Thursday, September 7, 2017

07 September 2017(Thursday)

दैनिक समसामयिकी

1.सुप्रीम कोर्ट हैरान, कैसे बढ़ रही नेताओं की दनादन आमदनी

• दो चुनावों के बीच नेताओं की सम्पत्ति में 500 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ोतरी होने के बावजूद उनका ब्योरा न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। केंद्र सरकार द्वारा इस तरह के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
• सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हालांकि सरकार यह कह रही है कि वह चुनाव सुधार के खिलाफ नहीं है लेकिन उसने जरूरी विवरण पेश नहीं किए हैं। यहां तक कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड(सीबीडीटी) द्वारा उसके समक्ष सौंपे गए हलफनामे में दी गई सूचना अधूरी थी।
• जस्टिस जे चेलमेश्वर और एस अब्दुल नजीर की बेंच ने कहा कि सीबीडीटी के हलफनामे में सूचना अधूरी है। क्या यह भारत सरकार का रुख है। आपने अब तक क्या किया है। अदालत ने कहा कि सरकार कह रही है कि वह कुछ सुधार के खिलाफ नहीं है। जरूरी सूचना अदालत के रिकार्ड में होनी चाहिए। अदालत ने सरकार से 12 सितंबर तक इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दायर करने को कहा।
• सुप्रीम कोर्ट चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान उम्मीदवारों द्वारा आय के स्रेत का खुलासा करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है। सुनवाई बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश वकील ने कहा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव देश के लोकतांत्रिक ढांचे का अभिन्न हिस्सा है और वे इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के किसी भी निर्देश का स्वागत करेंगे।
• उन्होंने कहा कि भारत सरकार स्वच्छ भारत अभियान चला रही है जिसके दायरे में यह क्षेत्र भी आएगा। यह सिर्फ कचरे की सफाई करने तक सीमित नहीं है। भारत सरकार की मंशा सही दिशा में है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार सूचना सार्वजनिक करना नहीं चाहती तो वह सीलबंद लिफाफे में संबंधित जानकारी दे सकती है। लेकिन आमदनी में बेतहाशा वृद्धि की बात स्पष्ट करनी होगी। एनजीओ लोक प्रहरी ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
• याचिका में कहा गया है कि नामांकन के समय प्रत्याशी अपनी सम्पत्ति का ब्योरा देते हैं लेकिन यह नहीं बताते कि उनकी आमदनी का जरिया क्या है। आय का स्रेत बतना जरूरी है ताकि जनसाधारण को पता चल सके कि नेताओं की आय तेजी से कैसे बढ़ जाती है।

2. रोहिंग्या संकट पर भारत म्यांमार के साथ

• भारत ने म्यांमार के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या समुदाय के कट्टरपंथी लोगों की हिंसा   और सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में जनजीवन की हानि को लेकर वहां की सरकार की चिंताओं को साझा किया और उसके साथ सुरक्षा संबंधी सहयोग को व्यापक एवं सशक्त बनाने का फैसला किया।
• प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी समकक्ष एवं म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की के साथ बुधवार को यहां द्विपक्षीय बैठक में यह भावना व्यक्त की।
• प्रधानमंत्री ने विास व्यक्त किया कि आने वाले समय में भारत एवं म्यांमार पारस्परिक लाभ के लिए सशक्त और नजदीकी साझेदारी बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।
• सहयोग के कदम : दोनों देशों ने आपसी सहयोग की दिशा में अहम कदम उठाते हुए 11 समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिनमें चार समझौते समुद्री एवं तटीय सुरक्षा एवं पुलिस प्रशिक्षण में सहयोग से जुड़े हैं। अन्य समझौते प्रेस परिषद, संस्कृति, चुनाव आयोग, स्वास्य एवं तकनीकी प्रशिक्षण से संबंधित हैं।
• निकट संबंध का संकल्प : मोदी ने म्यांमार के सभी नागरिकों को नि:शुल्क वीजा दिए जाने तथा भारत की जेलों में कैद म्यांमार के 40 नागरिकों को रिहा किए जाने की भी घोषणा की। इस प्रकार से भारत ने म्यांमार के बीच नागरिकों के स्तर पर निकट संबंध स्थापित करने के संकल्प का इजहार किया।
• सू की की सराहना : बैठक के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने म्यांमार शांति प्रक्रिया में सुश्री आंग सान सू की के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा, जिन चुनौतियों का आप मुकाबला कर रही हैं, हम उन्हें पूरी तरह समझते हैं। राखाइन प्रांत में चरमपंथी हिंसा  के चलते खासकर सुरक्षाबलों और मासूम जनजीवन की हानि को लेकर आपकी चिंताओं के हम भागीदार हैं।
• सुरक्षा के हित : भारत एवं म्यांमार के बीच सुरक्षा एवं रक्षा संबंधी सहयोग की महत्ता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, पड़ोसी होने के नाते, सुरक्षा के क्षेत्र में हमारे हित एक जैसे ही हैं। इसलिए यह जरूरी है कि हम अपनी लंबी जमीनी और समुद्री सीमा पर सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करें।
• प्रधानमंत्री ने कहा, चाहे वह बड़ी शांति प्रक्रिया हो या किसी विशेष मुद्दे को सुलझाने की बात, हम आशा करते हैं कि सभी पक्षकार मिलकर ऐसा हल निकालने की दिशा में काम कर सकते हैं जिससे म्यांमार की एकता और भौगोलिक अखंडता का सम्मान करते हुए सभी के लिए शांति, न्याय और सम्मान सुनिश्चित होंगे।

• मोदी ने कहा, भारत एवं म्यांमार के बीच सड़कों और पुलों का निर्माण, ऊर्जा के लिंक्स और कनेक्टिविटी बढ़ाने के हमारे प्रयास, एक अच्छे भविष्य की ओर संकेत करते हैं।
• उन्होंने कहा, भविष्य में भी हमारी परियोजनाएं म्यांमार की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप होंगी। हमारे दोनों देशों के बीच हुए समझौतों से हमारे बहुमुखी द्विपक्षीय सहयोग को और भी बल मिलेगा। प्रधानमंत्री ने ने प्यी ताउ में अपने प्रवास को ‘‘बहुत सार्थक’ बताया और कहा, म्यांमार में अपने शेष प्रवास को लेकर भी उनके मन में उत्साह हैं।

3. भारत, जापान रक्षा सहयोग बढ़ाएंगे

• भारत एवं जापान ने दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकी सहित रक्षा उत्पादन में वृद्धि के लिए सहयोग बढ़ाने पर बुधवार को सहमति जतायी। साथ ही दोनों देशों ने द्विपक्षीय विशेष सामरिक प्रारूप के तहत समग्र सैन्य संपर्क कायम करने के प्रयास तेज करने पर प्रतिबद्धता जताई।
• रक्षामंत्री की हैसियत से जापान गये अरूण जेटली और उनके जापानी समकक्ष इत्सुनोरी ओनेडेरा के बीच मंगलवार को टोक्यो में विभिन्न मुद्दों पर र्चचा हुई।
• यह बातचीत भारत-जापान वार्षकि रक्षा मंत्री वार्ता के तहत हुई जिसमें अमेरिका के जल-थल-आकाश में चलने वाले विमान का मुद्दा भी उठा। एक संयुक्त वक्तव्य में यह जानकारी दी गई। भारत एवं जापान के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने का यह निर्णय ऐसे समय में हुआ है जबकि उत्तरी कोरिया के परमाणु परीक्षण के चलते क्षेत्र में तनाव कायम हो गया है तथा दक्षिणी चीन सागर को लेकर चीन की दावेदारी बढ़ती जा रही है।
• भारत अपनी नौसेना के लिए जापान से यूएस-2 शिनमायवा विमान खरीदने की योजना बना रहा है। पिछले साल चीन ने इन खबरों पर प्रतिक्रिया दी थी कि जापान भारत को सस्ते दामों पर हथियार बेचने की योजना बना रहा है।

4. भारत-रूस मैत्री बहुत मजबूत : सुषमा

• विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को रूस के अपने समकक्ष सरजेई लावरोव से कहा कि दोनों देशों के बीच बेहद मजबूत दोस्ती को कोई कमजोर नहीं कर सकता। सुषमा ने व्लादिवोस्तोक में आयोजित हो रहे ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम के इतर लावरोव से मुलाकात की।
• उन्होंने कहा, दोनों देशों के बीच संबंध चट्टान की तरह मजबूत हैं। रूस स्थित भारतीय दूतावास ने एक ट्वीट करके यह जानकारी दी। उनके बीच बातचीत का ब्योरा तत्काल उपलब्ध नहीं है। इससे पहले सुषमा ने फोरम में भारत रूस व्यापारिक र्चचा में भाग लिया।
• उन्होंने कहा, भारत रूस के संसाधन समृद्ध सुदूर पूर्वी भाग के साथ अपने आर्थिक संबंधों का विस्तार करने का इच्छुक है और भारत ने क्षेत्र में भारतीय निवेशकों की मदद हेतु रूसी सरकार से सहायता मांगी है।
• उन्होंने कहा, मेक इन इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया कार्यक्रमों के तहत भारत सरकार ने दुनियाभर से निवेश एवं प्रौद्योगिकी आकर्षित की है।

5. प्रतिबंध और दबाव से नहीं मानेगा उत्तर कोरिया

• उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों को बढ़ाने की तैयारी के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि प्रतिबंध और दबाव से कोरियाई प्रायद्वीप की समस्या हल नहीं होगी। उत्तर कोरिया को मुख्यधारा में लाने के लिए उसके साथ बैठकर बात करनी होगी।
• पुतिन ने यह बात दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई-इन के साथ वार्ता में कही है। इससे पहले मून ने कहा कि उत्तर कोरिया ने अपनी भड़कावे वाली गतिविधियां बंद नहीं कीं तो कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति अप्रत्याशित रूप से बिगड़ सकती है।
• आर्थिक सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस के शहर व्लादिवोस्टक पहुंचे दोनों नेताओं ने अलग से मुलाकात की है। 1मून ने उत्तर कोरिया के लगातार जारी मिसाइल परीक्षणों और ताजा परमाणु परीक्षण पर गहरी चिंता जताई। कहा कि उत्तर कोरिया लंबी दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण करने की तैयारी में है, इससे हालात और बिगड़ेंगे। व
• ह चाहते हैं कि उत्तर कोरिया को रोकने के लिए रूस भी अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे। उत्तर कोरिया के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के और कड़े प्रतिबंधों की वकालत करते हुए मून ने कहा कि अब उनके पड़ोसी को तेल का निर्यात रोका जाना चाहिए। लेकिन पुतिन ने इस प्रस्ताव पर ठंडी प्रतिक्रिया दी।
• इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिका युद्ध नहीं चाहता लेकिन उत्तर कोरिया युद्ध करने पर आमादा है। संयम की भी सीमा होती है। इसलिए समय रहते उत्तर कोरिया को रोका जाना चाहिए। जबकि संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया के राजदूत हान तेई सोंग ने कहा है कि उनका देश आत्मरक्षा में हथियारों का विकास कर रहा है, जो उसका हक है।
• इस बीच अमेरिका ने चीन में हुए ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण के निंदा किये जाने की सराहना की है।
• दक्षिण कोरिया में थाड की तैनाती : दक्षिण कोरिया में उत्तर कोरिया की सीमा के नजदीक अमेरिकी एंटी मिसाइल सिस्टम थाड की चार और बैटरी गुरुवार को तैनात कर दी जाएंगी। दो बैटरी वहां पहले से ही कार्य कर रही हैं। उत्तर कोरिया की ओर से हमले के खतरे को देखते हुए अमेरिका ने इस अत्याधुनिक एंटी मिसाइल सिस्टम को तैनात किया है।
• चीन के कड़े विरोध के बावजूद दक्षिण कोरिया में थाड की तैनाती की गई है। थाड के शक्तिशाली रडार चीन में काफी भीतर की सैन्य गतिविधियों को पकड़ लेते हैं।

6. टीआरएस विधायक रमेश चिन्नमनेनी की भारत की नागरिकता छिनी

• केंद्रीय गृह मंत्रालय  ने तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के विधायक रमेश चिन्नमनेनी की नागरिकता छीन ली है। जांच में उनके पास जर्मनी का पासपोर्ट पाया गया है। इस मामले में प्रतिक्रिया के लिए काफी प्रयासों के बावजूद चेन्नमनेनी से संपर्क नहीं हो सका है।
• भारत में दोहरी नागरिकता का कोई प्रावधान नहीं है। जन प्रतिनिधित्व कानून के अनुसार, कोई भी व्यक्ति, जो भारतीय नागरिक नहीं है, वह किसी भी चुनाव में न तो भाग ले सकता है और न ही मतदान कर सकता है।
• रमेश तेलंगाना में करीमनगर जिले की वेमुलावडा विधानसभा सीट से विधायक हैं।
• उन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिये भारतीय नागरिकता हासिल की है। वह एक उपचुनाव सहित तीन बार विधानसभा के लिए चुने गए हैं।
• गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, अदालत ने विधायक की जांच का आदेश दिया था। जांच में पता चला कि रमेश चेन्नमनेनी जर्मन नागरिक हैं। इसके बाद उनकी नागरिकता रद की गई। रमेश के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में उनके निर्वाचन को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि चेन्नमनेनी जर्मनी के पासपोर्ट धारक हैं।
• उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने जांच के आदेश दिए थे। जांच में पाया गया कि विधायक के पास जर्मनी की नागरिकता है। वह कभी भी भारत में 12 महीनों से अधिक नहीं रुके, जैसा कि विदेशी अधिनियम के तहत किसी विदेशी नागरिक के लिए आवश्यक है।
• रमेश पहली बार 2009 में तेदेपा के टिकट पर अविभाजित आंध्र प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए थे। बाद में वह टीआरएस में शामिल हो गए और पद से इस्तीफा दे दिया। 2010 में हुए उप चुनाव में टीआरएस के टिकट पर वह उसी सीट से फिर चुने गए। साल 2013 में, आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने उनके निर्वाचन को खारिज कर दिया। इसके बाद रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में शरण ली। तब शीर्ष कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।
• रोक जारी रहने के दौरान ही वह 2014 में हुए तेलंगाना विधानसभा चुनाव में टीआरएस के टिकट पर मैदान में उतरे और जीत हासिल की। इस पर उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट के आदेश पर लगाई रोक को हटाने की मांग की।
• शीर्ष कोर्ट ने तब केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस मामले में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। जांच के बाद मंत्रलय ने रमेश के पास जर्मनी की नागरिकता होने की पुष्टि की।

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