Wednesday, September 27, 2017

दैनिक समसामयिकी 27 Sep 2017(Wednesday)

1.अफगानिस्तान में सेना नहीं भेजेगा भारत

• भारत ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि वह आतंकवाद से जूझ रहे अफगानिस्तान में स्थिरता तथा शांति बनाए रखने के प्रयायों और विकास परियोजनाओं में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अभी भारतीय सैनिकों को वहां तैनात नहीं किया जाएगा।
• भारत की यात्रा पर आए अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त वक्तव्य जारी करने के मौके पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक अमेरिकी पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि भारत अफगानिस्तान में स्थिरता बनाए रखने, विकास परियोजनाओं में योगदान करने तथा चिकित्सा के क्षेत्र में सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन अभी भारतीय सैनिकों को वहां तैनात नहीं किया जाएगा।
• उन्होंने कहा , अभी अफगानिस्तान में कोई भारतीय सैनिक तैनात नहीं किया जाएगा। सीतारमण ने कहा कि भारत अफगानिस्तान में विकास से जुड़े मुद्दों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बढ़ावा देने के मामले में अपनी भूमिका निभाता रहेगा और जरूरत पड़ी तो इसे बढ़ाया भी जाएगा।
• चिकित्सा क्षेत्र में भी भारत अफगानिस्तान की हर संभव मदद जारी रखेगा।

2. एडीबी ने वृद्धि दर का अनुमान घटाया

• चालू वित्त वर्ष के लिए एशियाई विकास बैंक ने भारत की वृद्धि दर सात फीसद रहने का अनुमान जताया है। पहले उसने यह आंकड़ा 7.4 फीसद दिया था। अगले वित्त वर्ष के लिए भी अनुमानित वृद्धि दर का आंकड़ा घटाया गया है।
• एशियाई विकास बैंक ने अपनी एशियाई विकास परिदृश्य 2017 की अद्यतन रपट में कहा है, वित्त वर्ष 2017-18 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर घटकर सात फीसद रहने का अनुमान है। यह अप्रैल के अनुमान से 0.4 फीसद कम है। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए यह अनुमानित आंकड़ा 7.6 फीसद से घटाकर 7.4 फीसद किया गया है।
• हालांकि इस बहुपक्षीय बैंक ने कहा कि यद्यपि नोटबंदी और नई माल एवं सेवाकर व्यवस्था को लागू करने से भारत में उपभोक्ता व्यय एवं कारोबारी निवेश पर असर पड़ा है लेकिन इसके बावजूद भारत की स्थिति मजबूत बनी रहेगी। रपट में कहा गया है कि ये लघु अवधि के व्यवधान हैं और उम्मीद की जाती है कि मध्यम अवधि में इन पहलों से वृद्धि लाभांश अर्जित होगा।एशियाई विकास बैंक की नवीनतम रपट में विकासशील एशिया में वृद्धि की आशा को बरकरार रखा गया है जो कि वैश्विक  व्यापार में सुधार, बड़ी औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में तेज विस्तार और चीन की संभावनाओं के बेहतर होने का परिणाम है।

3. चार पड़ोसियों के साथ ऊर्जा नेटवर्क की बात आगे बढ़ी

• तीन अहम पड़ोसी देशों बांग्लादेश, म्यांमार और नेपाल के साथ ऊर्जा क्षेत्र में साझा भविष्य तलाशने की कूटनीतिक कोशिश में जुटे भारत को इन देशों की तरफ से बेहद सकारात्मक संकेत मिले हैं। इन तीनो देशों ने उच्च स्तर पर भारत को आश्वासन दिया है कि वे ऊर्जा नेटवर्क बनाने के भारत के प्रस्ताव से सहमत हैं।
• इसके साथ ही म्यांमार और बांग्लादेश की तरफ से वहां के ऊर्जा भंडारों में भारतीय कंपनियों को बड़ी भागीदारी देने के लिए भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं।
• भारत ने जिस तरह से पिछले कुछ वर्षो से म्यांमार और बांग्लादेश के साथ हर स्तर पर द्विपक्षीय रिश्ते सुधारने की कोशिश की है उसकी वजह से ये देश अब अपने ऊर्जा भंडार भारतीय कंपनियों के लिए ज्यादा खोलने को तैयार हैं।
• पिछले महीने ही पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने म्यांमार, बांग्लादेश, नेपाल और भारत को मिलाकर एक नेटवर्क बनाने की बात कही थी जिससे चारों देशों के बीच गैस व अन्य पेट्रो उत्पादों का बगैर किसी रोक-टोक के कारोबार हो सके।
• इस नेटवर्क की एक बड़ी खासियत यह होगी कि हर सदस्य देश के लिए उसकी जरूरत के ऊर्जा विकल्प (पेट्रोल, डीजल, गैस या क्रूड) की आपूर्ति करने में सक्षम होगा। मसलन, अगर नेपाल और बांग्लादेश को पेट्रोल व डीजल की जरूरत होगी तो इससे इन दोनो देशों को इनकी आपूर्ति होगी लेकिन भारत को बांग्लादेश और म्यांमार से गैस की आपूर्ति भी यह नेटवर्क कर सकेगा।
• इसकी लंबाई तकरीबन 6900 किलोमीटर होगी और यह म्यांमार के सित्तवे और बांग्लादेश के चिटगांव के अलावा भारत के अधिकांश पूवरेत्तर राज्यों से गुजरेगा। इस नेटवर्क को सफल बनाने के लिए भारत म्यांमार और बांग्लादेश के ऊर्जा भंडारों में बड़ी हिस्सेदारी चाहता है। 1पेट्रोलियम मंत्रलय के सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेश की सरकार जल्द ही खोज व उत्खनन के लिए निजी क्षेत्र को ब्लॉक आफर करने वाली है। ये ब्लॉक बांग्लादेश के सबसे कठिन पेट्रोलियम भंडार वाले क्षेत्रों में स्थित हैं।
• भारत की सरकारी कंपनी ओएनजीसी (विदेश) ने वर्ष 2014 में बांग्लादेश में दो अहम ब्लॉक खरीद चुकी है और इसमें अच्छा खासा निवेश भी कर रही है।

4. भारत का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील : अफगानिस्तान में आतंकवाद की फंडिंग पर लगे रोक

• भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आग्रह किया है कि वह अफगानिस्तान में आतंकवाद को होने वाले वित्तपोषण के खिलाफ प्रतिबंध व्यवस्था का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में करे। साथ ही उसने सीमा पार स्थित आतंकियों के सुरक्षित पनाहगाहों से खतरे के मद्देनजर इस हिंसाग्रस्त देश की संप्रभुता तथा स्थिरता को मजबूत करने के वास्ते समर्थन देने के लिए कहा।
• भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह भी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि किसी भी स्तर पर और किसी भी जगह पर आतंकवाद और चरमपंथी ताकतों को सुरक्षित जगहें या पनाहगाह उपलब्ध न होने दी जाए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, हमें अच्छे और बुरे आतंकियों में फर्क नहीं करना चाहिए या किसी एक समूह को दूसरे के खिलाफ नहीं खड़ा करना चाहिए।
• तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, अलकायदा, इस्लामिक स्टेट, लश्कर-ए-तय्यबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके जैसे अन्य सभी आतंकी संगठनों को संयुक्त राष्ट्र ने गैरकानूनी घोषित किया है।पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय चुप नहीं रह सकता।

5. कुर्दिस्तान की आजादी के पक्ष में बड़ी आबादी, तनाव बढ़ा

• इराक के कुदरे ने आजादी संबंधी ऐतिहासिक जनमतसंग्रह में हुए मतदान को लेकर व्यापक विरोध को नजरअंदाज किया जिसकी वजह से बगदाद और तुर्की के साथ उसका तनाव बढ़ गया है और अशांति का खतरा उत्पन्न हो गया है। मतदान के लिए उमड़े मतदाताओं में इसे लेकर खासा जोश नजर आया।
• उत्तरी इराक के स्वायत्त कुर्द क्षेत्र और कुछ विवादित इलाकों में मतदान बाध्यकारी नहीं था और इसके आधार पर सीधे आजादी नहीं मिल जाएगी। लेकिन कुर्द इसे आजादी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।
• मतदान करने के बाद मतदाता उंगली पर लगे स्याही के निशान को उत्साहपूर्वक दिखाते नजर आए। ऐसा मानना है कि मतदान का परिणाम पक्ष में आएगा। पचास लाख मतदाताओं के लिए मतदान केंद्र अंतरराष्ट्रीय समयानुसार शाम सात बजे बंद हुए थे।परिणाम 24 घंटे के भीतर आ सकते हैं।

6. पोत ‘आइएनएस तरासा’ नौसेना में शामिल

• समुद्री निगरानी और गश्त बढ़ाने के लिए मंगलवार को वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट ‘आइएनएस तरासा’ को नौसेना में शामिल कर लिया गया। पश्चिमी नौसैनिक कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा ने इस पोत को नौसेना में शामिल किया। इसे मुंबई में ही तैनात किया जाएगा।
• इसका नाम अंडमान-निकोबार के एक टापू पर रखा गया है। नौसेना ने उम्मीद जताई है कि निगरानी और गश्त के अलावा इस पोत से कानून के अनुपालन, मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में भी मदद मिलेगी। इसका निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड ने किया है। इस तरह के तीन पोतों को पहले ही नौसेना में शामिल किया जा चुका है।
• आइएनएस तारमुगली को पिछले साल मई में और आइएनएस तिहायु को पिछले साल अक्टूबर में नौसेना में शामिल किया गया था। उन्हें विशाखापट्टनम में तैनात किया गया है। आइएनएस तिल्लनचांग को इस साल मार्च में नौसेना में शामिल किया गया और उसे कारवार में तैनात किया गया है।
• खास बात यह है कि नौसेना में ‘आइएनएस तरासा’ के नाम से यह दूसरा पोत है। इस नाम का पहला पोत 1999 से 2014 तक नौसेना का हिस्सा था, लेकिन बाद में उसे सेशेल्स तटरक्षक बल को उपहार में दे दिया गया था।

7. 5जी तकनीक लाने को सरकार सक्रिय

• सरकार ने वायरलेस या मोबाइल दूरसंचार क्षेत्र में 5जी तकनीक यानी पांचवीं पीढ़ी की टेलीकॉम तकनीक लाने के लिए कमर कस ली है। इस तकनीक को 2020 तक लाने का रोडमैप तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।

• 5जी तकनीक के तहत सरकार का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में 10 हजार मेगाबिट्स प्रति सेकंड (एमबीपीएस) तथा ग्रामीण इलाकों में 1000 एमबीपीएस की डाटा स्पीड मुहैया कराना है। 5जी समिति में संचार के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रलय के सचिव शामिल होंगे।

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