दैनिक समसामयिकी
1.सरकार खुद जाचेंगी कोलेजियम की सिफारिश वाले नामों का रिकार्ड
• जज बनाने के लिए हाईकोर्ट कोलेजियम की सिफारिश वाले वकीलों और न्यायिक अफसरों (निचली अदालत के जज) की सरकार ने पहली बार विस्तृत पड़ताल शुरू करने का फैसला किया है। सरकार अब हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति के लिए प्रस्तावित उम्मीदवारों की काबिलियत को अपने स्तर पर आंकेगी। केंद्र सरकार के इस कदम से कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच एक बार फिर तल्खी बढ़ सकती है।
• कानून और न्याय मंत्रलय के दस्तावेजों के अनुसार हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए प्राप्त प्रस्तावों की विस्तृत छानबीन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वकीलों के मामले में उनके उल्लिखित फैसलों (जिसका उन्होंने प्रतिनिधित्व किया) का अध्ययन और न्यायिक अफसरों के मामले में उनके केस के निस्तारण के समय और स्थगन की संख्या का मूल्यांकन होगा।
• इस काम में कानूनी पृष्ठभूमि वाली विभागीय टीम ही लगी हुई है। जुलाई की उपलब्धियों की मासिक रिपोर्ट न्याय विभाग ने अगस्त में कैबिनेट सचिवालय को भेजी थी। जजों की एक कमेटी निचली अदालतों के जजों के कुछ सर्वश्रेष्ठ फैसलों का मूल्यांकन करती है। फिर इनमें से चुने हुए नामों को प्रोन्नत कर हाईकोर्ट का जज बनाने के लिए सिफारिश करती है।
• इसी तरह इस विशाल समूह का हिस्सा बने वरिष्ठ वकीलों के बड़े फैसलों पर भी विचार किया जाता है। सामान्यत: प्रक्रिया के तहत एक बार तीन सदस्यीय हाईकोर्ट कोलेजियम सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम को एक नाम की सिफारिश करता है। साथ ही उस उम्मीदवार की कार्यप्रणाली का इतिहास भी सर्वोच्च अदालत को भेजा जाता है। यह सिफारिश आखिर में कानून मंत्रलय को भेजी जाती है।
• मंत्रालय इसमें उस उम्मीदवार के समूचे रिकार्ड की एक आइबी रिपोर्ट संबद्ध करके अंतिम निर्णय के लिए सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम को भेजता है। लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब कानून मंत्रलय ने अपने स्तर पर वकीलों और निचली अदालत के जजों के फैसलों और उनके निस्तारण के समय की छानबीन शुरू कर दी है। सरकार अब प्रस्तावित उम्मीदवार की काबिलियत को खुद आंकेगी।
• वह देखेगी कि जिस वकील का नाम प्रस्तावित किया गया है वह किस क्षेत्र का विशेषज्ञ है। जिन केसों का उल्लेख किया गया उनमें वह सीनियर वकील था या जूनियर वकील था। हालांकि एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि चूंकि इस बात पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम को लेना होता है कि कौन हाई कोर्ट का जज बनेगा इसलिए केंद्र सरकार का इस नियुक्ति में कोई दखल नहीं होगा।
• उन्होंने बताया किकलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज सीएस कर्नन के मामले को देखते हुए सरकार ने विगत जुलाई में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम से जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया की समीक्षा करने की अपील की थी।
• हाई कोर्ट के जज के रूप में प्रस्तावित नामों की पहली बार केंद्र सरकार ने शुरू की जांच-पड़ताल
2. पाक से आए शरणार्थियों ने अनुच्छेद 35ए को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
• 1947 में विभाजन के दौरान पश्चिम पाकिस्तान से भारत आए कुछ शरणार्थियों ने संविधान के अनुच्छेद 35ए को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को विशेषाधिकार प्रदान करता है।1मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने शरणार्थियों की याचिका को इसी मामले में लंबित याचिकाओं के साथ शामिल कर लिया है।
• जम्मू-कश्मीर सरकार के आग्रह पर शीर्ष अदालत दीवाली की छुट्टी के बाद इस मामले में सुनवाई करेगी। इससे पहले कश्मीरी पंडित महिला डॉ. चारू वली खन्ना ने इस प्रावधान को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। 1पाकिस्तान से आए शरणार्थी कालिदास, उनके बेटे संजय कुमार और एक अन्य ने अपनी याचिका में तीन लाख शरणार्थियों को स्थायी निवासी का दर्जा देने की मांग की है। ताकि उन्हें रोजगार, शिक्षा, संपत्ति खरीदने और राजनीतिक भागीदारी के अधिकार मिल सकें।
• याचिका में कहा गया है कि शरणार्थियों को अनुच्छेद 35ए के तहत अधिकारों से वंचित रखा गया है। जबकि सरकार ने इस आश्वासन के साथ जम्मू-कश्मीर में रहने के लिए कहा था कि उन्हें स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) दिया जाएगा। इससे उन्हें राज्य में संपत्ति और घर खरीदने, सरकारी नौकरी पाने, आरक्षण और राज्य तथा निकाय चुनाव में मतदान के अधिकार मिलेंगे। लेकिन विभिन्न सरकारों के आश्वासनों के बावजूद उन्हें पीआरसी नहीं दिया गया।
• याचिका में कहा गया है कि शरणार्थियों और उनके बच्चों को स्वीपर से ऊपर का पद नहीं दिया जाता। सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षा और पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप नहीं दी जाती। उन्हें संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की अनुमति है। वे जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव और डीजीपी बन सकते हैं लेकिन राज्य सेवा में स्वीपर से ऊपर नहीं हो सकते।
3. पी-नोट्स के जरिये निवेश पांच साल के निचले स्तर पर
• देश में पार्टिसपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) के जरिये से घरेलू पूंजी बाजार में निवेश पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। बाजार नियामक सेबी की ओर से बनाए गए सख्त नियमों के चलते जुलाई के अंत में यह 1.35 लाख करोड़ रहा। पी-नोट के माध्यम से आने वाला संचयी निवेश जुलाई, 2012 में 1.29 लाख करोड़ रुपये था। ये आंकड़े भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की ओर से जारी किए गए हैं।
• भारतीय बाजारों में पी-नोट्स निवेश का कुल मूल्य (इक्विटी, डेट और डेरिवेटिव को मिलाकर) जुलाई के अंत में घटकर 1,35,297 करोड़ रुपये पर आ गया। यह आंकड़ा जून में 1,65,241 करोड़ था। इस साल जुलाई में सेबी ने पी-नोट्स्स के सख्त नियमों को सख्त बना दिया। नियामक ने यह कदम काले धन को पूंजी बाजार में खपाने से रोकने के लिए उठाया था। इसमें प्रत्येक निवेश इंस्ट्रूमेंट 1,000 डॉलर का शुल्क लगाया गया है।
• नियामक ने एफपीआइ की ओर से डेरिवेटिव से जुड़े पी-नोट्स जारी किए जाने पर प्रतिबंध लगाया है। इससे पहले सेबी ने अप्रैल में भारतीयों, एनआरआइ और उनके स्वामित्व वाली यूनिटों के लिए पी-नोट्स के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था।
4. चीन, भारत समेत कई देशों को उत्तर कोरिया कर रहा निर्यात
• संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अनुसार उत्तर कोरिया ने प्रतिबंधों का उल्लंघन करके चीन और भारत समेत कुछ देशों को हाल के महीनों में 270 मिलियन डॉलर (1,727 करोड़ रुपये) के माल का निर्यात किया। प्रतिबंधों के उल्लंघन की जानकारी विशेषज्ञों के दल की जांच में सामने आई है।
• संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया ने कोयला, लौह अयस्क (आयरन ओर) और अन्य वस्तुओं का निर्यात चीन, भारत, मलेशिया और श्रीलंका को किया। उसने यह निर्यात अगस्त 2017 में खत्म हुई छमाही के दौरान किया।
• यह रिपोर्ट शनिवार को सार्वजनिक की गई। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर कोरिया की किम जोंग सरकार संयुक्त राष्ट्र की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों का लगातार उल्लंघन कर रही है। वह विभिन्न देशों के साथ माल का लगातार लेन-देन कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर कोरिया प्रतिबंधित परमाणविक गतिविधियों को जारी रखे हुए है।
• वह उन तत्वों का उत्पादन और शोधन कर रहा है जिनसे परमाणु हथियार विकसित किये जा सकते हैं। इसके लिए प्योंगसान की खान से लगातार यूरेनियम निकाला जा रहा है। अफ्रीकी देशों और सीरिया के साथ उत्तर कोरिया के प्रतिबंधित गतिविधियां चलाने की खबर है।
5. बदले माहौल में भारत-चीन में फिर शुरू होगी एनएसए स्तरीय वार्ता
• डोकलाम विवाद के समाधान और उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात से बने माहौल को भारत व चीन फिलहाल किसी भी सूरत में बिगाड़ना नहीं चाहते।
• दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रियों की मनीला में शनिवार को हुई मुलाकात और उसके बाद रविवार को भारतीय सेना प्रमुख की ओर से दिया गया यह बयान कि चीन भारत के लिए खतरा नहीं है, बदले माहौल की कहानी खुद बयान कर रहे हैं।
• संकेत इस बात के हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल अपने चीनी समकक्ष यांग जिची के साथ द्विपक्षीय रणनीतिक मसलों पर जल्द ही वार्ताओं का दौर नए सिरे से शुरू करेंगे। डोभाल व जिची के बीच पिछले कुछ वर्षो में कई दौर की बातचीत हो चुकी है।
• हाल ही में ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियों और उसके बाद ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान शियामिन में इनकी मुलाकात हुई है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक डोकलाम विवाद शुरू होने से पहले डोभाल और जिची के बीच अंतिम द्विपक्षीय आधिकारिक वार्ता नवंबर, 2016 को हैदराबाद में हुई थी। तब यह सहमति बनी थी कि तमाम सीमा विवादों के स्थायी निपटारे के लिए इस वर्ष (2017) आधिकारिक वार्ताओं का नया दौर शुरू किया जाएगा।
• यह भी तय था कि पहली वार्ता भारत में होगी और पूर्व एनएसए शिवशंकर मेनन के कार्यकाल में चीन के साथ सीमा विवाद निपटारे के लिए जो बातचीत हुई है उसे अब जमीनी तौर पर लागू करने की कोशिश होगी। अब दोनों देश हैदराबाद में बनी इस सहमति के मुताबिक आगे कदम उठा सकेंगे।
• यही आगे चलकर 3500 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े तमाम विवादों के समाधान का रास्ता दिखा सकते हैं। सनद रहे कि डोभाल व जिची के बीच अप्रैल, 2016 में भी इस सिलसिले में चीन में आधिकारिक वार्ता हुई थी। आतंकवाद के साथ ही दोनों के बीच सीमा विवाद के समाधान को लेकर गंभीर चर्चा हुई थी।
• उसके बाद चीन की तरफ से यह अहम बयान आया था कि, ‘सीमा विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों को कुछ दूरी तय करनी होगी।’ इस बयान को चीन की तरफ से भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाने में नरमी के संकेत अपनाने के तौर पर देखा गया था।
6. क्या रोहिंग्या आई-कार्ड लेकर बांग्लादेश आ रहे हैं?
• बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि रोहिंग्या शरणार्थियों का संकट म्यांमार का है, इसलिए म्यांमार को इसके समाधान की ज़िम्मेदारी भी लेनी चाहिए.
• बांग्लादेश के विदेश मंत्री एएच महमूद अली ने ढाका में यूरोप और अरब देशों के राजदूतों को रोहिंग्या संकट की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने मानवीयता के मद्देनज़र रोहिंग्या को शरण दी है.
• इससे पहले, म्यांमार के मंत्री ने कहा था कि जो रोहिंग्या मुसलमान भागकर बांग्लादेश चले गए हैं, उन्हें वापस म्यांमार नहीं आने दिया जाएगा. म्यांमार सरकार ने शर्त रखी है कि जिन रोहिंग्या के पास पहचान पत्र होंगे, उन्हें ही वापस लिया जाएगा.
• इस बीच, अंतररराष्ट्रीय संगठनों के अनुमान के अनुसार रविवार तक म्यांमार छोड़कर बांग्लादेश पहुँचने वाले रोहिंग्या की संख्या तीन लाख पार कर गई है. राहत एजेंसियां रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद के लिए काम में जुट गई हैं.
• उधर, रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए उखिया बलुचली में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू किया गया है. समाचार एजेंसियों के मुताबिक करीब 2500 एकड़ ज़मीन पर ये निर्माण कार्य किए जा रहे हैं.
• राजदूतों के साथ बैठक में बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि रोहिंग्या संकट म्यांमार में शुरू हुआ है और इसके समाधान की ज़िम्मेदारी भी म्यांमार की ही है, बांग्लादेश की नहीं.
• म्यांमार के मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पहले ही कह चुके हैं कि सिर्फ़ उन्हीं रोहिंग्या को म्यांमार लौटने दिया जाएगा जिनके पास प्रमाण पत्र हैं. लेकिन सवाल उठता है कि उन शरणार्थियों के पास प्रमाण पत्र कैसे होंगे, जिनके घर जलाए जा चुके हैं.
• बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने कहा कि रोहिंग्या हज़ारों सालों से म्यांमार के नागरिक रहे हैं और म्यांमार अब उन्हें वापस लेने से इनकार नहीं कर सकता.
• संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक सहायता समूहों को म्यांमार से भागे रोहिंग्या मुस्लिमों की मदद के लिए सात करोड़ 70 लाख डॉलर की तत्काल ज़रूरत है.
• बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार पहुंच रहे शरणार्थियों के लिए खाना, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं की सख्त ज़रूरत है.(BBC)
7. उत्तर कोरिया एक अपराजेय परमाणु ताकत है'
• एक ओर जहां अंतरराष्ट्रीय समुदाय उत्तर कोरिया से निपटने की लगातार कोशिशें कर रहा है तो दूसरी तरफ़ स्थापना दिवस के मौके पर उत्तर कोरिया ने अमरीका के ख़िलाफ़ खड़े होने और एक विश्व स्तरीय सैन्य ताकत की अपनी हैसियत का प्रदर्शन किया है.
• जापानी समाचार एजेंसी क्योडो की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ उत्तर कोरिया के सबसे प्रभावशाली अख़बार 'रोडोंग सिनमुन' ने अपने पहले पन्ने पर देश की तारीफ़ करते हुए उसे 'अपराजेय परमाणु ताक़त' कहा है. रोडोंग सिनमुन' का कहना है कि पहले परमाणु बम, फिर हाइड्रोजन बम और यहां तक कि इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल हासिल करने के बाद उत्तर कोरिया ने ये हैसियत हासिल की है.
• स्थापना दिवस के मौके पर ज़्यादातर कोरियाई अख़बार लोगों से 'देशभक्ति की अलख' जगाए रखने की अपील करते हुए दिखे.
• 'रोडोंग सिनमुन' ने अपने संपादकीय में लिखा, "दुनिया के नक्शे पर कभी गर्दिश में रहा उत्तर कोरिया अब एक बार फिर से एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के तौर पर उभर सका है. हमारे आगे का रास्ता कांटों भरा ज़रूर है, लेकिन उत्तर कोरिया का भविष्य निश्चय ही उज्ज्वल है."
• एक अन्य अख़बार 'मिंजु जोसान' ने एक शक्तिशाली समाजवादी देश के निर्माण के लिए लोगों से 'देशभक्ति के भाव से समर्पण दिखाने' की अपील की है.
• इससे पहले गुरुवार को अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा था कि उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई उनके प्रशासन की 'पहली पसंद' नहीं है.
• तीन सितंबर को उत्तर कोरिया ने दावा किया था कि उसने हाइड्रोजन बम का सफल परीक्षण किया है जिसके बाद उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
• उत्तर कोरिया का दावा था कि ये बम न केवल ताकतवर है बल्कि छोटा भी है और इसे लंबी दूरी की मिसाइलों पर आसानी से फ़िट किया जा सकता है.
• बीते महीने अगस्त में उत्तर कोरिया ने लंबी दूरी की एक मिसाइल का परीक्षण किया था जो जापान के उत्तरी होकैदो द्वीप से पूर्व की ओर क़रीब तीन हज़ार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए समुद्र में जा गिरी थी.(BBC)
8. स्टीफंस बनीं चैंपियन, रचा इतिहास
• अमेरिका की स्लोएन स्टीफंस ने करिश्माई प्रदर्शन करते हुए हमवतन मैडिसन कीस को लगातार सेटों में 6-3, 6-0 से हराकर वर्ष के आखिरी ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन में महिला एकल का खिताब जीतने के साथ ही नया इतिहास रच दिया।
• स्टीफंस का यह पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल था और पहली ही बार में ग्रैंड स्लैम खिताब जीत लिया। स्टीफंस ने 22 वर्षीय मैडिसन के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया और विपक्षी खिलाड़ी को मैच में मात्र तीन गेम जीतने का मौका दिया। यूएस ओपन के इतिहास में शनिवार का दिन ऐतिहासिक दिन बन गया।
• अमेरिका को इसके साथ ही महिला वर्ग में 15 साल बाद लीजेंड विलियम्स बहनों वीनस और सेरेना के अलावा कोई और नया ग्रैंड स्लैम चैंपियन मिल गया। आखिरी बार 2002 में जेनिफर कैप्रियाती ने आस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीता था जबकि पुरु षों में 2003 में अमेरिका के एंडी रोडिक यूएस ओपन चैंपियन बने थे।

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