Wednesday, September 6, 2017

06 September 2017(Wednesday)

दैनिक समसामयिकी

1.मोदी-जिनपिंग की द्विपक्षीय वार्ता में बनी बात : मतभेद छोड़ आगे बढ़ें

• डोकलाम गतिरोध को पीछे छोड़ते हुए भारत और चीन अपने संबंधों को आगे बढ़ाने को लेकर सहमत हुए। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि वह रिश्तों को सही दिशा में आगे बढ़ाना चाहते हैं।
• सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में गतिरोध खत्म होने के कुछ दिन बाद दोनों नेताओं ने मंगलवार को घंटे भर की बातचीत की, जिसे मोदी ने सार्थक बताया। अपनी बैठक के दौरान दोनों नेता इस बात को लेकर सहमत हुए कि इस तरह की घटनाएं दोबारा नहीं हों, इसे सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों को अपने सुरक्षाकर्मियों के बीच सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ अधिक प्रयास करने चाहिए।
• मोदी ने शी के साथ मुलाकात के बाद ट्वीट किया, राष्ट्रपति शी से मुलाकात की। हम लोगों ने भारत और चीन के द्विपक्षीय रिश्तों के संदर्भ में सार्थक बातचीत की। बैठक के बाद यह पूछे जाने पर कि क्या दोनों पक्ष डोकलाम गतिरोध को पीछे छोड़ चुके हैं-विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा, यह भविष्योन्मुखी बातचीत रही और पीछे मुड़कर देखने वाली बातचीत नहीं थी।
• जयशंकर ने कहा, एक घंटे से अधिक समय की बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने संयुक्त आर्थिक समूह, सुरक्षा समूह और रणनीतिक समूह जैसी उन अंतर-सरकारी व्यवस्थाओं के बारे में भी बात की जिनकी मदद से दोनों देश आगे बढ़ सकते हैं।
• उन्होंने कहा, दोनों नेताओं ने दोनों पक्षों के बीच परस्पर विश्वास  को बढ़ाने और मजबूत करने के प्रयास करने की जरूरत पर जोर दिया और यह महसूस किया गया कि सुरक्षा एवं रक्षाकर्मियों को पुख्ता संपर्क और सहयोग बनाए रखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हाल ही में पैदा हुए हालात फिर न पैदा हों।
• मोदी ने बेहद सफल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर शी को बधाई दी। और कहा इस समूह को अधिक प्रासंगिक बनाने में यह सम्मेलन सफल रहा।चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग के अनुसार शी ने मोदी से कहा, चीन शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांत (पंचशील) को बरकरार रखने, राजनीतिक परस्पर विश्वास , पारस्परिक लाभदायक सहयोग को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय रिश्तों को सही मार्ग पर आगे बढ़ाने को लेकर भारत के साथ काम करने को इच्छुक है।

2. विकास के इंजन बने विकासशील देश

• चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंगलवार को कहा कि उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्थाएं और विकासशील देश दुनिया की आर्थिक वृद्धि का मुख्य इंजन बन गए हैं। उन्होंने घोषणा की चीन ऐसे देशों के लिए 50 करोड़ डालर की मदद मुहैया कराएगा।
• जिनपिंग ने यह घोषणा यहां ब्रिक्स देशों के 9वें शिखर सम्मेलन से इतर चीन की ब्रिक्स प्लस पहल बैठक के दौरान की। इसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा मिस, जिनीवा, मैक्सिको, ताजिकिस्तान व थाईलैंड के राष्ट्रप्रमुख शामिल थे।
• उभरते बाजार और विकासशील देशों के संवाद को संबोधित करते हुए जिनपिंग ने कहा, मेरी इच्छा है कि चीन दक्षिण-दक्षिण सहयोग (नियंतण्र स्तर पर दक्षिणी देश) के लिए 50 करोड़ डालर की सहायता उपलब्ध कराए।उन्होंने कहा कि यह राशि इन देशों में बाढ़, शरणार्थी, जलवायु परिवर्तन, लोक स्वास्थ्य  और अन्य चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी।
• चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा, इस संवाद में विभिन्न क्षेत्रों से विकासशील देशों के कुछ प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने का मकसद विकासशील साझेदारियों के लिए एक बड़ा नेटवर्क बनाना और साझा भविष्य एवं साझा विकास के लिए एक समुदाय का निर्माण करना है।उन्होंने सतत विकास लक्ष्य 2030 को लागू करने के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के बीच मजबूत एकजुटता और सहयोग का आह्वान किया।
• उन्होंने कहा कि नियंतण्र आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों और उभरते बाजारों की आवाज को पहचान दिलाने और प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
• जिनपिंग ने कहा कि दुनिया की आर्थिक वृद्धि के लिए उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्थाएं और विकासशील देश मुख्य इंजन हैं। अपने संबोधन में उन्होंने अपनी बेल्ट एंड रोड (बीआरआई) पहल का भी जिक्र किया जिसके तहत 50 अरब डालर की लागत से चीन-पाकिस्तान आर्थकि गलियारे (सीपीईसी) का निर्माण किया जाना है। उल्लेखनीय है कि यह गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरता है जिस पर भारत को एतराज है।

3. ब्रिक्स व्यापार परिषद से सहयोग बढ़ाए एनडीबी

• चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स व्यापार परिषद और नवीन विकास बैंक (एनडीबी) का आह्वान किया कि वह ब्रिक्स राष्ट्रों के बीच व्यापक सहयोग सुनिश्चित करें।
• ब्रिक्स व्यापारी परिषद और ब्रिक्स नेताओं के बीच बातचीत के दौरान शी ने परिषद और एनडीबी की उपलब्धियों की सराहना की।
• व्यापार परिषद में ब्रिक्स के सभी पांच देशों के कारोबारी समूह शामिल हैं। शी ने कहा कि एनडीबी ने अपने अफ्रीकी क्षेत्रीय केंद्र खोलने के साथ नई परियोजनाएं विकसित की हैं।
•  एनडीबी ने अफ्रीकी क्षेत्रीय केंद्र खोलने, अपने मुख्यालय में काम शुरू करने और कारोबारी परिचालन और व्यवस्थाओं में प्रगति के साथ नई परियोजनाएं विकसित की हैं।
•  शिन्हुआ एजेंसी के अनुसार नतीजों से ब्रिक्स के सहयोग की शक्ति और क्षमता का पता चलता है।

4. सफल हो रही पाक को घेरने की रणनीति

• दुनिया में पाकिस्तान को अलग-थलग करने की भारतीय रणनीति काम करने लगी है। अफगानिस्तान में आतंकवाद के लिए अमेरिका के निशाने पर आया पाकिस्तान अभी संभल भी नहीं पाया था कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन ने भी पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया और पहली बार घोषणापत्र में पाक पोषित आतंकी संगठनों का नाम आया। पाकिस्तान पर इन  का असर भी दिखने लगा है।
• अफगानिस्तान में आतंकवाद को लेकर अमेरिका के कड़े रुख की आशंका तो पाकिस्तान को पहले से हो रही थी, लेकिन उसे सबसे बड़ा झटका सबसे करीबी दोस्त माने जाने वाले चीन से लगा है। आतंकवाद के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र समेत तमाम अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर पाकिस्तान को बचाते आ रहे चीन ने इस बार ब्रिक्स में उसका साथ छोड़ दिया।
• मजबूरी यह है कि पाकिस्तान खुलकर चीन के खिलाफ कुछ बोल भी नहीं पा रहा है। ब्रिक्स घोषणापत्र के जवाब में पाकिस्तान सिर्फ इतना कह पाया है कि दक्षिण एशिया में अशांति के लिए कई आतंकी संगठन जिम्मेदार हैं, जिन्हें दूसरे देशों से सहायता मिलती है।
• पाकिस्तान को विश्व समुदाय में अलग-थलग करने का मिशन भारत ने पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद लगभग डेढ़ साल पहले शुरू किया था। उस समय पाकिस्तान ने भारत के प्रयासों का मजाक उड़ाया था, लेकिन अब वह इसकी आंच महसूस करने लगा है।
• जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के भारत के प्रस्ताव को पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र में चीन की मदद से वीटो कराने में सफल रहा तो अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने संयुक्त रूप से फिर से यह प्रस्ताव पेश कर दिया।
• इस पर चीन अभी तक पाकिस्तान का साथ दे रहा है, लेकिन ब्रिक्स में जिस तरह चीन का बदला हुआ रुख दिखा है, उससे मसूद अजहर को बचाने की पाकिस्तान की कोशिशें धूमिल होने की उम्मीद बढ़ गई है।
• पाकिस्तान को आने वाले समय में दुनिया को यह समझाना मुश्किल होगा कि वह अपनी धरती पर फल-फूल रहे आतंकी संगठनों पर लगाम क्यों नहीं लगा पा रहा है।
• आतंक को कूटनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने वाला पाकिस्तान बदले हुए अंतरराष्ट्रीय माहौल को पहले से ही महसूस करने लगा था। पाकिस्तान ने कश्मीरी आतंकी बुरहान वानी की मौत को लेकर भारत के खिलाफ कूटनीतिक इस्तेमाल की कोशिश की, लेकिन किसी भी देश ने उसका साथ नहीं दिया और उसे बार-बार झिडकी  का ही सामना करना पड़ा।
• इसके साथ ही आतंकी फंडिंग रोकने के लिए बने अंतरराष्ट्रीय संगठन एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) ने पाकिस्तान से जवाब तलब कर दिया। अंतरराष्ट्रीय जगत में अकेले पड़ गए पाकिस्तान को लश्कर ए तैयबा प्रमुख हाफिज सईद को नजरबंद करना पड़ गया।
• बदली हुई परिस्थितियों में पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठन भी अपना चोला बदलने पर मजबूर हो रहे हैं। हाफिज सईद के राजनीतिक दल बनाने को इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है, पर इतिहास गवाह है कि राजनीति में कदम रखने के बाद मजबूरन उसे आतंकी गतिविधियों और संगठनों से भी दूरी बनानी होगी।

5. म्यांमार में मोदी का शानदार स्वागत

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति हतिन क्याव के साथ भारत और म्यांमार के ऐतिहासिक रिश्तों को मजबूत करने पर चर्चा की। मंगलवार को म्यांमार पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का शानदार स्वागत किया गया।
• विदेश मंत्रालय  के प्रवक्ता रवीश कुमार ने म्यांमार के राष्ट्रपति क्याव द्वारा प्रधानमंत्री का स्वागत किए जाने की कुछ तस्वीरें ट्वीट की हैं। दोनों नेताओं को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। यहां पहुंचने के तुरंत बाद दोनों नेताओं की बैठक हुई।
• इस दौरान प्रधानमंत्री ने क्याव को तिब्बत के पठार से अंडमान सागर तक बहने वाली सालवीन नदी का 1841 का नक्शा और बोधिवृक्ष की मूर्ति भेंट की। उन्होंने इस मुलाकात को अद्भुत बताया। बुधवार को प्रधानमंत्री म्यामांर की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की से विस्तृत बातचीत करेंगे।
• इस दौरान मोदी द्वारा म्यांमार से पड़ोसी देशों में रो¨हग्या मुसलमानों के पलायन का मुद्दा उठाए जाने की उम्मीद है। म्यांमार के राखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों के साथ जातीय हिंसा की घटनाओं में तेजी आने के बीच प्रधानमंत्री इस देश की यात्रा  पर हैं।
• म्यांमार यात्रा से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और म्यांमार सुरक्षा और आतंक से निपटने, व्यापार एवं निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर एवं ऊर्जा और संस्कृति के क्षेत्र में मौजूदा सहयोग को बढ़ाना चाहते हैं।
• मोदी अपनी दो देशों की यात्रा के दूसरे चरण के तहत चीन के शियामिन से यहां पहुंचे हैं। यह उनकी म्यांमार की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। वह 2014 में आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने यहां आए थे।

6. रूस की चेतावनी : उत्तर कोरिया मसले का कूटनीतिक हल नहीं निकाला गया तो हो सकती है तबाही

• रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी है कि अगर उत्तर कोरिया  मसले का कूटनीतिक हल नहीं निकाला गया तो दुनिया में तबाही की स्थिति बन सकती है।
• चीन में ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा ले रहे पुतिन ने अमेरिका की उसपर और प्रतिबंध लगाए जाने की मांग को नामंजूर करते हुए कहा कि इनको कोई मतलब नहीं है।
• हालांकि उसने उकसावे की हरकतों के लिए उत्तर कोरिया की निंदा की है। इससे संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया को लेकर रूस और चीन तथा अमेरिका और यूरोप के बीच खेमेबंदी बढ़ गई है।
• उत्तर कोरिया के हाल में हाइड्रोजन बम का टेस्ट करने के बाद अमेरिका ने उसपर और सख्त प्रतिबंध लगाए जाने की वकालत की है। जर्मनी ने भी कहा कि उत्तर कोरिया के खिलाफ तत्काल और प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।

7. कृषि निर्यात के लिए नई नीति बनेगी

• वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय जल्द ही भारतीय कृषि उत्पादों की नियंतण्र बाजार में पहुंच बनाने के लिए एक नीतिगत ढांचा बनाएगा। यह जानकारी मंगलवार केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने दी।
• उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय कृषि क्षेत्र के लिए एक वैश्विक आपूर्ति  श्रृंखला विकसित करने के लिए काम करेगा। यहां एक एक कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रभु ने कहा कि भारत के कृषि निर्यात को गति देने के लिए बहुपक्षीय स्तर पर व्यापार प्रतिबंधों को भी हटाए जाने की जरूरत है।
• प्रभु ने कहा, यदि वे (किसान) कुछ उत्पादित करते हैं तो उनकी पहुंच नियंतण्र बाजार तक होनी चाहिए और उन्हें बेहतर दाम मिलने चाहिए और इसके लिए हम जल्द ही एक नीतिगत ढांचा बनाएगी।
• उन्होंने कहा कि हमारे पास हमारे कृषि उत्पादों को वैश्विक  बाजार तक जाने का अधिकार है, बस हमें सभी तरह की व्यापारिक प्रतिबंध वाली गतिविधियों को खत्म करना होगा।
•  उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार का एक लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय दोगुना करना भी है।

8. अंटार्कटिक ज्वालामुखी विस्फोटों से तेज हुआ जलवायु परिवर्तन

• एक अध्ययन में पाया गया है कि लगभग 192 साल पहले अंटार्कटिक पर हुए ज्वालामुखियों के श्रृंखलाबद्ध विस्फोटों के कारण ग्लेशियरों का पिघलना तेज हुआ होगा। इसमें कहा गया कि यह 17,700 साल पहले दक्षिण गोलार्ध में हुए व्यापक जलवायु परिवर्तन के तेज होने की शुरुआत थी।
• आज से लगभग 17,700 साल पहले शुरू हुए जलवायु परिवर्तन में अंटार्कटिक के चारों ओर चलने वाली पश्चिमी हवाएं अचानक ध्रुव की ओर जाने लगी थीं। इसके साथ ही समुद्र की बर्फ की मात्रा और समुद्र से जुड़े बदलाव भी हुए थे।
• इन बदलावों के साक्ष्य दक्षिणी गोलार्ध के कई हिस्सों में पाए गए लेकिन ये बदलाव बरकरार कैसे रहे, इस बात की व्याख्या नहीं हो पाई है।अमेरिका में ‘‘डेजर्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के जोसेफ आर मैक्कनल ने कहा, अंटार्कटिक की बर्फ के मूल के रासायनिक विश्लेषण पर पता चलता है कि पश्चिमी अंटार्कटिक माउंट ताकाहे ज्वालामुखी से निकलने वाले हैलोजन से युक्त लावा का उत्सर्जन ठीक उसी समय हुआ, जब दक्षिणी गोलार्ध में व्यापक जलवायु परिवर्तन तेज होना शुरू हुआ।
• उस समय ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा का नियंतण्र स्तर बढ़ना शुरू हुआ। हमारा मानना है कि हैलोजन युक्त इस उत्सर्जन से अंटार्कटिक पर एक समतापमंडलीय ओजोन छिद्र बन गया। इससे दक्षिणी गोलार्ध के वातावरण और जलीय जलवायु में बदलाव हुए।

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