्थक बातचीत कर आत्मविश्वास और भरोसा जगाने की जरूरत है।

6. रंग लाई मुहिम, अब सऊदी अरब में महिलाएं भी चला सकेंगी कार

• सऊदी अरब में आखिरकार महिलाओं का संघर्ष रंग लाया। यहां अब महिलाएं भी कार चला सकेंगी। इस संबंध में सऊदी अरब के किंग सलमान ने आदेश जारी कर दिया है। सऊदी की रूढ़िवादी मान्यताओं के तहत महिलाओं के गाड़ी चलाने पर रोक थी।
• सऊदी के धार्मिक प्रतिनिधि मानते रहे थे कि गाड़ी चलाने वाली महिलाएं सामाजिक मूल्यों का उल्लंघन करती हैं। दुनिया में सऊदी एकमात्र ऐसा देश था जहां महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाजत नहीं थी। इसके खिलाफ महिला संगठनों ने मुहिम छेड़ रखी थी। सऊदी किंग सलमान के इस फैसले की पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है।
• अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सकारात्मक कदम करार दिया है। व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका सऊदी समाज को सशक्त बनाने के प्रयासों को हमेशा समर्थन देता रहेगा। हालांकि फैसले के प्रभावी होने में अभी कुछ वक्त लगेगा। किंग ने आदेश पर सही तरीके से अमल करने के लिए समिति बनाने को कहा है।
• समिति 30 दिनों में अपने सुझाव देगी। फिर आदेश को 24 जून 2018 तक लागू किया जा सकेगा। वैसे शाही आदेश में शरिया कानून का भी ध्यान में रखने की बात कही गई है। फैसले से खुश अमेरिका में सऊदी के राजदूत प्रिंस खालिद बिन सलमान ने इसे ऐतिहासिक करार दिया।
• ‘विजन 2030’ का दिख रहा असर : सऊदी अरब की गिनतीकट्टरपंथी देश के तौर पर होती रही है। यहां महिलाओं के लिए काफी पाबंदियां हैं। महिलाओं के लिए मर्द अभिभावक का होना आवश्यक है। औरत को शिक्षा, शादी, नौकरी से लेकर इलाज कराने तक में मर्द की अनुमति जरूरी होती है।
• अब सऊदी अरब ‘विजन 2030’ के तहत पुराने नियम-कानूनों को बदलने में लगा हुआ है। तीन दिनों पूर्व ही सऊदी अरब ने अपने स्थापना दिवस पर पहली बार महिलाओं को स्टेडियम में हो रहे संगीत कार्यक्रम में प्रवेश की इजाजत दी थी। किंग सलमान प्रगतिशील सोच वाले शख्स हैं। वह धीरे-धीरे निर्मम रूढ़ियों व परंपराओं के बंधन से महिलाओं को आजाद करने में लगे हुए हैं।

7. ’सौभाग्य‘‘ के लिए चाहिए 28000 मेवा. अतिरिक्त बिजली

• देश में वंचित परिवारों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई सौभाग्य योजना के क्रि यान्वयन के लिए कम से कम 28,000 मेगावाट सालाना अतिरक्त बिजली की जरूरत होगी।
• योजना के क्रियान्वयन से पेट्रोलियम उत्पाद खासकर केरोसिन पर दी जाने वाली सब्सिडी में कमी आने के साथ आयात पर निर्भरता कम होगी और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से 10 करोड़ मानव श्रम दिवस रोजगार सृजित होंगे।
• बिजली मंत्रालय ने सौभाग्य योजना की विशेषताओं, उद्देश्य, क्रि यान्वयन रणनीति और इसके परिणाम के बारे में बार-बार पूछे जाने वाले सवाल के तहत विस्तार से जानकारी दी है।
• इसमें योजना के क्रि यान्वयन से बिजली की मांग में वृद्धि के बारे में कहा गया, बिजली से वंचित चार करोड़ परिवार को इसके दायरे में लाने से 28,000 मेगावाट सालाना अतिरिक्त बिजली की जरूरत होगी। योजना से आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन के बारे में बयान में कहा गया है, बिजली के उपयोग से केरोसीन की खपत घटेगी।इससे केरोसिन पर दी जाने वाली सालाना सब्सिडी में कमी आने के साथ पेट्रोलियम उत्पादों का आयात कम होगा।
• बयान के अनुसार, साथ ही प्रत्येक घर में बिजली होने से रेडियो, टेलीविजन, इटरनेट, मोबाइल आदि की पहुंच सुधरेगी। किसानो को नई कृषि तकनीक, मशीनरी, गुणवत्तापूर्ण बीज, योजनाओं आदि के बारे में जानकारी मिल सकेगी जिससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और फलस्वरूप उनकी आय बढ़ेगी। किसान और युवा कृषि आधारित लघु उद्योग लगाने पर भी विचार कर सकते हैं।
• भरोसेमंद बिजली की उपलब्धता से लोग लोग दैनिक जरूरतों की दुकान खोल सकते हैं , आटा चक्की और कुटीर उद्योग लगा सकते हैं। इस प्रकार की गतिविधियों से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से रोजगार सृजन होंगे। इतना ही नहीं योजना के क्रि यान्वयन से घरों में बिजली पहुंचाने को लेकर कार्यबल की जरूरत होगी।

8. मध्य प्रदेश में देश के पहले गो-अभयारण्य का शुभारंभ

• मध्य प्रदेश में देश के पहले गो-अभयारण्य का शुभारंभ बुधवार को 11 गायों की पूजा के साथ हुआ। अभयारण्य में गायों की नस्ल से लेकर दूध, गोबर व मूत्र तक पर शोध होगा। दवाएं भी बनेंगी, जिसकी अपूर्ति देशभर में की जाएगी। आगर-मालवा जिले की सुसनेर तहसील से 20 किमी दूर सालरिया गांव में 472 हेक्टेयर क्षेत्र में बने इस गो-अभयारण्य का भूमिपूजन पांच साल पहले हुआ था।
• इसकी क्षमता करीब छह हजार गायों की है। इसे बनाने में 31 करोड़ रुपये की लागत आई है। अभयारण्य में आवारा, बीमार, दूध नहीं देने वाले मवेशी भी रखे जाएंगे और उनका संरक्षण भी किया जाएगा।
• नौ विभागों की देखरेख में हुआ विकसित : बिजली कंपनी, पीडब्ल्यूडी, पीएचई, मत्स्य, वन, सौर ऊर्जा व कृषि समेत नौ विभागों की देखरेख में करोड़ों रुपये के प्रस्ताव बने और अभयारण्य बनाने की शुरुआत हुई। अब तक यहां कुल 31 करोड़ रुपये के काम हुए हैं।
• चारागाह विकास और जंगल विकास के कार्य में वन विभाग, अनुसंधान केंद्र में पशु चिकित्सा विभाग के साथ ही कृषि उद्यानिकी विभाग भी जुड़ा है। चारागाह विकसित किया जा रहा है। छह माह के लिए भूसे की व्यवस्था भी कर ली गई है। गायों को रखने के लिए 24 शेड तैयार हो चुके हैं।
• देखभाल के लिए 85 कर्मचारियों को ठेके पर रखा गया है। यहां शाजापुर, आगर, राजगढ़ समेत कई जिलों से गायें लाई जा चुकी हैं। ज्यादातर बेसहारा व वृद्ध हैं।

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